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#आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है
সাত তিনব্ধী তযনী ৯ मुसलमान बनो ओर पूरे दक्षिण भारत का राजा बनो या मरने के लिए तेयारहो जाओ कहकर ३५ दिनों तक रोज एक॰एक अंग काटता रहा औरंगज़ेब पर हर घाव के साथ एक ही आवाज और हुँकार भरी संभाजी ने - हजार बार जियूँगा , हजार बार मरूंगा लेकिन हिन्दू धर्म नही छोड़ूंगा' हत्या से पूर्व ओरंगजेव न छत्पति संभाजी महाराज से कहा चारचेयपसएकर्शी Tr' हिन्दस्थान कब का जसा होतातोसास ुगल सल्तनत प समाण होता ea धर्मवीररसभाजी মমাযাত (14u 1657 -11  1689 ) সাত তিনব্ধী তযনী ৯ मुसलमान बनो ओर पूरे दक्षिण भारत का राजा बनो या मरने के लिए तेयारहो जाओ कहकर ३५ दिनों तक रोज एक॰एक अंग काटता रहा औरंगज़ेब पर हर घाव के साथ एक ही आवाज और हुँकार भरी संभाजी ने - हजार बार जियूँगा , हजार बार मरूंगा लेकिन हिन्दू धर्म नही छोड़ूंगा' हत्या से पूर्व ओरंगजेव न छत्पति संभाजी महाराज से कहा चारचेयपसएकर्शी Tr' हिन्दस्थान कब का जसा होतातोसास ुगल सल्तनत प समाण होता ea धर्मवीररसभाजी মমাযাত (14u 1657 -11  1689 )
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है
    Vi= KBs 4G+  l 16.52 70% शत शत नमन  चट्टोपाध्याय १९वीं शताब्दी के बंगाल के बंकिम चन्द्र विद्वान्  तथा महान् कवि और उपन्यासकार थे। সব্ধাঢভ १८७४ में प्रसिद्ध देश भक्ति गीत वन्देमातरम् की रचना की जिसे बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया। प्रसंगतः ध्यातव्य है कि वन्देमातरम् गीत को सबसे पहले १८९६ में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय था। जन्म २७ जून १८३८ वंदे मातरम्' के रचयिता Vi= KBs 4G+  l 16.52 70% शत शत नमन  चट्टोपाध्याय १९वीं शताब्दी के बंगाल के बंकिम चन्द्र विद्वान्  तथा महान् कवि और उपन्यासकार थे। সব্ধাঢভ १८७४ में प्रसिद्ध देश भक्ति गीत वन्देमातरम् की रचना की जिसे बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया। प्रसंगतः ध्यातव्य है कि वन्देमातरम् गीत को सबसे पहले १८९६ में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय था। जन्म २७ जून १८३८ वंदे मातरम्' के रचयिता
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है
    बला से हमको लटकाए अगर सरकार फांसी से, लटकते आए अक्सर पैकरे ईसार फांसी से। & लबेनदम भी न खोली ज़ालिमों ने हथकड़ी मेरी, तमन्ना थी कि करता मैं लिपटकर प्यार फांसी से। लिए লন ক आग़ोशे आज़ादी, खुली 8 मुझको ख़ुशी है, हो गया महबूब का दीदार फांसी से।  Pr চ कभी ओ बेख़बर तहरीके आज़ादी भी रुकती है? बढ़ा करती है उसकी तेज़ी ए॰रफ़्तार फांसी से।  यहां तक सरफ़रोशाने ्वतन बढ जाएंगे क़ातिल, कि लटकाने पड़ेंगे नित मुझे दो-चार फांसी आज जयंती है থান থান নমন Ram DiMad Biil WLL191377 90 Remembenng the brave nadonallst patrlotand a great freedom (lghted Ram Praso Bsmitonni 14-blrth annlvortar Ho vasono ortho founding mombors othe rovolutionary organiation HIndustan Republlean Assoclatlon  Hisultimate sacuitlcetorthe mothenana Oanroalion lor <on Inoan AAmritMahotsav बला से हमको लटकाए अगर सरकार फांसी से, लटकते आए अक्सर पैकरे ईसार फांसी से। & लबेनदम भी न खोली ज़ालिमों ने हथकड़ी मेरी, तमन्ना थी कि करता मैं लिपटकर प्यार फांसी से। लिए লন ক आग़ोशे आज़ादी, खुली 8 मुझको ख़ुशी है, हो गया महबूब का दीदार फांसी से।  