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कवि सुमित मानधना 'गौरव' ( "कुछ मेरी कलम से ") - Author on ShareChat
कवि सुमित मानधना 'गौरव' ( "कुछ मेरी कलम से ")
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पिता पर कुछ लिख पाना कहां आसान है... #📚कविता-कहानी संग्रह #kavita #कविता #father's day
Happu [d-' पिता. FATHERS सिर्फ एक शब्द नहीं , एक a जीवन का आधार हैं। कुल्पवृक्षु आप जैसे पिता हर बच्चे के जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं ! _9[6__ ঘন বৃঞ্প ক মমান পিনা ম্ীন ষ 1 मौजूदगी में उनके हम महफूज होते हैं। जिनके साये में परिवार पलते है। बड़ी मुसीबत में पिता याद आते हैं। सूरज का होते है वो ऐसा प्रकाश, माँ के साथ प्यार भरा संसार बसाकर, ग़म के बादलों को मिटा देते है। परिवार में फर्ज बखूबी निभाते हैं । खुद भले सादगी से रहते है। बेइंतहा मोहब्बत करते हैं ! बच्चों को अप-ट्रू डेट रखते हैं । लेकिन कभी नहीं बताते हैं। பசிஈரித4f4R #, करते हैं उतना ही प्यार पापा भी, हर बात का ध्यान रखते हैं। बस माँ की तरह नहीं जताते हैं ! এিনা जमा पूंजी जोड़ कर आशियाना बनाते हैं। चेहरे पर ओज , मन में विश्वास रखते हैं । वो छाया हैं जो बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा करते हैं। हालात का सामना करने का साहस रखते हैं । धूप में भी साथ देती है, होंठों पर रख के हरदम मीठी मुस्कान , परिवार में करने ख्व़ाहिशें सबकी पूरी, वो नाव हैं जो तूफानों में भी पार लगाती हैं। हर समस्या को पिता ही सुलझाते हैं ! पिता दिन रात जी तोड़ मेहनत करते हैं ! गोर इसी अंदाज से आत्मविश्र्वास बढ़ाते है! मानधना মুহিকলী কা মাসনা কবনা মিস্ত্রান ; 1  पिता हैं तों এিনা पथ में आये चाहे अड़चनें कितनी ही , सब कुछ है ! हरदम आगे बढ़ते रहना हमें बताते है। कल्पवृक्ष हैं एक जो स्वयं जलकर भी परिवार को जीवन देते हैं ! हर पिता को থানু-থন मौलिक एवं स्वरचित रचना सुमित मानधना ` गौरव' नमन सूरत , गुजरात | ३३- 07 सुमित मानधना गौख #laughterkefatke  Happu [d-' पिता. FATHERS सिर्फ एक शब्द नहीं , एक a जीवन का आधार हैं। कुल्पवृक्षु आप जैसे पिता हर बच्चे के जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं ! _9[6__ ঘন বৃঞ্প ক মমান পিনা ম্ীন ষ 1 मौजूदगी में उनके हम महफूज होते हैं। जिनके साये में परिवार पलते है। बड़ी मुसीबत में पिता याद आते हैं। सूरज का होते है वो ऐसा प्रकाश, माँ के साथ प्यार भरा संसार बसाकर, ग़म के बादलों को मिटा देते है। परिवार में फर्ज बखूबी निभाते हैं । खुद भले सादगी से रहते है। बेइंतहा मोहब्बत करते हैं ! बच्चों को अप-ट्रू डेट रखते हैं । लेकिन कभी नहीं बताते हैं। பசிஈரித4f4R #, करते हैं उतना ही प्यार पापा भी, हर बात का ध्यान रखते हैं। बस माँ की तरह नहीं जताते हैं ! এিনা जमा पूंजी जोड़ कर आशियाना बनाते हैं। चेहरे पर ओज , मन में विश्वास रखते हैं । वो छाया हैं जो बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा करते हैं। हालात का सामना करने का साहस रखते हैं । धूप में भी साथ देती है, होंठों पर रख के हरदम मीठी मुस्कान , परिवार में करने ख्व़ाहिशें सबकी पूरी, वो नाव हैं जो तूफानों में भी पार लगाती हैं। हर समस्या को पिता ही सुलझाते हैं ! पिता दिन रात जी तोड़ मेहनत करते हैं ! गोर इसी अंदाज से आत्मविश्र्वास बढ़ाते है! मानधना মুহিকলী কা মাসনা কবনা মিস্ত্রান ; 1  पिता हैं तों এিনা पथ में आये चाहे अड़चनें कितनी ही , सब कुछ है ! हरदम आगे बढ़ते रहना हमें बताते है। कल्पवृक्ष हैं एक जो स्वयं जलकर भी परिवार को जीवन देते हैं ! हर पिता को থানু-থন मौलिक एवं स्वरचित रचना सुमित मानधना ` गौरव' नमन सूरत , गुजरात | ३३- 07 सुमित मानधना गौख #laughterkefatke
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