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॥ विजयते् श्रीबालकृष्ण प्रभु ॥
ब्रह्मांड दर्शन की कथा :
एक बार जब श्री बालकृष्ण गोकुल में खेल रहे थे, तो उनके मित्रों और भाई बलराम ने माता यशोदा से शिकायत की कि श्री बालकृष्ण ने मिट्टी खाई है। माता यशोदा ने तुरंत श्री बालकृष्ण को पकड़ा और उन्हें डांटते हुए अपना मुँह खोलने को कहा।
विस्मयकारी दृश्य :
जैसे ही नन्हे श्री बालकृष्ण ने अपना मुँह खोला, माता यशोदा आश्चर्यचकित रह गईं। उन्हें श्री बालकृष्ण के मुख के भीतर मिट्टी नहीं, बल्कि पूरा ब्रह्मांड दिखाई दिया।
क्या देखा !
उन्होंने मुख में सूर्य, चंद्रमा, तारे, पर्वत, नदियाँ, समुद्र और सभी जीव-जंतु देखे। यहाँ तक कि उन्होंने खुद को और गोकुल को भी उस अनंत दृश्य में देखा।
ईश्वरीय अहसास :
माता यशोदा समझ गईं कि उनका पुत्र कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं नारायण (भगवान विष्णु) हैं।ममता का प्रभावभगवान ने जब देखा कि यशोदा उनकी दिव्यता देखकर भयभीत हो रही हैं, तो उन्होंने अपनी 'योगमाया' से उस स्मृति को उनके मन से हटा दिया। माता यशोदा फिर से उन्हें अपना छोटा पुत्र मानकर लाड-प्यार करने लगीं।
जय हो प्रभु.
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