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davinder - Author on ShareChat
davinder
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#bhojshala #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🗞️पॉलिटिकल अपडेट #🕉️सनातन धर्म🚩 #🚩जय श्रीराम🙏
धार का भोजशाला मंदिर है॰.. ' हाई कोर्टने हिंदू पक्ष की मांग पर लगाई मोहर धार का भोजशाला मंदिर है॰.. ' हाई कोर्टने हिंदू पक्ष की मांग पर लगाई मोहर
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    Manish
    Mp bhojshala - bhojshala me Saraswati lok & bhoj shodh sansthan Cm Mohan yadav ne kiya elan #bhojshala #🌷जय माँ सरस्वती #mp Govt #Jay sanatan🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ॰ मोहन यादव सोमवार को धार पहुंचे। किए। ऐतिहासिक भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन-्पूजन ওক্কীন यहां सरस्वती लोक और भोज शोध संस्थान बनाने की ऐलान भोजशाला आंदोलन में शहीद हुए तीन बलिदानियों किया। उन्होंने [೯ लक्ष्मण सिंह पंचघाटी , बनसिंह अमझेरा , अंतर के परिजनों को ५-५ लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। भोज शोध संस्थान बनाने का ऐलान भी किया। ने कार्यक्रम में कहा कि " साढ़े सात सौ साल के संघर्ष मुख्यमंत्री लिए के बाद भोजशाला को लेकर जो निर्णय आया है, उसके धारवासी बधाई के पात्र हैं।" उन्होंने 'जय जय सियाराम' के उद्घोष के साथ भाषण की शुरुआत की और कहा कि गंगा दशहरा पर उन्हें भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन का सौभाग्य मिला। ISSIETIIIT ~ ಲ 1 Lm मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ॰ मोहन यादव सोमवार को धार पहुंचे। किए। ऐतिहासिक भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन-्पूजन ওক্কীন यहां सरस्वती लोक और भोज शोध संस्थान बनाने की ऐलान भोजशाला आंदोलन में शहीद हुए तीन बलिदानियों किया। उन्होंने [೯ लक्ष्मण सिंह पंचघाटी , बनसिंह अमझेरा , अंतर के परिजनों को ५-५ लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। भोज शोध संस्थान बनाने का ऐलान भी किया। ने कार्यक्रम में कहा कि " साढ़े सात सौ साल के संघर्ष मुख्यमंत्री लिए के बाद भोजशाला को लेकर जो निर्णय आया है, उसके धारवासी बधाई के पात्र हैं।" उन्होंने 'जय जय सियाराम' के उद्घोष के साथ भाषण की शुरुआत की और कहा कि गंगा दशहरा पर उन्हें भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन का सौभाग्य मिला। ISSIETIIIT ~ ಲ 1 Lm
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    Manish
    Mp - history of bhojhshala #bhojshala #Raja Bhoj
    भोजशाला विवाद GAld अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण a कर इस्लामी राज्य की स्थापना की भोजशाला की स्थापना (११वीं सदी ) ११वीं सदी में परमार राजा भोज द्वारा " वाग्देवी ( सरस्वती ) मंदिर/ भोजशाला " की स्थापना का दावा। कमाल मौला मस्जिद की नींच ( १३०५ ईस्वी ) १३०५ ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा भोजशाला का विध्वंस और कमाल मौला मस्जिद बनाए जाने का दावा। १२६९ में अरब मूल के विवाद की शुरुआत (१९३५) कमाल मौलाना योजनाबद्ध में हिंदुओं को मंगलवार को तरीके से धार आकर बसे। धार रियासत (ब्रिटिश काल) पूजा, मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी।  1305ச33சஎ ASI के अधीन भोजशाला (१९५२) खिलजी ने परमारों के अभेद्य भोजशाला परिसर एक संरक्षित स्मारक के रूप में भारतीय माने जाने वाले मालवा पर पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियंत्रण में आ गया। आक्रमण कर इस्लामी राज्य की स्थापना की। ASI ने नई व्यवस्था (२00३) विवाद बढ़ने पर हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार को पूजा और भोजशाला सहित अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक वसंत पंचमी पर विशेष पूजा की मुस्लिम समुदाय अनुमति।  