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2122 1212 22/112
हक़ मुहब्बत का भी अता कीजै
हर किसी पर न यूँ मिटा कीजै
क़त्ल इंसानियत हुई अब तो
आप बेशक मेरी गिला कीजै
हर तरफ है लहू मेरा बिखरा
ज़ख्मे दिल की मेरे दवा कीजै
जल रही आरजुएं सब दिल में
कुछ मेरे वास्ते भी दुआ कीजै
कर दफ्न सब शिकायते अपनी
बैठ कर हम से मश्वरा कीजै
सर ख़ुशी से झुका दिया हमने
माफ़ अब सब मेरी खता कीजै
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
22/4/2017 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️
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