Ajay Sharma
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आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।
जाके बल से गिरवर काँपे । रोग-दोष जाके निकट न झाँके ।। अंजनि पुत्र महा बलदाई । रोग-दोष संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई ॥
लंका जारि असुर संहारे। सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे। आनि संजिवन प्राण उबारे ॥
पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बायें भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई ॥
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसहिं बैकुंठ परम पद पावै ॥
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#🍓🌿🍓🍓 शुभ मंगलवार जय वीर बजरंग बली जय श्री राम भक्त हनुमान गुड मॉर्निंग फ्रेंड म🍓🍓🌿🍓
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