DILIP SAHU
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सक्ती जिले के अनछुए पहलुओं की एक झलक! 📸 आज हम आपको ले चलते हैं [दमाऊधारा /ऋषभतीर्थ ] की सैर पर, जहाँ की [खासियत - उदा. प्राचीन मंदिर/प्राकृतिक सुंदरता] देख आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। क्या आप इस जगह के बारे में जानते थे? कमेंट में हमें बताएं! 👇 दमऊ दहरा (Damau Dhara) छत्तीसगढ़ के सक्ती (Sakti) जिले का एक बेहद प्रसिद्ध, प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थल है। यह जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झरनों, गुफाओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए जानी जाती है। यह सक्ती और कोरबा के बीच के मार्ग पर, सक्ती शहर से लगभग 20 किलोमीटर (14 मील) दूर गुंजी (Gunji) गाँव के पास स्थित है। ​दमऊ दहरा के बारे में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं: ​1. प्राकृतिक आकर्षण (Natural Attractions) ​झरना और गहरी खाई: छत्तीसगढ़ी भाषा में 'दहरा' का अर्थ होता है गहरा कुंड या खाई। यहाँ सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के दक्षिणी छोर पर स्थित गुप्त गोदावरी नदी से एक सुंदर प्राकृतिक झरना गिरता है, जिसने पहाड़ों के बीच एक गहरी और मनमोहक घाटी (Ravine) का निर्माण किया है। ​पिकनिक स्पॉट: चारों तरफ घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे होने के कारण यह स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट है। पहाड़ी की चोटी पर एक छोटा मंदिर भी है, जहाँ से सक्ती और आस-पास के दूर-दराज के इलाकों का सुंदर नजारा दिखता है। ​2. धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व ​प्राचीन शिलालेख (Gunji Inscription): यहाँ झरने के पास की चट्टान पर एक प्राचीन शिलालेख मौजूद है, जिसे पुरातत्वविदों ने पहली शताब्दी ईस्वी (1st Century C.E.) का बताया है। यह शिलालेख पाली (Pali) भाषा में है। ​सांस्कृतिक धरोहर व मंदिर: दमऊ दहरा को प्राचीन 'ऋषभतीर्थ' के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ कई प्रमुख मंदिर हैं: ​राम-जानकी मंदिर ​राधा-कृष्ण मंदिर ​जैन तीर्थंकर ऋषभदेव को समर्पित ऋषभदेव मंदिर ​विशेष आयोजन: हर साल जनवरी (माघ महीने) में यहाँ एक बड़ा मेला लगता है। इसके अलावा, सूर्य ग्रहण के समाप्त होने पर यहाँ कुंड में स्नान करने की भी पुरानी धार्मिक परंपरा है। ​3. स्थानीय लोककथाएँ (Folklore) ​यहाँ के शिलालेखों को लेकर एक दिलचस्प लोककथा प्रचलित है कि जो कोई भी इस चट्टान पर लिखी सभी भाषाओं को पूरी तरह डिकोड (समझ) कर लेगा, उसे यहाँ छुपा हुआ अथाक खजाना मिलेगा। लोककथाओं के अनुसार, सक्ती के राजा बहादुर लीलाधर सिंह ने एक बार काशी के पंडितों को इसे पढ़वाने के लिए बुलाया था, लेकिन जब वे इसमें सफल नहीं हो पाए, तो राजा ने गुस्से में आकर वहां गोली चला दी थी, जिससे शिलालेख का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि, अब सरकार ने इसे सुरक्षित रखने के लिए इसके ऊपर टिन शेड लगा दिया है। ​घूमने का सबसे अच्छा समय ​मॉनसून के दौरान और उसके ठीक बाद (जुलाई से अक्टूबर/नवंबर) यहाँ का झरना पूरे उफान पर होता है और आस-पास की हरियाली देखने लायक होती है। यदि आप शांति और धार्मिक दर्शन के लिए जाना चाहते हैं, तो सर्दियों का मौसम (दिसंबर-जनवरी) भी बहुत अनुकूल रहता है। #Sakti #Chhattisgarh #LocalDiscovery #😍खूबसूरत पर्यटन स्थल🏝
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