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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - कुदरत उधारी नहीं रखती जो यहां छोड़़ा है वही मिलेगा ब्याज सहित मिलगा वक्त गूंगा नहीं है, बस मौन है, समय आने पर वह कर्म के रूप में जवाब जरूर देता है, आज का हंसकर किया हुआ पाप, कल रोकर चुकाना ही पड़ता है, कुदरत उधारी नहीं रखती, कर्म वो चिट्ठी है जो कभी गलत पते पर नहीं जाती, जिसने भेजी हैं उसी के पास लौटती है,, कुदरत उधारी नहीं रखती जो यहां छोड़़ा है वही मिलेगा ब्याज सहित मिलगा वक्त गूंगा नहीं है, बस मौन है, समय आने पर वह कर्म के रूप में जवाब जरूर देता है, आज का हंसकर किया हुआ पाप, कल रोकर चुकाना ही पड़ता है, कुदरत उधारी नहीं रखती, कर्म वो चिट्ठी है जो कभी गलत पते पर नहीं जाती, जिसने भेजी हैं उसी के पास लौटती है,, - ShareChat