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- Newsgenix#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🆕 ताजा अपडेट कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके 36 दिनों तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने के बाद अपने गृह राज्य महाराष्ट्र लौट गए। घर लौटते ही उन्होंने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसा आतंकवादियों के साथ किया जाता है। अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार छात्रों के खिलाफ AK-47 तक का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने ही देश के युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार करना बेहद शर्मनाक है। दिपके ने कहा कि अगर सरकार अब भी नहीं सुधरती, तो आने वाले चुनावों में छात्र इसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा, "एक छात्र पर लाठी पड़ती है, तो उस घर के चार वोट प्रभावित होते हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह सिर्फ वोट की भाषा समझते हैं। अभी भी वक्त है, सुधर जाएं।" गौरतलब है कि NEET पेपर लीक समेत विभिन्न मांगों को लेकर CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन चला था। आंदोलन समाप्त होने के बाद भी इससे जुड़े घटनाक्रम, पुलिस कार्रवाई, छात्रों पर दर्ज एफआईआर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार चर्चा में हैं। हालांकि, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई थी। वहीं, छात्र संगठनों और CJP की ओर से कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। #Newsgenix1215
- Newsgenix#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ सेंट्रल रिजर्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) के महानिदेशक (DG) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने जवानों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा है कि ड्यूटी के दौरान ईमानदारी और नियमों के तहत लिए गए हर निर्णय की जिम्मेदारी वह स्वयं लेने के लिए तैयार हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बल के कर्मियों को अपने कर्तव्य के निर्वहन में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। सीआरपीएफ महानिदेशक ने कहा कि चाहे आतंकवाद-रोधी अभियान हो या कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी, यदि किसी जवान या अधिकारी ने पूरी ईमानदारी और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए निर्णय लिया है, तो उसकी जवाबदेही वह स्वयं स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन हो या कानून-व्यवस्था की ड्यूटी, ईमानदारी से लिए गए हर फैसले की जिम्मेदारी मेरी होगी।" यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में नीट पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दलों ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की आलोचना की है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनावश्यक बल प्रयोग किया गया। वहीं, इस मुद्दे को लेकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से भी समय-समय पर अपना पक्ष रखा गया है। इसी पृष्ठभूमि में सीआरपीएफ महानिदेशक का यह संदेश बल के जवानों का मनोबल बढ़ाने और ड्यूटी के दौरान नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने वाले कर्मियों को संस्थागत समर्थन का भरोसा देने के रूप में देखा जा रहा है। #CRPF #GyanendraPratapSingh #StudentProtest #Delhi #NEET #LawAndOrder #SecurityForces #IndiaNews #Politics #BreakingNews #Newsgenix128
- Newsgenix#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन 20 जुलाई अचानक ही हिंसा की भेंट चढ़ गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उस दिन काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के पास जंतर मंतर से संसद तक जाते हुए प्रदर्शन करने की अनुमति थी? इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन कर रहे सीजेपी के लोगों को संसद तक मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि सीजेपी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने कानून-व्यवस्था की परवाह किए बिना लामबंदी की और भारी भीड़ को संसद भवन की ओर कूच करने के लिए उकसाया था। संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने स्पष्ट किया कि सीजेपी को जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर मार्च निकालने या बैरिकेड्स पार करने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए आयोजकों को पहले ही जंतर-मंतर के निर्धारित क्षेत्र के भीतर ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन तक सीमित रहने की कई बार सख्त चेतावनी दी थी। अधिकारी ने आगे बताया कि फिर भी सीजेपी के नेतृत्व ने कानून अपने हाथ में लेते हुए सोशल मीडिया अभियानों और डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर देश के विभिन्न राज्यों (हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार आदि) से युवाओं और समर्थकों को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया। इसके परिणामस्वरूप हजारों की भीड़ जंतर-मंतर पर एकत्र हो गई, जिससे लुटियंस दिल्ली और आसपास के इलाकों में सामान्य आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ गई। निर्धारित धरनास्थल की सीमाओं का उल्लंघन कर भीड़ ने संसद मार्ग की ओर बढ़ने का प्रयास किया। बैरिकेड्स को तोड़ने, पथराव करने और भीड़ को उकसाने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा तथा आंसू गैस के गोले दागने पड़े। स्थिति तब विस्फोटक हो गई, जब बैरिकेड्स के पास तैनात पुलिस बल को भीड़ ने पीछे धकेलने की कोशिश की। स्थिति पर नियंत्रण पाने और संसद की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। #Delhi #Newsgenix811
