Vijay Dass
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कबीर साहेब का जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में काशी के लहरतारा तालाब में कमल पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए। ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3 में भी पूर्ण परमात्मा के अजन्मा होने का उल्लेख मिलता है।
कबीर साहेब प्रकट दिवस उस दिव्य प्राकट्य की स्मृति का पर्व माना जाता है जब वे सत्यलोक से सशरीर पृथ्वी पर प्रकट हुए।
कबीर साहेब का संदेश जाति-पांति से ऊपर उठकर मानवता का मार्ग दिखाता है।
प्रकट दिवस पर श्रद्धालु कबीर साहेब की शिक्षाओं का स्मरण करते हैं।
"शब्द स्वरूपी रूप है"— यह भाव कबीर साहेब की महिमा का वर्णन करता है।
प्रकट दिवस के अवसर पर श्रद्धालु आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
पूर्ण परमात्मा के अजन्मा स्वरूप पर वेदों के मंत्रों के आधार पर विचार प्रस्तुत किए जाते हैं।
कबीर साहेब की वाणी आज भी लाखों लोगों को आध्यात्मिक प्रेरणा देती है।
कबीर साहेब के संदेश का केंद्र सत्य, भक्ति और सदाचार माना जाता है।
प्रकट दिवस आध्यात्मिक जागृति और आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है। #sant ram pal ji maharaj #me follow
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