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Misthi - Author on ShareChat
Misthi
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#gajal #gajal
गजल अब्र बनकर बसर अश्क बरसा रहा है। मुहाफिज ही आज दिल तोड़के जा रहा है। दिल का है लहू मेरे अरमानों का, बह रहा हर ख़्वाब अब्सार का टूटकर बिखरता जा रहा है। आशुफ्ता हैं दिल की सारी ख्वाहिशें , वो मेरी हर ख्वाहिश को मिटाके जा रहा है। गम अंदोज हैं दिल से लेके रूह तक, वो मेरी मोहब्बत की बस्ती को कुछ यूं जलाके जा रहा है। ने मुझसे, रुख मोड लिया है सब खुशियों वो सारे गमों से मेरा ताल्लुक जोड़के जा रहा है। कभी कसमें खाता था वो सदा साथ निभाने की आज वो मेरी हयात की नाउ को मझधार में जा रहा है। डुबोके न जाने कब से था उसके दिल में कोई मस्तूर, आज वो उसी की बांहों में सिमटने जा रहा है। मुझे करके बदनाम करके खुद तमाम अस्काम वो बे वज़ह मुझे मौत की सजा देके जा रहा है। Ris विजेन्द्र गजल अब्र बनकर बसर अश्क बरसा रहा है। मुहाफिज ही आज दिल तोड़के जा रहा है। दिल का है लहू मेरे अरमानों का, बह रहा हर ख़्वाब अब्सार का टूटकर बिखरता जा रहा है। आशुफ्ता हैं दिल की सारी ख्वाहिशें , वो मेरी हर ख्वाहिश को मिटाके जा रहा है। गम अंदोज हैं दिल से लेके रूह तक, वो मेरी मोहब्बत की बस्ती को कुछ यूं जलाके जा रहा है। ने मुझसे, रुख मोड लिया है सब खुशियों वो सारे गमों से मेरा ताल्लुक जोड़के जा रहा है। कभी कसमें खाता था वो सदा साथ निभाने की आज वो मेरी हयात की नाउ को मझधार में जा रहा है। डुबोके न जाने कब से था उसके दिल में कोई मस्तूर, आज वो उसी की बांहों में सिमटने जा रहा है। मुझे करके बदनाम करके खुद तमाम अस्काम वो बे वज़ह मुझे मौत की सजा देके जा रहा है। Ris विजेन्द्र
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  • Ajit Singh Rana No inbox pl - Author on ShareChat
    🌷 Ajit Singh Rana 🌷 🌷 No inbox pl🌷
    #🎤मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि💐 #🎶हिंदी मूवी सॉन्ग #🎼सदाबहार हिंदी गाने #🎷ओल्ड इज़ गोल्ड ##gazhal
    मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि, हिंदी मूवी सॉन्ग
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  • Ajit Singh Rana No inbox pl - Author on ShareChat
    🌷 Ajit Singh Rana 🌷 🌷 No inbox pl🌷
    #🎶हिंदी मूवी सॉन्ग #❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #🥰 इमोशनल पल ##gazhal #📜 Whatsapp स्टेटस
    हिंदी मूवी सॉन्ग, सैड व्हाट्सएप स्टेटस
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  • R - Author on ShareChat
    R 💎
    #गजल वीडियो #गजल #🎵 म्यूजिक #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️
    गजल वीडियो, गजल
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #gajal #💓 मोहब्बत दिल से
    मैं नहीं जानता की प्रेम क्या होता है, क्यों होता है, क्यों लिखा जाता है। मैं बस इतना जानता हूं अब प्रेमिक तरह की बीमारी होती है मानसिक बीमारी जो मौसम की तरह बदल दे जाती है इंसान को अंदर तक तोड़ देती है मैं नहीं जानता की प्रेम क्या होता है, क्यों होता है, क्यों लिखा जाता है। मैं बस इतना जानता हूं अब प्रेमिक तरह की बीमारी होती है मानसिक बीमारी जो मौसम की तरह बदल दे जाती है इंसान को अंदर तक तोड़ देती है
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #gajal
    कभी-कभी इंसान इसलिए भी चुप हो जाता है, क्योंकि जिसे अपनी दुनिया समझा था, उसे उसकी खामोशी में भी अपनी जगह नहीं मिलती। फिर वह मुस्कुराना तो सीख जाता है, लेकिन दिल से खुश होना जाता है. कभी-कभी इंसान इसलिए भी चुप हो जाता है, क्योंकि जिसे अपनी दुनिया समझा था, उसे उसकी खामोशी में भी अपनी जगह नहीं मिलती। फिर वह मुस्कुराना तो सीख जाता है, लेकिन दिल से खुश होना जाता है.
