🌸 श्री लाड़ली जू सरकार की मोरकुटी लीला 🌸
#राधा रानी #🙏 राधा रानी
ब्रज की अनेक दिव्य लीलाओं में मोरकुटी लीला अत्यंत मधुर, प्रेममयी और रहस्यमयी मानी जाती है। यह लीला विशेष रूप से बरसाना और वृंदावन के निकुंजों से जुड़ी हुई है।
कथा है कि एक बार वर्षा ऋतु का सुहावना समय था। ब्रज के वन-उपवन हरियाली से आच्छादित थे। आकाश में घने मेघ छाए हुए थे और चारों ओर मोर अपने पंख फैलाकर आनंदपूर्वक नृत्य कर रहे थे। उनके मधुर स्वर और नृत्य को देखकर श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न हुए।
जब श्रीकृष्ण ने मोरों का नृत्य देखा तो उनके मन में भी नृत्य करने की इच्छा जागृत हुई। उसी समय श्री लाड़ली जू सरकार (श्री राधारानी) अपनी सखियों सहित वहाँ पधारीं। श्रीकृष्ण ने मोरों का रूप धारण कर लिया और मोरों के साथ नृत्य करने लगे।
श्रीराधा जी ने जब यह अद्भुत दृश्य देखा तो वे भी मोरनी के भाव में आ गईं। तब दोनों युगल सरकार ने मोर और मोरनी के रूप में ऐसा अलौकिक नृत्य किया कि सम्पूर्ण ब्रज उस प्रेमरस में डूब गया। देवता भी इस लीला को देखने के लिए आकाश से पुष्पवर्षा करने लगे।
जहाँ यह दिव्य लीला सम्पन्न हुई, वही स्थान आज मोरकुटी के नाम से प्रसिद्ध है। बरसाना में स्थित मोरकुटी भक्तों के लिए अत्यंत पावन तीर्थ है। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा से मोरकुटी के दर्शन करता है, उसके हृदय में राधा-कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का अंकुर अवश्य फूटता है। 💖
🌿 मोरकुटी लीला का संदेश 🌿
मोरकुटी लीला हमें सिखाती है कि जब हृदय में निष्कपट प्रेम और समर्पण हो, तब स्वयं भगवान भी भक्तों के साथ आनंद और प्रेम के खेल में सम्मिलित हो जाते हैं। श्री राधा-कृष्ण का प्रेम अहंकाररहित, निर्मल और पूर्ण समर्पण का आदर्श है।
🙏 प्रार्थना 🙏
"हे बरसाने वाली श्री लाड़ली जू सरकार! जिस प्रकार आपने मोरकुटी में प्रेमरस की वर्षा की, उसी प्रकार हमारे हृदय को भी अपने प्रेम, भक्ति और कृपा से सराबोर कर दीजिए।"
🌺 जय श्री राधे! जय लाड़ली जू सरकार! जय मोरकुटी धाम! 🌺