महत्व के स्थलों को ध्वस्त किया। 3নুমনি] को शुक्रवार 1 बजे से 3 बजे तक नमाज की १४०१ में दिलावर खां गौरी ने मालवा पर अपना न्यायिक हस्तक्षेप और सर्वे (२०२४ ) आधिपत्य घोषित कर विजय मंदिर को नष्ट किया। हिंदू पक्ष ने पूरे परिसर को मंदिर घोषित करने और ASI सर्वे " में मेहमूद शाह खिलजी द्वितीय ने आक्रमण की मांग करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की।  মন 1514 कर भोजशाला को मस्जिद में परिवर्तित करने का ने नई व्यवस्था (२००३) ASI प्रयत्न किया। कोर्ट के आदेश पर ASI ने करीब ९८ दिनों तक वैज्ञानिक खिलजी ने ही कमाल मौलाना की याद में सर्वेक्षण किया। सर्वे में पुरातात्विक, स्थापत्य और वैज्ञानिक  तकनीकों का उपयोग किया गया। भोजशाला के बाहर एक मकबरा उसकी मृत्यु के 204 aqf: बनवाया , जबकि कमाल मौलाना की ব্রাৎ कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (१५ मई २०२६) मृत्यु सन १३१० में अहमदाबाद में हुई थी।  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। विवादित भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी ( सरस्वती ) का मंदिर माना। भोजशाला विवाद GAld अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण a कर इस्लामी राज्य की स्थापना की भोजशाला की स्थापना (११वीं सदी ) ११वीं सदी में परमार राजा भोज द्वारा " वाग्देवी ( सरस्वती ) मंदिर/ भोजशाला " की स्थापना का दावा। कमाल मौला मस्जिद की नींच ( १३०५ ईस्वी ) १३०५ ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा भोजशाला का विध्वंस और कमाल मौला मस्जिद बनाए जाने का दावा। १२६९ में अरब मूल के विवाद की शुरुआत (१९३५) कमाल मौलाना योजनाबद्ध में हिंदुओं को मंगलवार को तरीके से धार आकर बसे। धार रियासत (ब्रिटिश काल) पूजा, मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी।  1305ச33சஎ ASI के अधीन भोजशाला (१९५२) खिलजी ने परमारों के अभेद्य भोजशाला परिसर एक संरक्षित स्मारक के रूप में भारतीय माने जाने वाले मालवा पर पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियंत्रण में आ गया। आक्रमण कर इस्लामी राज्य की स्थापना की। ASI ने नई व्यवस्था (२00३) विवाद बढ़ने पर हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार को पूजा और भोजशाला सहित अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक वसंत पंचमी पर विशेष पूजा की मुस्लिम समुदाय अनुमति।  महत्व के स्थलों को ध्वस्त किया। 3নুমনি] को शुक्रवार 1 बजे से 3 बजे तक नमाज की १४०१ में दिलावर खां गौरी ने मालवा पर अपना न्यायिक हस्तक्षेप और सर्वे (२०२४ ) आधिपत्य घोषित कर विजय मंदिर को नष्ट किया। हिंदू पक्ष ने पूरे परिसर को मंदिर घोषित करने और ASI सर्वे " में मेहमूद शाह खिलजी द्वितीय ने आक्रमण की मांग करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की।  মন 1514 कर भोजशाला को मस्जिद में परिवर्तित करने का ने नई व्यवस्था (२००३) ASI प्रयत्न किया। कोर्ट के आदेश पर ASI ने करीब ९८ दिनों तक वैज्ञानिक खिलजी ने ही कमाल मौलाना की याद में सर्वेक्षण किया। सर्वे में पुरातात्विक, स्थापत्य और वैज्ञानिक  तकनीकों का उपयोग किया गया। भोजशाला के बाहर एक मकबरा उसकी मृत्यु के 204 aqf: बनवाया , जबकि कमाल मौलाना की ব্রাৎ कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (१५ मई २०२६) मृत्यु सन १३१० में अहमदाबाद में हुई थी।  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। विवादित भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी ( सरस्वती ) का मंदिर माना।
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    Manish
    Mp bhojshala vivad - Hindu & other Samudaya ke tark #bhojshala #👨‍⚖️ भोजशाला केस में कोर्ट का बड़ा फैसला🗞️