- Jai Shree Ram#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🗞️पॉलिटिकल अपडेट #🌷भाजपा 🟠 #🌷नरेन्द्र मोदी1518
- Shubham Giri🇮🇳 राज्यसभा से 'वंदे मातरम्' विधेयक पारित: राष्ट्रीय गीत को मिलेगा कानूनी संरक्षण भारतीय संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' को पारित कर दिया है। इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को वही कानूनी संरक्षण प्रदान करना है, जो वर्तमान में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राप्त है। इस विधेयक के प्रमुख प्रावधान: 🇮🇳 'वंदे मातरम्' का अपमान अब दंडनीय अपराध होगा। ⚖️ यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर 'वंदे मातरम्' के गायन में बाधा डालता है या उसके प्रति अपमानजनक व्यवहार करता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। 📜 इस संशोधन के बाद 'वंदे मातरम्' को भी राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत वही संरक्षण मिलेगा जो राष्ट्रगान को प्राप्त है। 🌺 'वंदे मातरम्' भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत रहा है। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है। लोकतंत्र में प्रत्येक विधेयक पर चर्चा और मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान लोकतांत्रिक परंपरा की पहचान है। वंदे मातरम्! जय हिन्द! 🇮🇳 #VandeMataram #RajyaSabha #Parliament #NationalPride #IndianDemocracy #Bharat #JaiHind #NationalSong #VandeMataramBill #India #🆕 ताजा अपडेट #investment #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🚗🧗🏻भारत भ्रमण व सफर प्रेमी🚂⛰ #📢 ताज़ा खबर 🗞️157
- Newsgenix#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ओडिशा सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें "महाप्रभु जगन्नाथ" नामक एनिमेटेड फिल्म की रिलीज के लिए पूर्व में दिए गए आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि रचनात्मकता, कला और संस्कृति को केवल इसलिए सीमित नहीं किया जा सकता क्योंकि कुछ लोग देवताओं के चित्रण के प्रति संवेदनशील हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने रथ यात्रा के उत्सवों के बाद फिल्म की रिलीज की अनुमति देने वाले अपने पूर्व आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि एनिमेशन बच्चों को संलग्न करने के लिए रचनात्मकता का एक रूप है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "यदि ऐसी संवेदनशीलता जारी रहती है और लोग याचिकाएं दायर करते रहते हैं, तो हमें हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में आदेश पारित करने होंगे कि कोई रचनात्मकता नहीं होनी चाहिए। टेलीविजन पर रामायण बंद हो जाएगी। देवी-देवताओं के किसी भी रूप में कोई कला नहीं होगी।" उन्होंने कहा कि देवताओं से संबंधित कहानियां पीढ़ियों से विभिन्न रूपों में सुनाई जाती रही हैं और एनिमेशन बच्चों के लिए बनाया गया है। ओडिशा सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता पीताम्बर आचार्य ने कहा कि फिल्म को दिया गया प्रमाणपत्र संबंधित कानून के तहत संशोधन योग्य है और बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार ने समीक्षा की मांग की है। आचार्य ने पीठ को सूचित किया कि धार्मिक नेताओं, मंदिर प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई थी। भगवान जगन्नाथ के एनिमेटेड चित्रण और धार्मिक ग्रंथों के साथ इसकी असंगति पर आपत्तियां उठाई गईं। उन्होंने कहा, "हम रिलीज के खिलाफ नहीं हैं। सरकार को अपने संशोधनात्मक अधिकारों के तहत स्वतंत्र रूप से इस मुद्दे पर विचार करने दें।" हालांकि, जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अदालत कलात्मक विकल्पों पर निर्णय नहीं ले सकती। हालांकि हमने एक आदेश पारित किया, यदि कुछ संवेदनशीलता प्रभावित हुई है, तो यह निर्देशक को तय करना है। अदालत निर्णय नहीं ले सकती। फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि फिल्म में कुछ भी अपमानजनक नहीं है। उन्होंने मंदिर समिति की बैठक के मिनट्स का भी उल्लेख किया, जिसमें एनिमेटेड फिल्म को सराहनीय प्रयास बताया गया था। जस्टिस महादेवन ने सुझाव दिया कि यदि कोई चिंता बनी रहती है, तो फिल्म निर्माता सुधार करने पर विचार कर सकते हैं। #SC #Newsgenix79
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