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#points to ponder #सोचने वाली बात #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #Islam and We #*let us understand our religion
points to ponder - **इस्लाम सिखाता है कि शर्म (हया) पूरी तरह भलाई है। लेकिन अल्लाह से शर्म करना वास्तव में क्या है? यह हदीस बताती है कि कब किसी व्यक्ति के बारे में कहा जा सकता है कि वह वास्तव में अल्लाह से शर्म करता हैI* 02/07/2026 *हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद ( रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत हैः* *रसूलुल्लाह le ने फ़रमाया:* *" अल्लाह से वैसी ही शर्म करो , जैसी उससे शर्म करने का हक़ हैI* *सहाबा ए-किराम ( रज़ियल्लाहु अन्हुम) ने अर्ज़ कियाः* *"ऐ अल्लाह के रसूल! अल्हम्दुलिल्लाह, हम अल्लाह से शर्म करते हैं।"* *সা4 ৪৬; ন দ্ধংসাযা:* *"मेरा मतलब केवल इतना नहीं है। बल्कि अल्लाह से वैसी शर्म करना , जैसी उससे शर्म करने का हक़ है, मौजूद यह है कि तुम अपने सिर और उसमें (आँख, कान, ज़बान और विचार आदि) की हिफ़ाज़त करो, अपने पेट और उसमें जाने वाली चीज़ों की हिफ़ाज़त करो , मौत और मिट्टी में मिल जाने को याद रखो। और दुनिया की जो व्यक्ति आख़िरत का इच्छुक हो, वह को छोड़ दे। जिसने ऐसा मोह सजावट और उसके किया, उसने वास्तव में अल्लाह से वैसी शर्म की, जैसी उससे शर्म करने का हक़ है।"* संदर्भः जामिअ अत-तिर्मिज़ी , हदीसः २४५८ (कुछ संस्करणों में हदीस संख्या अलग हो सकती है।) 10:24 01 **इस्लाम सिखाता है कि शर्म (हया) पूरी तरह भलाई है। लेकिन अल्लाह से शर्म करना वास्तव में क्या है? यह हदीस बताती है कि कब किसी व्यक्ति के बारे में कहा जा सकता है कि वह वास्तव में अल्लाह से शर्म करता हैI* 02/07/2026 *हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद ( रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत हैः* *रसूलुल्लाह le ने फ़रमाया:* *" अल्लाह से वैसी ही शर्म करो , जैसी उससे शर्म करने का हक़ हैI* *सहाबा ए-किराम ( रज़ियल्लाहु अन्हुम) ने अर्ज़ कियाः* *"ऐ अल्लाह के रसूल! अल्हम्दुलिल्लाह, हम अल्लाह से शर्म करते हैं।"* *সা4 ৪৬; ন দ্ধংসাযা:* *"मेरा मतलब केवल इतना नहीं है। बल्कि अल्लाह से वैसी शर्म करना , जैसी उससे शर्म करने का हक़ है, मौजूद यह है कि तुम अपने सिर और उसमें (आँख, कान, ज़बान और विचार आदि) की हिफ़ाज़त करो, अपने पेट और उसमें जाने वाली चीज़ों की हिफ़ाज़त करो , मौत और मिट्टी में मिल जाने को याद रखो। और दुनिया की जो व्यक्ति आख़िरत का इच्छुक हो, वह को छोड़ दे। जिसने ऐसा मोह सजावट और उसके किया, उसने वास्तव में अल्लाह से वैसी शर्म की, जैसी उससे शर्म करने का हक़ है।"* संदर्भः जामिअ अत-तिर्मिज़ी , हदीसः २४५८ (कुछ संस्करणों में हदीस संख्या अलग हो सकती है।) 10:24 01 - ShareChat