    1995 सुनवाई के दौरान uflo dflo    किस पक्ष ने से शुरू हुई क्या तर्क दिए प्रशासनिक लडाई हिद्न पक्ष होता, भोजशाला पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 7P[76 1995 क्योंकि यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष  भोजशाला में दो पक्षों की बीच मामूली विवाद हुआ।  ने दलील दी कि भोजशाला का नाम प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की सूची में  इसके बाद प्रशासन में मंगलवार को पूजा और | अनुमति दी।  दर्ज है। वर्ष २०२४ में अश्विनी उपाध्याय केस में दिए गए शुक्रवार को नमाज पढ़ने की तर्क भोजशाला मामले में लागू नहीं किए जा सकते। 1997 साथ ही 7 अप्रैल २००३ को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण  दिग्विजय सिंह के मई को तत्कालीन मुख्यमंत्री 1 १२ विभाग (ASI) द्वारा जारी आदेश को निरस्त करने की मांग आदेश पर भोजशाला में आम लोगों की एंट्री पर की गई। कोर्ट से आग्रह किया गया कि भोजशाला का प्रतिबंध लगा दिया गया। मंगलवार की पूजा पर रोक रूप से हिंदू समाज को धार्मिक स्वरूप तय कर इसे पूर्ण " लगा दी गई। सौंपा जाए ताकि मां सरस्वती की पूजा और हवन वर्षभर निर्बाध रूप से हो सके। हिंदुओं को बसंत पंचमी और मुस्लिमों को शुक्रवार के दिन 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढने की मुस्लिम पक्ष अनुमति दी गई। ये प्रतिबंध ३१ जुलाई १९९७ को हटा वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने कोर्ट में कहा कि अभी নিমা যমা] तक यह स्पष्ट नहीं है कि भोजशाला मंदिर है, मस्जिद है या जैनशाला। विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप तय 1998 करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है जबकि हाई कोर्ट ६ फरवरी को केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने आगामी  अनुच्छेद २२६ के तहत रिट अधिकार क्षेत्र में सुनवाई कर आदेश तक आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहा है। दिया। ने एएसआई सर्वे खुर्शीद  वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान 2003 हुए कहा कि उपलब्ध कराई गई ওঠান पर सवाल वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं है और रंगीन तस्वीरें भी पेश नहीं मंगलवार को फिर पूजा की अनुमति दी गई। बगैर की गईं। उन्होंने अयोध्या फैसले का उल्लेख करते हुए फूल-माला के पूजा करने के लिए कहा गया। पर्यटकों  कहा कि वहां रामलला विराजमान की मूर्ति मौजूद थी, के लिए भी भोजशाला को खोला गया। १८ फरवरी को जबकि भोजशाला में कोई स्थापित मूर्ति नहीं है। भोजशाला परिसर में सांप्रदायिक तनाव के बाद हिंसा फैली। जैन समाज 2013 जैन समाज की ओर से कहा गया कि जिसे मां वाग्देवी की वसंत पंचमी और शुक्रवार एक दिन आने पर धार में प्रतिमा बताया जा रहा है, वह जैन समुदाय की आराध्य माहौल बिगड़ गया था। हिंदुओं के जगह छोड़ने से मां अंबिका की प्रतिमा है। सीहोर स्थित मां अंबिका मंदिर মীসুন [ में भी इसी तरह की प्रतिमा  है, जैसी भोजशाला में इनकार करने पर पुलिस को हवाई फायरिंग और मिली थी। जैन समाज ने भोजशाला को जैन तीर्थ घोषित लाठीचार्ज करना पड़ा था। करने की मांग की। 2016 शुक्रवार के दिन वसंत पंचमी पड़ने से यहां तनाव  কা মামীল নন যমা থাI নন ম লকয সন নক भोजशाला में कई बार अघोषित कर्फ्यू लग चुका है। 1995 सुनवाई के दौरान uflo dflo    किस पक्ष ने से शुरू हुई क्या तर्क दिए प्रशासनिक लडाई हिद्न पक्ष होता, भोजशाला पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 7P[76 1995 क्योंकि यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष  भोजशाला में दो पक्षों की बीच मामूली विवाद हुआ।  ने दलील दी कि भोजशाला का नाम प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम की सूची में  इसके बाद प्रशासन में मंगलवार को पूजा और | अनुमति दी।  