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#व्रत एवं त्योहार
हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3& तीज्त्यहार ०७, श्रावण 05 कृष्ण पक्ष, सप्तमी अगस्त २०२६ २०८३ सिद्धार्थी, विक्रम सम्वत बुधवार वाराणसी, भारत ११वाँ दिन, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, भद्रा, गण्ड मूल, रवि योग, आडल योग चातुर्मास प्रथम d चातुर्मास का ११वाँ दिन সথস पत्तेदार सब्जी निषेध व्रत हरी কালামমী मासिक कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3& तीज्त्यहार ०७, श्रावण 05 कृष्ण पक्ष, सप्तमी अगस्त २०२६ २०८३ सिद्धार्थी, विक्रम सम्वत बुधवार वाराणसी, भारत ११वाँ दिन, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, भद्रा, गण्ड मूल, रवि योग, आडल योग चातुर्मास प्रथम d चातुर्मास का ११वाँ दिन সথস पत्तेदार सब्जी निषेध व्रत हरी কালামমী मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
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  • roshni - Author on ShareChat
    🌹🌷🍀roshni 🍀🌷🌹
    #आने वाले व्रत और त्योहार #vat shavitri status
    आने वाले व्रत और त्योहार, vat shavitri status
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    #व्रत एवं त्योहार
    हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3& तीज्त्यहार ०९, श्रावण 07 कृष्ण पक्ष, नवमी 3[7 2026 २०८३ सिद्धार्थी, विक्रम सम्वत शुक्रवार वाराणसी, भारत चातुर्मास का १३वाँ दिन, मासिक कार्तिगाई भद्रा, आडल विडाल योग योग प्रथम चातुर्मास का १३वाँ दिन সথস हरी पत्तेदार सब्जी निषेध व्रत मासिक कार्तिगाई हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3& तीज्त्यहार ०९, श्रावण 07 कृष्ण पक्ष, नवमी 3[7 2026 २०८३ सिद्धार्थी, विक्रम सम्वत शुक्रवार वाराणसी, भारत चातुर्मास का १३वाँ दिन, मासिक कार्तिगाई भद्रा, आडल विडाल योग योग प्रथम चातुर्मास का १३वाँ दिन সথস हरी पत्तेदार सब्जी निषेध व्रत मासिक कार्तिगाई
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    #व्रत एवं त्योहार
    हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3& तीज्त्यहार १०, श्रावण 08 कृष्ण पक्ष, दशमी अगस्त २०२६ २०८३ सिद्धार्थी, विक्रम सम्वत शनिवार वाराणसी भारत ४वाँ दिन, रोहिणी व्रत, भद्रा, सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग, मधुसर्पिष योग, विडाल योग चातुर्मास  प्रथम का चातुर्मास का १४वाँ दिन সথম पत्तेदार सब्जी निषेध व्रत हरी रोहिणी व्रत हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3& तीज्त्यहार १०, श्रावण 08 कृष्ण पक्ष, दशमी अगस्त २०२६ २०८३ सिद्धार्थी, विक्रम सम्वत शनिवार वाराणसी भारत ४वाँ दिन, रोहिणी व्रत, भद्रा, सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग, मधुसर्पिष योग, विडाल योग चातुर्मास  प्रथम का चातुर्मास का १४वाँ दिन সথম पत्तेदार सब्जी निषेध व्रत हरी रोहिणी व्रत
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    #व्रत एवं त्योहार
    हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3& तीज्त्यहार ०८, श्रावण 06 कृष्ण पक्ष, अष्टमी 32026 २०८३ सिद्धार्थी, विक्रम सम्वत बृहस्पतिवार वाराणसी, भारत चातुर्मास का १२वाँ दिन, आडल योग प्रथम चातुर्मास का १२वाँ दिन प्रथम हरी पत्तेदार सब्जी निषेध व्रत हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3& तीज्त्यहार ०८, श्रावण 06 कृष्ण पक्ष, अष्टमी 32026 २०८३ सिद्धार्थी, विक्रम सम्वत बृहस्पतिवार वाराणसी, भारत चातुर्मास का १२वाँ दिन, आडल योग प्रथम चातुर्मास का १२वाँ दिन प्रथम हरी पत्तेदार सब्जी निषेध व्रत
