ShareChat
click to see wallet page
search
Kavita #कविता #✍️ साहित्य एवं शायरी #प्रदूषण #📚कविता-कहानी संग्रह #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य
कविता - সনুবিন বত্তি धरा पर जो धरा है, इसी धरा ने धरा है, पर यही धरा हाय! धराशायी हो रही Il प्रश्न उठता है कि प्रदूषण का दोषी कौन? प्रकृति की पाठशाला में पढ़ाई हो रही Il राग, अनुराग व पराग में लगी है आग, हर ओर की हवा हवाहवाई हो रही ।l आयु वाली वायु, प्राणवायु का हो चीरहरण, जलवायु की धरा से ही सफाई हो रही Il वायु है तो जीवन है, प्रदूषित करना कवि स्वयं के विनाश को बुलाना है। Kamlesh Soni (प्रकृति, समाज और संवेदना की आवाज़) मेरी सोच, मेरी कविता पेड़ लगाएं साइकिल प्रकृति को प्रदूषण प्रकृत्ति हमारी मौं ह॰ चायु उसका प्राण| जब चायु प्रदूषित होती ह, तो केवल वाततावरण नहीं कम कर अपनाए बचाए मानव का भविष्य भी सकट में होता है। आइए॰ हम सन मिलकर इसे स्वच्छ शुद्ध और  जीवनदायी बनाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों भी खली सांस ले सर्के। সনুবিন বত্তি धरा पर जो धरा है, इसी धरा ने धरा है, पर यही धरा हाय! धराशायी हो रही Il प्रश्न उठता है कि प्रदूषण का दोषी कौन? प्रकृति की पाठशाला में पढ़ाई हो रही Il राग, अनुराग व पराग में लगी है आग, हर ओर की हवा हवाहवाई हो रही ।l आयु वाली वायु, प्राणवायु का हो चीरहरण, जलवायु की धरा से ही सफाई हो रही Il वायु है तो जीवन है, प्रदूषित करना कवि स्वयं के विनाश को बुलाना है। Kamlesh Soni (प्रकृति, समाज और संवेदना की आवाज़) मेरी सोच, मेरी कविता पेड़ लगाएं साइकिल प्रकृति को प्रदूषण प्रकृत्ति हमारी मौं ह॰ चायु उसका प्राण| जब चायु प्रदूषित होती ह, तो केवल वाततावरण नहीं कम कर अपनाए बचाए मानव का भविष्य भी सकट में होता है। आइए॰ हम सन मिलकर इसे स्वच्छ शुद्ध और  जीवनदायी बनाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों भी खली सांस ले सर्के। - ShareChat