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #gajal #Shayari
    क्यों हमेशा पुरुष अपनों से पीछे रह जाता है. अपने पापा से गले लगाने में, अपनी माँ की गोद में सिर रखकर सोने में, और अपनी मनपसंद स्त्री को पाने में। क्योंकि उसे बचपन से ही मज़बूत बनना सिखाया जाता है, अपनी भावनाओं को छुपाना सिखाया जाता है লিব ' वह सबके जीता है, लेकिन अपने हिस्से की मोहब्बत अक्सर अधूरी रह जाती है। उसके आँसू उसकी आँखों तक आकर भी लौट जाते हैं, और उसकी ख़ामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ग़ज़ल बन जाती है। क्यों हमेशा पुरुष अपनों से पीछे रह जाता है. अपने पापा से गले लगाने में, अपनी माँ की गोद में सिर रखकर सोने में, और अपनी मनपसंद स्त्री को पाने में। क्योंकि उसे बचपन से ही मज़बूत बनना सिखाया जाता है, अपनी भावनाओं को छुपाना सिखाया जाता है লিব ' वह सबके जीता है, लेकिन अपने हिस्से की मोहब्बत अक्सर अधूरी रह जाती है। उसके आँसू उसकी आँखों तक आकर भी लौट जाते हैं, और उसकी ख़ामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ग़ज़ल बन जाती है।
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #Shayari #gajal
    हर किसी के दर्द को अपना समझ बैठा था मैं, इसलिए हर मोड़ पर तन्हा ही रह गया मैं। जिनके आँसू पोंछता था रात भर चुपचाप मैं, आज अपने ज़ख्म लेकर किसके घर जाता मैं। মনলনী কী নীs ম रिश्ते सभी खो से गए, ढूँढता फिरता रहा, अपना कहाँ पाता मैं। वक्त ने इतना बदल डाला मेरे हालात को, ৪ুঁস ২৪্া ৪ুঁ মামন, अंदर से मर जाता मैं। हर किसी के दर्द को अपना समझ बैठा था मैं, इसलिए हर मोड़ पर तन्हा ही रह गया मैं। जिनके आँसू पोंछता था रात भर चुपचाप मैं, आज अपने ज़ख्म लेकर किसके घर जाता मैं। মনলনী কী নীs ম रिश्ते सभी खो से गए, ढूँढता फिरता रहा, अपना कहाँ पाता मैं। वक्त ने इतना बदल डाला मेरे हालात को, ৪ুঁস ২৪্া ৪ুঁ মামন, अंदर से मर जाता मैं।
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #Shayari #gajal
    लड़के किसी के सामने रोते नहीं हैं.. रोते उसी के सामने हैं, जिन्हें वो जान से भी बढ़कर चाहते हैं। उन्हें रोता हुआ देखना हर किसी के नसीब में नहीं होता. या तो उनकी माँ ने देखा होता है, या फिर उनकी मनपसंद स्त्री ने। क्योंकि लड़के अपने आँसू हर किसी के सामने नहीं बहाते , वो अपने सारे दर्द को ख़ामोशी में छुपा लेते हैं। लेकिन जब किसी के सामने उनकी आँखें भर आएँ, तो समझ लेना कि उस इंसान पर उन्हें खुद से भी ज़्यादा भरोसा है। लड़के किसी के सामने रोते नहीं हैं.. रोते उसी के सामने हैं, जिन्हें वो जान से भी बढ़कर चाहते हैं। उन्हें रोता हुआ देखना हर किसी के नसीब में नहीं होता. या तो उनकी माँ ने देखा होता है, या फिर उनकी मनपसंद स्त्री ने। क्योंकि लड़के अपने आँसू हर किसी के सामने नहीं बहाते , वो अपने सारे दर्द को ख़ामोशी में छुपा लेते हैं। लेकिन जब किसी के सामने उनकी आँखें भर आएँ, तो समझ लेना कि उस इंसान पर उन्हें खुद से भी ज़्यादा भरोसा है।
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  • roshan baiplawat - Author on ShareChat
    roshan baiplawat
    #Shayari #gajal
    मैं कहीं भी जाता था ঘুমন, মনব্ধা মাথ ত্ীভব্য বম ৯ং মাথ ফ্ষনা থাI तू बोलती थी, "वो लोग उतर गए हैं", मुझे उनकी नहीं, बस तेरी चिंता थी। रहती कहा भी था, মন gs/ "मुझे उनका नहीं, तुम्हारा डर लगता है, इसलिए मैं हमेशा हूँ 5R साथ रहता तूने हँसकर पूछा था, "मेरा क्यों डर लगता है?" काश... उस दिन मेरे पास कोई जवाब होता। शायद इसलिए नहीं बता पाया, क्योंकि वो डर, डर नहीं.. तुझे खो देने का एहसास था। मैं तो हमेशा बस तेरे साथ रहना चाहता था, पर तू कभी मेरे साथ रहना ही नहीं चाहती थी। शायद... तेरी पसंद कोई और था, और मैं बस तेरी फिक्र करने वाला एक इंसान। आज भी याद आता है कि मैं सबको छोड़ सकता था. तुझे अकेला छोड़ने की हिम्मत कभी नहीं हुई। पर मैं कहीं भी जाता था ঘুমন, মনব্ধা মাথ ত্ীভব্য বম ৯ং মাথ ফ্ষনা থাI तू बोलती थी, "वो लोग उतर गए हैं", मुझे उनकी नहीं, बस तेरी चिंता थी। रहती कहा भी था, মন gs/ "मुझे उनका नहीं, तुम्हारा डर लगता है, इसलिए मैं हमेशा हूँ 5R साथ रहता तूने हँसकर पूछा था, "मेरा क्यों डर लगता है?" काश... उस दिन मेरे पास कोई जवाब होता। शायद इसलिए नहीं बता पाया, क्योंकि वो डर, डर नहीं.. तुझे खो देने का एहसास था। मैं तो हमेशा बस तेरे साथ रहना चाहता था, पर तू कभी मेरे साथ रहना ही नहीं चाहती थी। शायद... तेरी पसंद कोई और था, और मैं बस तेरी फिक्र करने वाला एक इंसान। आज भी याद आता है कि मैं सबको छोड़ सकता था. तुझे अकेला छोड़ने की हिम्मत कभी नहीं हुई। पर
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