sn vyas
🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग१०
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🥰 क्रियमाण कर्म करने के पद्धति 🥰
सतोगुण , रजोगुण और तमोगुण तीनों प्रकार के जीवों के लिए क्रियमाण कर्म करने की पद्धति भी अलग-अलग होती है, कर्म का फल तो तीनों प्रकार के जीवो को अवश्य ही मिलेगा , किंतु ;*
*सतोगुणी जीव कहता है*
*मैं कर्म करूंगा फल मिले या न मिले*
*रजोगुणी जीव कहता है*
*मैं कर्म करुगा किंतु फल नहीं छोडूंगा*
*तमोगुणी जीव कहता है*
*फल न मिले तब तक मैं कर्म नहीं करूंगा*
*एक आदमी का बेटा अचानक रात्रि को बारह बजे बीमार पड़ गया, वह आदमी आधी रात को डॉक्टर को विजिट के लिए बुलाने गया, डॉक्टर सतोगुणी था, उसने निंद्रा में से उठकर जाना कि इस आदमी का बेटा सख्त बीमार है, तुरंत ही दवाई तथा इंजेक्शन की बैग लेकर विजिट के लिए तैयार हो गया।*
*उस आदमी ने डॉक्टर को विजिट फीस के संबंध में पूछा ? किंतु सतोगुणी डॉक्टर ने कहा--- कि विजिट फीस की बात बाद में, पहले तेरे बेटे का दर्द मिटाने दे,,, विजिट फीस तो उसको मिलने वाली ही है,*
*किंतु सतोगुणी जीव कहता है--- कि मैं दर्द मिटा ऊगा , विजिट फीस मिले या ना मिले ।*
*यह डॉक्टर अगर रजोगुणी होता तो ऐसा कहता कि दर्द मिटा ऊगा किंतु मेरी विजिट फीस दस रुपये देने पड़ेंगे*
*यह डॉक्टर अगर तमोगुणी होता तो ऐसा कहता कि पहले बजट के दस रुपये रख दो फिर मैं आऊंगा।*
*तीनों की विजिट फीस तो मिलेगी ही , किंतु तीनों की क्रियमाण कर्म करने की पद्धति में फर्क पड़ेगा ,*
*यानी वह आदमी सतोगुणी डॉक्टर को खुश होकर ₹10 देगा और तमोगुणी डॉक्टर को मन में संकोच से ₹10 देगा*
*सतोगुणी, रजोगुणी और तमोगुणी, माल खरीदने जाएं , उसमें भी ऐसा ही होता है। आप घी खरीदने जाएं तो घी का व्यापारी कहेगा--- कि भाई घी ठीक से चख लेना, सूंघ लेना, पसंद पड़े तो लेना और घी लेकर घर जाने के बाद थोड़ा इस्तेमाल करने के बाद भी पसंद नहीं पड़ेगा तो बचा हुआ कि वापस कर देना। और पैसे वापस ले जाना।*
*रजोगुण वस्तु खरीदने जाओ। रेडियो, क्रोकरी ट्यूबलाइट ,इलेक्ट्रॉनिक , का सामान आदि रजोगुणी भौतिक सुख के साधन खरीदेंगे तो व्यापारी उसके बिल में छप कर ही देगा , कि माल एक दफे लेकर दुकान की सीढ़ी उतरकर घर जाने के बाद माल में किसी प्रकार का टूट-फूट अगर खराबी निकले तो माल वापस नहीं लिया जाएगा और पैसे भी वापस नहीं मिलेंगे।*
*तमोगुणी चीज लेने जाओगे तो व्यापारी पहले पैसे लिए बिना माल दिखाएगा ही नहीं। सिनेमा वाला ऐसा ही कहेगा कि टिकट खिड़की से नगद पैसा देकर टिकट खरीद लो, फिर सिनेमा में अंधेरे में बैठकर अगर आपको पसंद पड़े तो देखो या चलते बनो।पैसे तो पहले ही ले लेगा*
*वैद्य , वेश्या और वकील पहले पैसा हाथ में ना आने तक तो आपके साथ बात भी नहीं करेंगे , पहले पैसे रख दो फिर आपके सामने देखेंगे।*
विश्राम ... क्रमश ✍🏽
#कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