Mahendra Narayan
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चौराहे सी ज़िन्दगी, चलने को लाचार I
असमंजस के रास्ते,मंजिल की दरकार ॥
मंजिल की दरकार,कारवां साथ न कोई ।
घनी अंधेरी रात , रोशनी लगती सोई ॥
लगे हाथ में पाँव , नही मन तन को चाहे ।
चिढ़ा रही है राह , कोसते हैं चौराहे ॥ #कविता #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #📚कविता-कहानी संग्रह #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #✍मेरे पसंदीदा लेखक
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