Pr চ कभी ओ बेख़बर तहरीके आज़ादी भी रुकती है? बढ़ा करती है उसकी तेज़ी ए॰रफ़्तार फांसी से।  यहां तक सरफ़रोशाने ्वतन बढ जाएंगे क़ातिल, कि लटकाने पड़ेंगे नित मुझे दो-चार फांसी आज जयंती है থান থান নমন Ram DiMad Biil WLL191377 90 Remembenng the brave nadonallst patrlotand a great freedom (lghted Ram Praso Bsmitonni 14-blrth annlvortar Ho vasono ortho founding mombors othe rovolutionary organiation HIndustan Republlean Assoclatlon  Hisultimate sacuitlcetorthe mothenana Oanroalion lor <on Inoan AAmritMahotsav
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है
    सिंह करतार सराभा फ P 4 1896 ठर्ईप्वठ मगीर * १६ वठउग्ठ fu HdTg २४ मई १८९६ से १६ नवंबर १९१५ सिंह करतार सराभा फ P 4 1896 ठर्ईप्वठ मगीर * १६ वठउग्ठ fu HdTg २४ मई १८९६ से १६ नवंबर १९१५
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻गुरबानी
    क्या कोई सज्जन बताने का कष्ट करेगा? गुरु नानक देव जिनका जन्म १ ५ अप्रैल १४६९ वैसाख शुक्ल तृतीया न जाने क्यों हम इनके प्रकाश पर्व को कार्तिक को मनाते हैं। गुरु साहिब को कोटि कोटि नमन पूर्णिमा 13 क्या कोई सज्जन बताने का कष्ट करेगा? गुरु नानक देव जिनका जन्म १ ५ अप्रैल १४६९ वैसाख शुक्ल तृतीया न जाने क्यों हम इनके प्रकाश पर्व को कार्तिक को मनाते हैं। गुरु साहिब को कोटि कोटि नमन पूर्णिमा 13
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है #आज का इतिहास
    आज जिनकी जयंती है स्वतंव्रता केसाथक ~6 Amಾ 1823 जन्माष्टमी १९१३ जन्म १४ फरवरी १९५२ கஙக ப 1னவ रत य पूर्व केन्य मत्री रववस 090 विमूषण  0 सुषमा स्वराज जी आज जिनकी जयंती है स्वतंव्रता केसाथक ~6 Amಾ 1823 जन्माष्टमी १९१३ जन्म १४ फरवरी १९५२ கஙக ப 1னவ रत य पूर्व केन्य मत्री रववस 090 विमूषण  0 सुषमा स्वराज जी
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है
    आज जयंती है 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में वांग्लादेश नाम के नये देश को  विश्व के मानचित्र में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाले पद्मभूषित लेफ्टिनेंट जनरल सिंह अरोडा जी॰ जगजीत फरवरी १९१६ 33 की जयंती पर उन्हें शत् शत् नमने झुक गए नवाब झुक गए मुगल झुक गया गगन सारा जो कभी नहीं झुका ऐसा हिन्दूवीर था सूरजमल जाट हमारा! फरवरी १७०७ ?3 जन्म आज जयंती है 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में वांग्लादेश नाम के नये देश को  विश्व के मानचित्र में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाले पद्मभूषित लेफ्टिनेंट जनरल सिंह अरोडा जी॰ जगजीत फरवरी १९१६ 33 की जयंती पर उन्हें शत् शत् नमने झुक गए नवाब झुक गए मुगल झुक गया गगन सारा जो कभी नहीं झुका ऐसा हिन्दूवीर था सूरजमल जाट हमारा! फरवरी १७०७ ?3 जन्म
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है #आज का इतिहास
    सम्मानित पद्म भूषण  लोकप्रिय गजल गायक जगजीत सिंह जी को जयंती पर विनम्र अभिवादन जन्म 8 फरवरी 1९४१ अक्टूबर २०१ 1 7స10 सम्मानित पद्म भूषण  लोकप्रिय गजल गायक जगजीत सिंह जी को जयंती पर विनम्र अभिवादन जन्म 8 फरवरी 1९४१ अक्टूबर २०१ 1 7స10
