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चाणूर-मुष्टिक वध लीला:: जब श्रीकृष्ण और बलराम जी मथुरा पहुँचे, तब कंस ने उन्हें मारने के लिए अपने दो महान पहलवानों चाणूर और मुष्टिक को रंगभूमि में उतारा। यह प्रसंग श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित है। चाणूर ने श्रीकृष्ण को और मुष्टिक ने बलराम जी को मल्लयुद्ध के लिए ललकारा। यद्यपि कृष्ण और बलराम किशोर अवस्था में थे, फिर भी उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए चुनौती स्वीकार कर ली। श्रीकृष्ण और चाणूर का युद्ध:: चाणूर अत्यन्त बलवान था। वह श्रीकृष्ण को पकड़ने और पराजित करने का प्रयास करने लगा, परन्तु भगवान उसके प्रत्येक आक्रमण को सहजता से विफल कर देते थे। अंत में श्रीकृष्ण ने चाणूर को पकड़कर कई बार घुमाया और भूमि पर पटक दिया। चाणूर के प्राण निकल गए। बलराम और मुष्टिक का युद्ध:: उधर बलराम जी ने मुष्टिक के साथ घोर युद्ध किया। मुष्टिक ने अनेक प्रहार किए, परन्तु बलराम जी के एक शक्तिशाली घूँसे से वह धरती पर गिर पड़ा और उसके प्राण निकल गए। इसके बाद अन्य पहलवान भी युद्ध के लिए आए, किन्तु कृष्ण और बलराम ने उन्हें भी परास्त कर दिया। यह देखकर सभा में उपस्थित सज्जनजन अत्यन्त प्रसन्न हुए और कंस भय से काँप उठा, क्योंकि उसे अपने अंत का संकेत मिल चुका था। चाणूरो मुष्टिको कूटः शलो तोशल एव च। कृष्णरामाभ्यां निहता बभूवुर्निहतौजसः॥ चाणूर, मुष्टिक, कूट, शल और तोशल आदि सभी पहलवान श्रीकृष्ण और बलराम द्वारा पराजित और वध किए गए। संदेश:: चाणूर और मुष्टिक अहंकार, दम्भ और शारीरिक बल के गर्व के प्रतीक हैं। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम यह शिक्षा देते हैं कि धर्म और सत्य के सामने संसार का सबसे बड़ा बल भी टिक नहीं सकता। भक्त जब भगवान की शरण ग्रहण करता है, तब उसके भीतर के चाणूर-मुष्टिक रूपी अहंकार और विकार नष्ट हो जाते हैं। 🙏जय श्रीकृष्ण! 🙏 #कृष्ण की लीला #श्री कृष्ण जी की अदभुत लीला।। #कृष्ण लीला
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