sn vyas
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#जय श्री कृष्ण . ' श्रीबालकृष्ण वंदना ' हे नंदलाल! हे यशोदानंदन! हे व्रज के प्राणप्रिय कान्हा! आपकी मनोहर बाल-लीलाएँ समस्त संसार को आनंद और प्रेम से भर देती हैं। मोर मुकुट से शोभित आपका मस्तक, अधरों पर मधुर मुरली, कमल-से कोमल चरण, और मुख पर निष्कपट बाल-सुलभ मुस्कान— इनका स्मरण मात्र ही मन को शांति और भक्ति से भर देता है। वन्दे नन्दव्रजस्त्रीणां पादरेणुमभीक्ष्णशः। यासां हरिकथोद्गीतं पुनाति भुवनत्रयम्॥ हे गोपाल! जैसे आपने पूतना, तृणावर्त, शकटासुर और कालिय नाग का दमन कर भक्तों की रक्षा की, वैसे ही हमारे जीवन के भय, दुःख, अहंकार और अज्ञान का भी नाश कीजिए। हमें ऐसा हृदय दीजिए जिसमें सदैव आपका नाम गूँजता रहे— "राधे-कृष्ण", "गोविन्द", "गोपाल", "श्याम", "माधव"। हे माखनचोर! हमारे मनरूपी मटके से काम, क्रोध, लोभ और मोह को दूर कर, उसमें प्रेम, करुणा, सेवा, सत्य और भक्ति का माखन भर दीजिए। कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ हे बाल गोविन्द! हमारे जीवन को अपनी कृपा-दृष्टि से आलोकित करें, हमारे परिवार में सुख, शांति, सद्बुद्धि और धर्म का वास हो, और अंत समय में आपके श्रीचरणों की भक्ति प्राप्त हो। जय नंदलाल! जय यशोदानंदन! जय मुरलीधर! जय श्री राधाकृष्ण! .
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