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#राम #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #🙏 जय हनुमान #🙏हनुमान चालीसा🏵 #श्री रामचरितमानस पाठ 🕉️
राम - ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बंधु सखा सँग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।। पावन मृग मारहिं जिय जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी। | २०४/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -श्री रामचन्द्र जी भाइयों और इष्ट मित्रों को बुलाकर साथ लेते हैं और नित्य वन में जाकर शि- कार खेलते हैं। हृदय में वे पवित्र कार्यो के लिए को मारते हैं और प्रतिदिन दुष्ट, राक्षसी) पशुओं लाकर राजा को दिखलाते हैं। विशेष - श्रीराम जी स्वयंभू प्रभु का अवतार निर्दोष जीवों का शिकार नहीं करते थे।इसकी पुष्टि अरण्य काण्ड चौपाई १८/५ से होती है। जिसमें वे खर दूषण के राक्षस दूतों से कहते हैं क्षत्रिय हैं और वन में शिकार करने ক্রি কম के लिए तुम्हारे जैसे दुष्ट पशुओं को ही तो खोजते फिरते हैं हम बलवान शत्रु से नहीं डरते,काल से भी लड़ सकते हैं। करहीं ।तुम्ह स खल मृग खोजत फिरहीं । | हम छत्री मृगया बन रिपु बलवंत देखि नहिं डरहीं।एक बार कालहु सन लरहीं। | ऊँ श्री हनुमते रामदूताय नमः बंधु सखा सँग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।। पावन मृग मारहिं जिय जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी। | २०४/1 , बालकाण्ड श्रीरामचरितमानस भावार्थ -श्री रामचन्द्र जी भाइयों और इष्ट मित्रों को बुलाकर साथ लेते हैं और नित्य वन में जाकर शि- कार खेलते हैं। हृदय में वे पवित्र कार्यो के लिए को मारते हैं और प्रतिदिन दुष्ट, राक्षसी) पशुओं लाकर राजा को दिखलाते हैं। विशेष - श्रीराम जी स्वयंभू प्रभु का अवतार निर्दोष जीवों का शिकार नहीं करते थे।इसकी पुष्टि अरण्य काण्ड चौपाई १८/५ से होती है। जिसमें वे खर दूषण के राक्षस दूतों से कहते हैं क्षत्रिय हैं और वन में शिकार करने ক্রি কম के लिए तुम्हारे जैसे दुष्ट पशुओं को ही तो खोजते फिरते हैं हम बलवान शत्रु से नहीं डरते,काल से भी लड़ सकते हैं। करहीं ।तुम्ह स खल मृग खोजत फिरहीं । | हम छत्री मृगया बन रिपु बलवंत देखि नहिं डरहीं।एक बार कालहु सन लरहीं। | - ShareChat