Manoj Sir Official
आईना सच दिखाए तो तोड़ देते हैं सब
अब सच के साथ इंसाफ कौन करे
हर कोई यहाँ अपने ही गुनाह में मशगूल है
मेरे हिस्से का हिसाब कौन करे
पत्थर दिलों की बस्ती में रो रहा हूँ मैं
इन बहरों में मेरी बात कौन सुने,
बिक रहा है हर शख्स बाज़ार में यहाँ
ऐसे में खुद से प्यार कौन करे #📚कविता-कहानी संग्रह