श्यामा
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अंतः अस्ति अनंत...
प्रेम कोई भाव मात्र नहीं, वह आत्मा का स्वभाव है उसे पाने के लिए संसार की ओर नहीं, स्वयं की ओर यात्रा करनी पड़ती है जो स्वयं से मिल लेता है, उसके लिए समस्त सृष्टि प्रेममय हो उठती है बाहरी सुख क्षणभंगुर हैं, पर भीतर का आनंद शाश्वत है....
यह कविता उसी मौन सत्य की ओर संकेत करती है कि जिस प्रेम और खुशी की खोज हम जीवन भर बाहर करते हैं, वे तो हमारे ही अंतःकरण में अनादि काल से विराजमान हैं....❤️
#❣️Love you ज़िंदगी ❣️ #सिर्फ तुम #💓 मोहब्बत दिल से #💕राधेकृष्ण 💕 #🌙 गुड नाईट
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