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सुशील मेहता - Author on ShareChat
सुशील मेहता
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पद दयाबाई #संतो की रचनायें
4 भयो अविद्या तम को नास।। ज्ञान रूप को भयो प्रकास। सूझ परयो निज रूप अभेद। सहजै मिठ्यो जीव को खेद।I जीव ग्रह्म अन्तर नहिं कोय। एकै रूप सर्व घट सोय।। जगत बिबर्त सूँ न्यारा जान। परम अद्वैत रूप निर्बान।l बिमल रूप व्यापक सब ठाईं। ]HIsేII अरध उरध महॅ रहत ٨٤٩١ महा सुद्ध साच्छा परमातम प्रभु परम अनूप।। নিযুন Rarfl निराकार आदि निरंजन अज अविनासी II दयाबाई Motivational Videos App Want ' 4 भयो अविद्या तम को नास।। ज्ञान रूप को भयो प्रकास। सूझ परयो निज रूप अभेद। सहजै मिठ्यो जीव को खेद।I जीव ग्रह्म अन्तर नहिं कोय। एकै रूप सर्व घट सोय।। जगत बिबर्त सूँ न्यारा जान। परम अद्वैत रूप निर्बान।l बिमल रूप व्यापक सब ठाईं। ]HIsేII अरध उरध महॅ रहत ٨٤٩١ महा सुद्ध साच्छा परमातम प्रभु परम अनूप।। নিযুন Rarfl निराकार आदि निरंजन अज अविनासी II दयाबाई Motivational Videos App Want '
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    सुशील मेहता
    सबद संत संत शिवदयाल #संतो की रचनायें
    "सबद" त्याग दे प्यारी जग ब्योहार। बिरह अवस्था आ कर छाई, अब ग़फ़लत तज हा हुशियार।। सतसंग कर गुरु बचन सम्हारो, भेद लेव तुम सत करतार। घर चलने की जुगत कमाओ , गुरु चरनन में लाओ प्यार।। बिरह अंग ले चालो घट में , मन के निकारो सबहि बिकार। राधास्वामी दया संग ले अपने, सहजहि उतरो भौ जल पार।। (संत शिवदयाल) Motivational Videos App Want . "सबद" त्याग दे प्यारी जग ब्योहार। बिरह अवस्था आ कर छाई, अब ग़फ़लत तज हा हुशियार।। सतसंग कर गुरु बचन सम्हारो, भेद लेव तुम सत करतार। घर चलने की जुगत कमाओ , गुरु चरनन में लाओ प्यार।। बिरह अंग ले चालो घट में , मन के निकारो सबहि बिकार। राधास्वामी दया संग ले अपने, सहजहि उतरो भौ जल पार।। (संत शिवदयाल) Motivational Videos App Want .
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    सुशील मेहता
    सबद बुल्ला साहिब #संतो की रचनायें
    "सबद" अनहद ताल दृग थेइ-्थेई बाजै। सकल भुवन जा की जोति बिराजै II ब्रह्मा बिस्नु खड़े सिव द्वारे। परम जोति सो करहिं जुहारे।I गगन मँडल महँ निर्तन होय। सतगुरु मिलै तो देखै सोय। आठ पहर जन बुल्ला गाजै। भक्ति भाव माथे पर छाजै ।l (बुल्ला साहिब) Motivational Videos Appi Want ' "सबद" अनहद ताल दृग थेइ-्थेई बाजै। सकल भुवन जा की जोति बिराजै II ब्रह्मा बिस्नु खड़े सिव द्वारे। परम जोति सो करहिं जुहारे।I गगन मँडल महँ निर्तन होय। सतगुरु मिलै तो देखै सोय। आठ पहर जन बुल्ला गाजै। भक्ति भाव माथे पर छाजै ।l (बुल्ला साहिब) Motivational Videos Appi Want '
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    सुशील मेहता
    पद सूरदास #संतो की रचनायें
