#☝रहीम की सीख🌟 🕉️ तारापीठ का वो रहस्य, जो आपको हैरान कर देगा! जानें माँ तारा और 'खेपा' बामा का अटूट रिश्ता. पश्चिम बंगाल की पावन धरती पर जन्मा एक अबोध बालक, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया। गरीबी ने मामा के घर भेजा, जहाँ दुत्कार मिली। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। यह कहानी है बामाचरण (Vamacharan) की, जो आगे चलकर 'बामाखेपा' (Bama Khepa) कहलाए। दुनिया के लिए वे 'खेपा' (पागल) थे, लेकिन श्मशान में जलती चिताओं के बीच, वे अपनी 'बड़ी माँ' (तारा माई) को पुकारते थे। 📜 जब फूटी नीले आकाश से ज्योति... भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया की वो सिद्ध रात! श्मशान में जलती चिता के पास बैठे बामाचरण के सामने अचानक दिव्य प्रकाश फैल गया। बाघंबर पहने, एक हाथ में कैंची, दूसरे में खोपड़ी, नीलकमल और खड्ग धारण किए, मंद-मंद मुस्कुराती माँ तारा स्वयं प्रकट हुईं! मैया ने अपने लाल के सिर पर हाथ फेरा और बामाखेपा समाधिस्थ हो गए। 📖 अद्भुत मातृत्व और वात्सल्य की अनूठी कथा रानी के स्वप्न के बाद बामाखेपा तारापीठ के पुजारी बने। लेकिन पंडे-पुजारी परेशान थे। बामाखेपा की पूजा विधि शास्त्रों से नहीं, उनके 'दिल' से चलती थी। एक दिन, उन्होंने माँ को भोग लगाने से पहले खुद प्रसाद चख लिया! लोक-लाज के ठेकेदारों ने उन्हें बहुत मारा और मंदिर से निकाल दिया। 💔 रूठ गया तारा माँ का बेटा... बामाखेपा रूठकर जंगल में छुप गए। जैसे एक बच्चा माँ से रूठ जाता है। लेकिन माँ अपने बच्चे की व्यथा कैसे सहती? उसी रात माँ तारा ने क्रोधित होकर रानी को स्वप्न दिया— "तेरे पण्डों ने मेरे पुत्र को मारा है। मैं यह मंदिर छोड़कर जा रही हूँ। अगर प्रकोप से बचना है, तो मेरे लाल को वापस लाओ!" रानी स्वयं गुफा में गईं, बामाखेपा को मनाया और शाही फरमान जारी किया— "बामाखेपा जैसे चाहें वैसी पूजा करें, यही तारापीठ का विधान होगा।" ✨ बामाखेपा के चमत्कार और अलौकिक शक्ति माँ तारा और उनके 'पागल' बेटे का मिलन हो चुका था। कहा जाता है माँ स्वयं उनके हाथों से भोजन करती थीं। मातृ-भक्ति के कारण माँ के शव को लेकर बामाखेपा बाढ़ वाली नदी पर पैदल चलकर पार कर गए। माँ के श्राद्ध भोज में 20 गांवों को आमंत्रित किया। जब कोई सामान नहीं था, तो सुबह ही बैलगाड़ियों का काफिला अनाज लेकर पहुँच गया। घनघोर बारिश के बीच, जहाँ श्राद्ध भोज हो रहा था, वहाँ बामाखेपा ने डंडे से लकीर खींच दी। पूरे इलाके में पानी बरसा, लेकिन उस घेरे के अंदर एक बूंद भी नहीं गिरी! 🙏 निष्कर्ष बामाखेपा जीवन भर अपनी मस्ती में जिए और अंततः माँ की प्रतिमा में ही लीन हो गए। उनकी भक्ति आज भी जीवंत है। तारापीठ (Tarapith) में माँ तारा के भोग से पहले, आज भी उनके सच्चे भक्त वामाक्षेपा का भोग लगाया जाता है। ।। जय माँ तारा ।। ।। जय बामाखेपा ।। ।। ॐ नमः शिवाय ।। ।। हर हर महादेव ।। . !! जय जय श्री महाकाली !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌷शुभ गुरुवार #🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏 #👏भगवान विष्णु😇 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/ #🕉 साईं राम
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