sn vyas
994 views 1 months ago
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 💐|| सब कुछ भगवान ही हैं ||💐 * शरीर - इंद्रियाँ - मन - बुद्धि से जो भी सात्विक , राजस और तामस भाव , क्रिया , पदार्थ आदि ग्रहण किये जाते हैं , वे सब भगवान ही हैं | मन की स्फुरणा मात्र भगवान ही है | * संसार में अच्छा - बुरा , शुद्ध - अशुद्ध , शत्रु - मित्र , दुष्ट - सज्जन , पापात्मा - पुण्यात्मा आदि जो कुछ भी देखने , सुनने , कहने , सोचने , समझने आदि में आता है , वह सब - का - सब केवल भगवान ही है | शरीर - शरीरी , क्षेत्र - क्षेत्रज्ञ , अपरा - परा , क्षर - अक्षर आदि सब केवल भगवान ही हैं | जब सब कुछ भगवान ही है तो फिर उसमें " मैं " कहाँ से आये ? " मैं " है ही नहीं , केवल तू - ही - तू है - तू तू करता तू भया , मुझमें रही न हूँ | वारी फेरी बलि गई , जित देखूँ तित तू || * अब भगवान की प्राप्ति में देरी किस बात की है ? भगवत् प्राप्ति तत्काल होने वाली वस्तु है ! * मान लो कि हम एक नदी को देख रहे हैं | किसी जानकार व्यक्ति ने हमारे से कहा कि यह नदी गंगाजी है | यह सुनते ही हमारी भावना बदल गयी , द्रष्टि बदल गयी | इसमें देरी क्या लगी ? परिश्रम ( अभ्यास ) क्या करना पडा ? किस क्रिया और पदार्थ की आवश्यकता पडी ? * सब कुछ भगवान ही हैं - इस वास्तविक बात को स्वीकार करने के लिये न कोई ग्रंथ पढना है , न कोई ध्यान करना है , न कोई चिन्तन करना है , न श्रवण - मनन - निदिध्यासन करना है , न आँख मींचनी है , न कान मूँदने है , न नाक दबानी है , न जंगल जाना है , न गुफा में जाना है , न हिमालय में जाना है ! * केवल अपनी सत्ता को अलग न रख कर भगवान में मिला देना है | " मैं और "मेरा" को छोड कर " तू " और " तेरा " को स्वीकार करना है | फिर " तेरा " भी नहीं रहे प्रत्युत तू - ही - तू रह जाये | " मैं " की जगह केवल भगवान ही रह जायें ! * यह सिद्धान्त है कि जो बस्तु सब समय में मौजूद होती है , उसकी प्राप्ति के लिये भविष्य की अपेक्षा नहीं होती और जो बस्तु सब जगह मौजूद होती है , उसकी प्राप्ति किसी क्रिया तथा पदार्थ से नहीं होती | * कहीं जाने से जो परमात्मा मिलेंगें , वे ही परमात्मा जहाँ हम हैं वहाँ पूरे - के - पूरे हैं ! कहीं जाने की , कुछ बदलने की जरूरत नहीं है केवल मन बदलने की जरूरत है ! * वास्तव में जीव अपने मन की भावना से ही बँधता तथा मुक्त होता है ! सब जग ईश्वर रूप है बुरो - भलो नहिं कोय | जाकी जैसी भावना तैसो ही फल होय || 🍃 || श्री हरि: शरणम् ||🍃 🚩🍃🚩🍃🚩🍃🚩🍃🚩 🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂
17 likes
11 shares

More like this