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है #आज का इतिहास
    क्रांतिकारी और लेखक मन्मथनाथ गुप्त का जन्म 7 #క31T फरवरी १९०८ को वाराणसी था। उनके पिता #RR विराटनगर (नेपाल) में एक स्कूल के हेडमास्टर थे। इसलिये मन्मथनाथ गुप्त ने भी दो वर्ष वहीं शिक्षा पाई। बाद में वे वाराणसी आ गए। उस समय के राजनीतिक वातावरण का प्रभाव उन पर भी पड़ा और १९२१ में ब्रिटेन के युवराज के बहिष्कार का नोटिस बांटते हुए गिरफ्तार कर लिए गए और तीन महीने की पर उन्होंने काशी विद्यापीठ सजा हो गई। जेल से তুন में प्रवेश लिया और वहाँ से विशारद की परीक्षा उत्तीर्ण से हुआ की। तभी उनका संपर्क क्रांतिकारियों और से क्रांतिकारी बन गए। काकोरी ट्रेन पूर्णरूप मन्मथ डकैती की प्लानिंग की गई. इसमें बिस्मिल और अशफाक के अलावा आजाद, राजेन्द्र लाहिड़ी, केशव चक्रवर्ती, गुप्त, रोशन सिंह, बनवारी लाल, मुरारी राजकुमार सिन्हा आदि कई क्रांतिकारी शामिल थे. इन्हीं क्रांतिकारियों में था एक नाबालिग युवा मन्मथ नाथ गुप्त सभी का प्लान था कि केवल पैसे की डकैती हो ताकि ब्रिटिश सरकार उसको ज्यादा सीरियस ना ले. बाघा जतिन बंगाल में ऐसी ३७ डकैतियां डाल चुके थे, तय था कि किसी पर अटैक नहीं करना, कोई गोली जब तक जान पर ना आ पडे़े, नहीं चलानी. 9 अगस्त १९२५ को शाहजहांपुर से लखनऊ आ रही 8 डाउन ट्रेन को काकोरी कस्बे के पास रोककर गार्ड के डब्बे में रखे पैसों के थैलों को अपने कब्जे में लेकर सभी भाग चले कि अचानक एक गोली चल गई और हंगामा मच गया. इस डकैती में कुछ ८,००० रुपए की रकम हाथ लगी थी. ट्रेन লুন বাল 10 रोककर ब्रिटिश सरकार का खजाना व्यक्तियों में वे भी सम्मिलित थे। इसके बाद गिरफ्तार मुकदमा चला और १४ वर्ष के कारावास की सजा ভ্লী , ম্থূ १६ अक्टूबर २००० में निधन हुआ।  आज जयंती है दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी ओर लेखक मन्मथनाथ गुप्त  अंग्रेज़ी, हिंदी फरवरी को हुआ था काजन्म साल १९०८ मे 3ঁব বালো; बचपन से जवानी तक तीनों भाषाओं पर सिर्फक्रांति गज़ब की पकड थी ओर लेखन उल्लेखनीय रहा পমলী নাং কাকাযী কাভ ক লি चद्रशेखर आज़ाद १३बरस गिरफ्तार किया गया, जिसमें दे लिव्ड डेंज़रसली কী তপ্স স সাংল क्रांतिकारियों ने ट्रेन लूटी थी. दूसरी बार भगत सिंह एंड हिस टाइम्स केस्वतत्रता अंग्रेज़ों के खिलाफ लिखने पर दिन दहाडे ओर सरपर संग्राम का हिस्सा कफ़न बांध करजेसे नाखुश होकर कांग्रेस छोड़ी और  गए थे उनकी हमेशा कृतिया बन भगत आज़ाद वाली हिंदस्तान रिपब्लिक दिलाती ह याट एसोसिएशन का हिस्सा बन गए N क्रांतिकारी और लेखक मन्मथनाथ गुप्त का जन्म 7 #క31T फरवरी १९०८ को वाराणसी था। उनके पिता #RR विराटनगर (नेपाल) में एक स्कूल के हेडमास्टर थे। इसलिये मन्मथनाथ गुप्त ने भी दो वर्ष वहीं शिक्षा पाई। बाद में वे वाराणसी आ गए। उस समय के राजनीतिक वातावरण का प्रभाव उन पर भी पड़ा और १९२१ में ब्रिटेन के युवराज के बहिष्कार का नोटिस बांटते हुए गिरफ्तार कर लिए गए और तीन महीने की पर उन्होंने काशी विद्यापीठ सजा हो गई। जेल से তুন में प्रवेश लिया और वहाँ से विशारद की परीक्षा उत्तीर्ण से हुआ की। तभी उनका संपर्क क्रांतिकारियों और से क्रांतिकारी