sn vyas
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#जय श्री राम #👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान भगवान राम के प्रति रावण के अंतिम शब्द प्रसंग (पृष्ठभूमि) भगवान राम द्वारा बाण चलाए जाने के बाद, रावण दर्द से तड़पता हुआ भूमि पर गिर पड़ा। अपनी अंतिम शक्ति समेटते हुए, उसने भगवान राम को पुकारा। रावण का संदेश भगवान राम रावण के पास आए और पूछा, "क्या बात है?" अहंकार और स्वीकारोक्ति के मिले-जुले भाव के साथ रावण ने कहा: "हे राम, भले ही आपने मुझे बाण मारा है, लेकिन वास्तव में विजयी मैं ही हूँ। अपने पूरे जीवनकाल में मैंने आपको अपने राज्य लंका में प्रवेश नहीं करने दिया, और मेरी मृत्यु के बाद भी यह राज्य मेरा ही रहेगा क्योंकि मैंने अपने छोटे भाई विभीषण को आपके पास भेजा था, और आपने उसे मेरे राज्य का राजा नियुक्त कर दिया। इस प्रकार, मैंने राक्षसों के लिए इस राज्य को सुरक्षित रख लिया। यदि मैंने समय रहते विभीषण को आपके पास न भेजा होता, तो आज आप लंका के राजा होते। आप मेरी इस कूटनीति को समझ नहीं सके। सुनिए, मैं आपसे पहले आपके परम धाम (आध्यात्मिक लोक) जा रहा हूँ, और आप मुझे अपने धाम में प्रवेश करने से नहीं रोक सकते। हे राम, यदि आप इन सब बातों पर गंभीरता से विचार करेंगे, तो आप पाएँगे कि विजय मेरी ही हुई है!" भगवान राम की प्रतिक्रिया दिव्य कृपा और करुणा के प्रतीक भगवान राम ने बिना किसी क्रोध या द्वेष के रावण की बातें सुनीं। रावण के जीवनभर की शत्रुता और अहंकार के बावजूद, भगवान राम ने अपनी असीम दया का परिचय देते हुए उसे अपने नित्य धाम भेज दिया। कहानी की सीख यह प्रसंग स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ईश्वर से अधिक उदार और दयालु कोई नहीं है। रावण ने भगवान को कष्ट पहुँचाया और उनके विरुद्ध युद्ध लड़ा, फिर भी अंत में भगवान ने उसे अपने परम धाम में स्थान दिया। केवल एक अज्ञानी व्यक्ति ही ऐसे परम दयालु प्रभु को छोड़कर किसी अन्य की उपासना करेगा। भगवान की सेवा करना और उनके पवित्र नामों का जप करना मनुष्य की समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण कर सकता है।
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