    पद मैया , मैं तो चंद खिलौना लैहौं | जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं Il सुरी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं| ga ह्वैहौं पूत नंद बाबा कौ, न कहैहौं Il सुनि मेरी, आगैं आउ, बात बलदेवहि न जनैहौं | हॅँसि समुझावति, কমনি जसोमति , नई दुलहिया दैहौं Il तेरी सौं, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं | सूरदास ह्वै बराती, गीत कुटिल गैहौं Il सुमंगल सूरदास Want Motivational Videos App पद मैया , मैं तो चंद खिलौना लैहौं | जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं Il सुरी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं| ga ह्वैहौं पूत नंद बाबा कौ, न कहैहौं Il सुनि मेरी, आगैं आउ, बात बलदेवहि न जनैहौं | हॅँसि समुझावति, কমনি जसोमति , नई दुलहिया दैहौं Il तेरी सौं, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं | सूरदास ह्वै बराती, गीत कुटिल गैहौं Il सुमंगल सूरदास Want Motivational Videos App
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    सुशील मेहता
    दोहा बुल्लेशाह #संतो की रचनायें
    दोहा बुल्लया अच्छे दिन तो पिच्छे गए, जब हर से किया न हेत। अब पछतावा क्या करे, जब चि़ड़ियाँ चुग गईं खेत। बुल्लेशाह दोहा बुल्लया अच्छे दिन तो पिच्छे गए, जब हर से किया न हेत। अब पछतावा क्या करे, जब चि़ड़ियाँ चुग गईं खेत। बुल्लेशाह
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    सुशील मेहता
    चौपाई राम चरित्र मानस #संतो की रचनायें
    "चौपाई" एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई II नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं | पलटि सठ बिष लेहीं Il सुधा ते भावार्थः हे भाई!़ इस शरीर के प्राप्त होने का फल विषयभोग नहीं है (इस जगत् के भोगों की तो बात ही क्या) स्वर्ग का भोग भी बहुत थोड़ा है, और अंत में दुःख देने वाला है। अतः जो लोग मनुष्य शरीर पाकर विषयों में मन लगा देते हैं, वे मूर्ख अमृत को बदलकर विष पी लेते हैं। मन को विषयो के प्रति आसक्त करना मृत्यु को वरन करने के सामान है। (अतः इस दुर्लभ शरीर को सत्कर्म में लगाना चाहिए।) (रामचरितमानस) Motivational Videos App Want . "चौपाई" एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई II नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं | पलटि सठ बिष लेहीं Il सुधा ते भावार्थः हे भाई!़ इस शरीर के प्राप्त होने का फल विषयभोग नहीं है (इस जगत् के भोगों की तो बात ही क्या) स्वर्ग का भोग भी बहुत थोड़ा है, और अंत में दुःख देने वाला है। अतः जो लोग मनुष्य शरीर पाकर विषयों में मन लगा देते हैं, वे मूर्ख अमृत को बदलकर विष पी लेते हैं। मन को विषयो के प्रति आसक्त करना मृत्यु को वरन करने के सामान है। (अतः इस दुर्लभ शरीर को सत्कर्म में लगाना चाहिए।) (रामचरितमानस) Motivational Videos App Want .