दर्ज है। वर्ष २०२४ में अश्विनी उपाध्याय केस में दिए गए शुक्रवार को नमाज पढ़ने की तर्क भोजशाला मामले में लागू नहीं किए जा सकते। 1997 साथ ही 7 अप्रैल २००३ को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण  दिग्विजय सिंह के मई को तत्कालीन मुख्यमंत्री 1 १२ विभाग (ASI) द्वारा जारी आदेश को निरस्त करने की मांग आदेश पर भोजशाला में आम लोगों की एंट्री पर की गई। कोर्ट से आग्रह किया गया कि भोजशाला का प्रतिबंध लगा दिया गया। मंगलवार की पूजा पर रोक रूप से हिंदू समाज को धार्मिक स्वरूप तय कर इसे पूर्ण " लगा दी गई। सौंपा जाए ताकि मां सरस्वती की पूजा और हवन वर्षभर निर्बाध रूप से हो सके। हिंदुओं को बसंत पंचमी और मुस्लिमों को शुक्रवार के दिन 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढने की मुस्लिम पक्ष अनुमति दी गई। ये प्रतिबंध ३१ जुलाई १९९७ को हटा वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने कोर्ट में कहा कि अभी নিমা যমা] तक यह स्पष्ट नहीं है कि भोजशाला मंदिर है, मस्जिद है या जैनशाला। विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप तय 1998 करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है जबकि हाई कोर्ट ६ फरवरी को केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने आगामी  अनुच्छेद २२६ के तहत रिट अधिकार क्षेत्र में सुनवाई कर आदेश तक आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहा है। दिया। ने एएसआई सर्वे खुर्शीद  वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान 2003 हुए कहा कि उपलब्ध कराई गई ওঠান पर सवाल वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं है और रंगीन तस्वीरें भी पेश नहीं मंगलवार को फिर पूजा की अनुमति दी गई। बगैर की गईं। उन्होंने अयोध्या फैसले का उल्लेख करते हुए फूल-माला के पूजा करने के लिए कहा गया। पर्यटकों  कहा कि वहां रामलला विराजमान की मूर्ति मौजूद थी, के लिए भी भोजशाला को खोला गया। १८ फरवरी को जबकि भोजशाला में कोई स्थापित मूर्ति नहीं है। भोजशाला परिसर में सांप्रदायिक तनाव के बाद हिंसा फैली। जैन समाज 2013 जैन समाज की ओर से कहा गया कि जिसे मां वाग्देवी की वसंत पंचमी और शुक्रवार एक दिन आने पर धार में प्रतिमा बताया जा रहा है, वह जैन समुदाय की आराध्य माहौल बिगड़ गया था। हिंदुओं के जगह छोड़ने से मां अंबिका की प्रतिमा है। सीहोर स्थित मां अंबिका मंदिर মীসুন [ में भी इसी तरह की प्रतिमा  है, जैसी भोजशाला में इनकार करने पर पुलिस को हवाई फायरिंग और मिली थी। जैन समाज ने भोजशाला को जैन तीर्थ घोषित लाठीचार्ज करना पड़ा था। करने की मांग की। 2016 शुक्रवार के दिन वसंत पंचमी पड़ने से यहां तनाव  কা মামীল নন যমা থাI নন ম লকয সন নক भोजशाला में कई बार अघोषित कर्फ्यू लग चुका है।
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    Manish
    Mp - Janiye raja bhojh ke bare me #bhojshala
    महाराजा भोज ३६ तरह के # आयुधविज्ञान के ज्ञाता थे महाराजा भोज स्वयं ७२ कलाओं और ३६ तरह के आयुध विज्ञान के ज्ञाता थे। 3নক্া কাযকাল মন १०६५ तक रहा, उन्होंने अनेक मंदिरों, घाटों  तालाबों एवं विद्यालयों का निर्माण करवाया। राजा भोज स्वयं विद्वान होने के साथ ही विद्वानों के संरक्षक भी थे। जैन सम्प्रदाय के अभयदेवजी ने सूरी पद प्राप्त किया। काशी के महान पंडित भाव बृहस्पति ने शैव संप्रदाय के सिद्धांतों का अध्ययन एवं प्रतिपादन किया। स्थापना से लगातार २७१ वर्ष तक भोजशाला केंद्र बनी रही। ज्ञान का महाराजा भोज ३६ तरह के # आयुधविज्ञान के ज्ञाता थे महाराजा भोज स्वयं ७२ कलाओं और ३६ तरह के आयुध विज्ञान के ज्ञाता थे। 3নক্া কাযকাল মন १०६५ तक रहा, उन्होंने अनेक मंदिरों, घाटों  तालाबों एवं विद्यालयों का निर्माण करवाया। राजा भोज स्वयं विद्वान होने के साथ ही विद्वानों के संरक्षक भी थे। जैन सम्प्रदाय के अभयदेवजी ने सूरी पद प्राप्त किया। काशी के महान पंडित भाव बृहस्पति ने शैव संप्रदाय के सिद्धांतों का अध्ययन एवं प्रतिपादन किया। स्थापना से लगातार २७१ वर्ष तक भोजशाला केंद्र बनी रही। ज्ञान का
