Abhinav Kumar Singh
मस्तक ऊँचा हुआ मही का, धन्य हिमालय का उत्कर्ष।
हरि का क्रीड़ा-क्षेत्र हमारा, भूमि-भाग्य-सा भारतवर्ष॥
अपनी ओजस्वी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना व सामाजिक जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने वाले महान साहित्यकार, 'पद्म भूषण' से सम्मानित, 'राष्ट्रकवि' मैथिलीशरण गुप्त जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन!
भारतीय संस्कृति, नारी गौरव तथा देशप्रेम को अपनी कविताओं में जीवंत करने वाले मैथिलीशरण गुप्त जी का अमूल्य साहित्यिक योगदान हर पीढ़ी को सदैव मार्गदर्शित करता रहेगा।
#जयंती