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    सुशील मेहता
    चौपाई सहजो बाई #संतो की रचनायें
    चौपाई लोहे को पारस होय लागै कंचन करै बेर नहिं ताकै सिख पलास चंदन करि डारै मलयागिरि ह्वै कारज सारै सिख समान कीट के आवै भृंगी होइ करि ताहि बनावै करै भृंगी ढील न कोई पलटै रूप पाछलो सोई बिना लोय दीपक सिख परसै ह्वै दीपक तिनहूं कूँ दरसै बकसै अपनी ज्योति उजारा होय चाँदना भवन मँझारा चरनदास' गुरु समरथ ऐसे सहजो बाई' भाखत जैसे सब गत सब अंग हैं उन माहीं उनसे भेद छिप्यो कोइ नाहीं सहजोबाई Motivational Videos App Want ' चौपाई लोहे को पारस होय लागै कंचन करै बेर नहिं ताकै सिख पलास चंदन करि डारै मलयागिरि ह्वै कारज सारै सिख समान कीट के आवै भृंगी होइ करि ताहि बनावै करै भृंगी ढील न कोई पलटै रूप पाछलो सोई बिना लोय दीपक सिख परसै ह्वै दीपक तिनहूं कूँ दरसै बकसै अपनी ज्योति उजारा होय चाँदना भवन मँझारा चरनदास' गुरु समरथ ऐसे सहजो बाई' भाखत जैसे सब गत सब अंग हैं उन माहीं उनसे भेद छिप्यो कोइ नाहीं सहजोबाई Motivational Videos App Want '
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    सुशील मेहता
    क़ाफी बुल्लेशाह #संतो की रचनायें
    क़ाफी" रैन गई लटके सभ तारे अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे आवागौन सराईं डेरे साथ त्यार मुसाफ़र तेरे तैं ना सुण्यु कूच नगारे अब तो जाग मुसाफ़र யR कर लै अज्ज करनी दा बेरा बहुड़ ना होसी आवन तेरा साथी चलो चल्ल अब तो जाग मुसाफ़र पुकारे प्यारे क्या सरधन क्या निर्धन पौड़े आपने आपने देश को दौड़े लद्धा नाम लै लियौ सभारे अब तो जाग मुसाफ़र யR मोती चूनी पारस पासे पास समुंदर मरो प्यासे खोल्ह अक्खीं उट्ठ बहु भिकारे अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे 'बुल्ल्हा' शौह दी पैरीं पड़िए ग़फ़लत छोड़ कुझ हीला करिए मिरग जतन बिन खेत उजाड़े अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे रैन गई लटके सभ तारे अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे (बुल्लेशाह) Want . Motivational Videos App' क़ाफी" रैन गई लटके सभ तारे अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे आवागौन सराईं डेरे साथ त्यार मुसाफ़र तेरे तैं ना सुण्यु कूच नगारे अब तो जाग मुसाफ़र யR कर लै अज्ज करनी दा बेरा बहुड़ ना होसी आवन तेरा साथी चलो चल्ल अब तो जाग मुसाफ़र पुकारे प्यारे क्या सरधन क्या निर्धन पौड़े आपने आपने देश को दौड़े लद्धा नाम लै लियौ सभारे अब तो जाग मुसाफ़र யR मोती चूनी पारस पासे पास समुंदर मरो प्यासे खोल्ह अक्खीं उट्ठ बहु भिकारे अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे 'बुल्ल्हा' शौह दी पैरीं पड़िए ग़फ़लत छोड़ कुझ हीला करिए मिरग जतन बिन खेत उजाड़े अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे रैन गई लटके सभ तारे अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे (बुल्लेशाह) Want . Motivational Videos App'
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    सुशील मेहता
    कुण्डली संत गंगादास #संतो की रचनायें
    துளி देखा देखी जोग से जोगी रोगी होय कर्मन्ज्ञान को त्याग कर, महा होय ।। कुयोगी होय उभय लोकों कुयोगी महा যী আন गिर गए कच्चे फूल फेर फल कैसे आवै || गंगादास कहें सरम करें ना मारें सेखी बेशरमों के पंथ चले सब देखा & I गंगादास Motivational Videos App Want துளி देखा देखी जोग से जोगी रोगी होय कर्मन्ज्ञान को त्याग कर, महा होय ।। कुयोगी होय उभय लोकों कुयोगी महा যী আন गिर गए कच्चे फूल फेर फल कैसे आवै || गंगादास कहें सरम करें ना मारें सेखी बेशरमों के पंथ चले सब देखा & I गंगादास Motivational Videos App Want
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    सुशील मेहता
    दोहा बुल्लेशाह #संतो की रचनायें
    GG दोहा ठाकुरद्वारे ठग्ग बसें , 05 मसीत भाईद्वार हरि के द्वारे भिक्ख बसें, 1 fa एह हमरी बुल्लेशाह D GG दोहा ठाकुरद्वारे ठग्ग बसें , 05 मसीत भाईद्वार हरि के द्वारे भिक्ख बसें, 1 fa एह हमरी बुल्लेशाह D
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