sn vyas
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#🪔देवशयनी एकादशी 🙏🌺 *देवशयनी एकादशी ( आषाढ़ शुक्ल एकादशी )::* `देवशयनी एकादशी , जिसे – ☆हरिशयनी एकादशी , ☆पद्मा एकादशी अथवा ☆आषाढ़ी एकादशी भी कहा जाता है , यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक है । इसी दिन से भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं । इस दिन से प्रारम्भ होने वाले चार महीनों को ☆चातुर्मास कहा जाता है , जो कार्तिक शुक्ल एकादशी ( ☆देवोत्थान एकादशी ) तक चलता है ।` `यह व्रत मुख्यतः ☆पद्म पुराण , ☆भविष्योत्तर पुराण , ☆स्कन्द पुराण , ☆ब्रह्मवैवर्त पुराण तथा ☆हरिभक्ति-विलास आदि ग्रंथों में अत्यंत महिमामय बताया गया है ।` *शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् ।* *विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ॥* `भगवान अनंत शेष पर योगनिद्रा में स्थित होकर सम्पूर्ण सृष्टि का पालन करते हैं ।` *भगवान विष्णु क्यों सोते हैं❔* `यह प्रश्न अत्यधिक महत्वपूर्ण है ।` `भगवान कभी अज्ञानवश नहीं सोते ।` `उनकी निद्रा को योगनिद्रा कहा जाता है ।` `योगनिद्रा का अर्थ है— सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सूक्ष्म संचालन करते हुए विश्राम करना ।` `यह संसार के लिए प्रतीकात्मक संकेत है कि अब मनुष्य भी बाह्य भोगों को कम कर आत्मचिन्तन करें ।` `अर्थात— भगवान सोते नहीं , अपितु समस्त ब्रह्माण्ड का संचालन करते हुए योगमाया में स्थित रहते हैं ।` *देवशयनी एकादशी की पौराणिक कथा —* `राजा मान्धाता की कथा ~` `भविष्योत्तर पुराण में यह प्रसिद्ध कथा आती है । सत्ययुग में राजा मान्धाता अत्यंत धर्मात्मा थे । उनके राज्य में वर्षों तक वर्षा नहीं हुई । अकाल पड़ा । पशु मरने लगे । लोग भूखे रहने लगे । राजा ऋषियों के पास गए । तब महर्षि अंगिरा ने कहा—` `"राजन् ! आषाढ़ शुक्ल एकादशी का व्रत करो ।` `समस्त प्रजा भी भगवान विष्णु का उपवास करे ।` `भगवान अवश्य प्रसन्न होंगे ।"` `तदोपरांत राजा ने समस्त राज्य सहित व्रत किया । एकादशी के प्रभाव से— वर्षा हुई । अन्न उत्पन्न हुआ । प्रजा सुखी हो गई । राज्य पुनः समृद्ध बन गया । इसलिए इसे लोककल्याणकारी एकादशी कहा गया ।` *दूसरी कथा —* `( भगवान की योगनिद्रा )` `जब देवताओं ने भगवान से प्रार्थना की— "हे प्रभु ! संसार निरन्तर कर्मों में उलझा रहता है ।" तब भगवान ने कहा— "मैं चार महीने योगनिद्रा में रहूँगा ।इन चार महीनों में जो मनुष्य— ☆जप करेगा , ☆दान करेगा , ☆व्रत करेगा एवं ☆भक्ति करेगा उसे अनेक जन्मों का पुण्य प्राप्त होगा ।"` `इसी कारण चातुर्मास आरम्भ हुआ ।` *चातुर्मास क्या है❔* `देवशयनी एकादशी से — ☆आषाढ़ , ☆श्रावण , ☆भाद्रपद , तथा ☆आश्विन इन चार महीनों तक भगवान योगनिद्रा में रहते हैं औऱ देवोत्थान एकादशी को पुनः जागते हैं ।` *चातुर्मास का आध्यात्मिक रहस्य —* `इन चार महीनों में—विवाह नहीं होते । नए मांगलिक कार्य सीमित रखे जाते हैं । संत-महात्मा एक स्थान पर रहकर प्रवचन करते हैं ।अधिक जप , तप एवं स्वाध्याय का विधान है ।` `पद्म पुराण में कहा गया है—` *एकादश्यां निराहारो यो भुङ्क्ते द्वादशी दिने ।* *विष्णुलोकमवाप्नोति सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥* `— जो श्रद्धापूर्वक एकादशी का व्रत कर द्वादशी को पारण करता है , वह पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक का अधिकारी बनता है ।` `बृहन्नारदीय पुराण —` *हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलम् ।* *कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यता ॥* `— कलियुग में भगवान के नाम का जप ही सर्वोत्तम साधन है ।` *इस दिन क्या दान करें❔* `अन्न` `जल` `छाता` `वस्त्र` `घी` `फल` `दक्षिणा` `तुलसी` `शक्कर` `गौसेवा` `विशेष फलदायी माने गए हैं ।` *भगवान का "शयन" यह नहीं बताता कि वे संसार से उदासीन हो गए हैं । इसका गूढ़ अर्थ है कि साधक भी कुछ समय बाहरी दौड़-भाग से हटकर अपने भीतर झाँके , इन्द्रियों का संयम करे , भक्ति , जप , स्वाध्याय औऱ सेवा में मन लगाए । यही चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य है ।* *देवशयनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं , अपितु आत्मशुद्धि एवं भगवान श्रीहरि के प्रति समर्पण का पर्व है । इस दिन से आरम्भ होने वाली चातुर्मास साधना , संयम तथा भक्ति का विशेष काल माना गया है । जो श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करता है , हरिनाम का स्मरण करता है औऱ भगवान विष्णु की शरण ग्रहण करता है , उसके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति व धर्म के प्रति दृढ़ता का विकास होता है । सनातन परंपरा में यह एकादशी भक्ति , तप , दान व आत्मचिंतन के चार पवित्र महीनों का मंगलमय द्वार मानी गई है ।* `ये एकादशी एवं चातुर्मास आप समस्त हेतु शुभ तथा मङ्गलमय हो🙏🏻💐` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄` `© सर्वाधिकार सुरक्षित – सर्वज्ञशङ्कर🚩 चैनल`
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