बन गए। काकोरी ट्रेन पूर्णरूप मन्मथ डकैती की प्लानिंग की गई. इसमें बिस्मिल और अशफाक के अलावा आजाद, राजेन्द्र लाहिड़ी, केशव चक्रवर्ती, गुप्त, रोशन सिंह, बनवारी लाल, मुरारी राजकुमार सिन्हा आदि कई क्रांतिकारी शामिल थे. इन्हीं क्रांतिकारियों में था एक नाबालिग युवा मन्मथ नाथ गुप्त सभी का प्लान था कि केवल पैसे की डकैती हो ताकि ब्रिटिश सरकार उसको ज्यादा सीरियस ना ले. बाघा जतिन बंगाल में ऐसी ३७ डकैतियां डाल चुके थे, तय था कि किसी पर अटैक नहीं करना, कोई गोली जब तक जान पर ना आ पडे़े, नहीं चलानी. 9 अगस्त १९२५ को शाहजहांपुर से लखनऊ आ रही 8 डाउन ट्रेन को काकोरी कस्बे के पास रोककर गार्ड के डब्बे में रखे पैसों के थैलों को अपने कब्जे में लेकर सभी भाग चले कि अचानक एक गोली चल गई और हंगामा मच गया. इस डकैती में कुछ ८,००० रुपए की रकम हाथ लगी थी. ट्रेन লুন বাল 10 रोककर ब्रिटिश सरकार का खजाना व्यक्तियों में वे भी सम्मिलित थे। इसके बाद गिरफ्तार मुकदमा चला और १४ वर्ष के कारावास की सजा ভ্লী , ম্থূ १६ अक्टूबर २००० में निधन हुआ।  आज जयंती है दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी ओर लेखक मन्मथनाथ गुप्त  अंग्रेज़ी, हिंदी फरवरी को हुआ था काजन्म साल १९०८ मे 3ঁব বালো; बचपन से जवानी तक तीनों भाषाओं पर सिर्फक्रांति गज़ब की पकड थी ओर लेखन उल्लेखनीय रहा পমলী নাং কাকাযী কাভ ক লি चद्रशेखर आज़ाद १३बरस गिरफ्तार किया गया, जिसमें दे लिव्ड डेंज़रसली কী তপ্স স সাংল क्रांतिकारियों ने ट्रेन लूटी थी. दूसरी बार भगत सिंह एंड हिस टाइम्स केस्वतत्रता अंग्रेज़ों के खिलाफ लिखने पर दिन दहाडे ओर सरपर संग्राम का हिस्सा कफ़न बांध करजेसे नाखुश होकर कांग्रेस छोड़ी और  गए थे उनकी हमेशा कृतिया बन भगत आज़ाद वाली हिंदस्तान रिपब्लिक दिलाती ह याट एसोसिएशन का हिस्सा बन गए N
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    #आज जिनकी जयन्ती है #आज जिनकी जयंती है
    पूर्णिमा, श्री गुरु रविदास जयंती माघ गुरु ग्रंथ साहिब में इनके ४० पद संग्रहित हैं। fg एक पद प्रस्तुत है जिसमें आप भगवान को पूजा के क्या भेंट करना है, बता रहे हैं। दूधु त बछरै थनहु बिटारिओ II फूलु भवरि जलु मीनि बिगारिओ IIl II माई गोबिंद पूजा कहा लै चरावउ II अवरु न फूलु अनूपु न पावउ IIl II रहाउ Il मैलागर बे्हे है भुइअंगा Il बिखु अम्रितु बसहि इक संगा II२ II धूप दीप नईबेदहि बासा Il कैसे पूज करहि तेरी दासा II३II तनु मनु अरपउ पूज चरावउ ।। निरंजनु 1 गुर परसादि qIq3 II4II पूजा अरचा आहि न तोरी Il कहि रविदास कवन गति मोरी II५ IIl II५२५ पूर्णिमा, श्री गुरु रविदास जयंती माघ गुरु ग्रंथ साहिब में इनके ४० पद संग्रहित हैं। fg एक पद प्रस्तुत है जिसमें आप भगवान को पूजा के क्या भेंट करना है, बता रहे हैं। दूधु त बछरै थनहु बिटारिओ II फूलु भवरि जलु मीनि बिगारिओ IIl II माई गोबिंद पूजा कहा लै चरावउ II अवरु न फूलु अनूपु न पावउ IIl II रहाउ Il मैलागर बे्हे है भुइअंगा Il बिखु अम्रितु बसहि इक संगा II२ II धूप दीप नईबेदहि बासा Il कैसे पूज करहि तेरी दासा II३II तनु मनु अरपउ पूज चरावउ ।। निरंजनु 1 गुर परसादि qIq3 II4II पूजा अरचा आहि न तोरी Il कहि रविदास कवन गति मोरी II५ IIl II५२५
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