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    Manish
    Mp - bhojshala vivad pr high court ka fesla #bhojshala #👨‍⚖️ भोजशाला केस में कोर्ट का बड़ा फैसला🗞️
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों , एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। न्यूज वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा- ऐतिहासिक और संरक्षित जगह देवी सरस्वती का मंदिर है। केंद्र  सरकार और ASI यह फैसला लेें कि भोजशाला मंदिर का मैनेजमेंट कैसा रहेगा| भी रद्द कर दिया, अदालत ने ASI का २००३ का वह आदेश जिसमें ASI ने भोजशाला में हिंदुओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया था। उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था। भोजशाला को कमाल मौला मस्जिद बताते रहे मुस्लिम पक्ष को लिए कोर्ट ने सरकार से मस्जिद के अलग जमीन मांगने को कहा है। हाईकोर्ट के फैसले के पॉइंट्स हाईकोर्ट ने कहा कि भोजशाला में सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के साक्ष्य पाए गए हैं। कोर्ट ने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों , एएसआई सर्वे के साथ अयोध्या केस को भी आधार माना। कोर्ट ने कहा- हर सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले प्राचीन स्मारकों और मंदिरों की सुरक्षा निश्चित करे। साथ ही गर्भगृह और धार्मिक आस्था से जुड़ी देव प्रतिमाओं का भी संरक्षण करे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों , एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। न्यूज वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा- ऐतिहासिक और संरक्षित जगह देवी सरस्वती का मंदिर है। केंद्र  सरकार और ASI यह फैसला लेें कि भोजशाला मंदिर का मैनेजमेंट कैसा रहेगा| भी रद्द कर दिया, अदालत ने ASI का २००३ का वह आदेश जिसमें ASI ने भोजशाला में हिंदुओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया था। उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था। भोजशाला को कमाल मौला मस्जिद बताते रहे मुस्लिम पक्ष को लिए कोर्ट ने सरकार से मस्जिद के अलग जमीन मांगने को कहा है। हाईकोर्ट के फैसले के पॉइंट्स हाईकोर्ट ने कहा कि भोजशाला में सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के साक्ष्य पाए गए हैं। कोर्ट ने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों , एएसआई सर्वे के साथ अयोध्या केस को भी आधार माना। कोर्ट ने कहा- हर सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले प्राचीन स्मारकों और मंदिरों की सुरक्षा निश्चित करे। साथ ही गर्भगृह और धार्मिक आस्था से जुड़ी देव प्रतिमाओं का भी संरक्षण करे।
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    Manish
    Mp - bhojshala mep #bhojshala
    भोजशाला का एरियल व्यू दैनिळ  ঝাময वाग्दैवीकागर्भगृह 2016 यहीहुईनमाज Erತs दरगाह मस्जिद प्रवेशद्वार कैंपस की पहचान को लेकर विवाद ने ज्ञान- भोजशाला ११वीं - कैंपस अभी राजा भोज १२वीं सदी का पुरातत्व विभाग के कला के अध्ययन संरक्षण में है ऐतिहासिक स्थल के लिए बनाया धार्मिक दावे हिंदू पक्षः देवी सरस्वती का मुस्लिम पक्षः कमाल मंदिर और शिक्षा केंद्र সীলা মসিন भोजशाला का एरियल व्यू दैनिळ  ঝাময वाग्दैवीकागर्भगृह 2016 यहीहुईनमाज Erತs दरगाह मस्जिद प्रवेशद्वार कैंपस की पहचान को लेकर विवाद ने ज्ञान- भोजशाला ११वीं - कैंपस अभी राजा भोज १२वीं सदी का पुरातत्व विभाग के कला के अध्ययन संरक्षण में है ऐतिहासिक स्थल के लिए बनाया धार्मिक दावे हिंदू पक्षः देवी सरस्वती का मुस्लिम पक्षः कमाल मंदिर और शिक्षा केंद्र সীলা মসিন
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