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    प्रथम मंगला गौरी व्रत #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    04-08-26 प्रथम मंगला गौरी व्रत मंगलवार में पड़ने वाले हर मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत रखा ಖqu TIRT है, माँ पार्वती के मंगला गौरी स्वरुप के इस व्रत से विवाह और वैवाहिक जाता जीवन की हर समस्या दूर की जा सकती है।  विशेषकर 7 यदि मंगल दोष हो तो इस दिन की पूजा अत्यधिक लाभदायी होती है। समस्या दे रहा प्रथम मंगला गौरी व्रतः 4 अगस्त २०२६, मंगलवार श्रावण मास का पहला मंगलवार में सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए और श्रावण मास मंगलवार माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। प्रथम मंगला गौरी व्रत देवी भक्ति, श्रद्धा, धैर्य और मंगल संकल्प का पावन अवसर है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद माता मंगला गौरी, भगवान शिव और गणेश जी का स्मरण करें। दीप, पुष्प, अक्षत, फल, नैवेद्य और श्रद्धानुसार सुहाग सामग्री अर्पित करें। ऊँ गौर्यै नमः मंत्र का जाप करें और मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। मंगला गौरी व्रत में १६-१६ वस्तुओं का काफी महत्व होता है, मां சிஸ के बाद उनको सभी वस्तुएं जो सोलह की संख्या में होनी चाहिए अर्पित की जाती हैं। 04-08-26 प्रथम मंगला गौरी व्रत मंगलवार में पड़ने वाले हर मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत रखा ಖqu TIRT है, माँ पार्वती के मंगला गौरी स्वरुप के इस व्रत से विवाह और वैवाहिक जाता जीवन की हर समस्या दूर की जा सकती है।  विशेषकर 7 यदि मंगल दोष हो तो इस दिन की पूजा अत्यधिक लाभदायी होती है। समस्या दे रहा प्रथम मंगला गौरी व्रतः 4 अगस्त २०२६, मंगलवार श्रावण मास का पहला मंगलवार में सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए और श्रावण मास मंगलवार माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। प्रथम मंगला गौरी व्रत देवी भक्ति, श्रद्धा, धैर्य और मंगल संकल्प का पावन अवसर है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद माता मंगला गौरी, भगवान शिव और गणेश जी का स्मरण करें। दीप, पुष्प, अक्षत, फल, नैवेद्य और श्रद्धानुसार सुहाग सामग्री अर्पित करें। ऊँ गौर्यै नमः मंत्र का जाप करें और मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। मंगला गौरी व्रत में १६-१६ वस्तुओं का काफी महत्व होता है, मां சிஸ के बाद उनको सभी वस्तुएं जो सोलह की संख्या में होनी चाहिए अर्पित की जाती हैं।
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    #व्रत एवं त्योहार
    राष्ट्रीय शाके- १९४८ इस्लामी हिजरी- १४४८ राष्ट्रीय श्रावण १० से सफ़र १७ से रबीउल 3T राष्ट्रीय भाद्रपद ०९ तक अव्वल १७ तक विक्रम संवत- २०८३ बंगला संवत- १४३३ 2026 बंग श्रावण १५ से बंग श्रावण बदी ०३ से भाद्रपद बदी ०३ तक भाद्रपद १४ तक 05 शाके १४ गते २० தன 4&, =4#, 312# हि. २१ , बुध, शुर्तैनन्नत्ह बंगला- १९ Rగ द्वारका प्रसाद मिश्रा, शिवमंगल सुमन, ச बुध वीरेन डंगवाल, दत्तो वामन पोतदार, बी॰ जी. रेड्डी, मोहन, मेहता, आचार्य प्यारे नील आर्मस्ट्रांग, S<?T अंशू ] उत्तरा बाओकर, अरविंद जोशी, মলিব্ধ मृत्यु - गोपीनाथ बोरदोलोई, लाला अमरनाथ, प्राण कुमार शर्मा, सत्यपाल मलिक राष्ट्रीय शाके- १९४८ इस्लामी हिजरी- १४४८ राष्ट्रीय श्रावण १० से सफ़र १७ से रबीउल 3T राष्ट्रीय भाद्रपद ०९ तक अव्वल १७ तक विक्रम संवत- २०८३ बंगला संवत- १४३३ 2026 बंग श्रावण १५ से बंग श्रावण बदी ०३ से भाद्रपद बदी ०३ तक भाद्रपद १४ तक 05 शाके १४ गते २० தன 4&, =4#, 312# हि. २१ , बुध, शुर्तैनन्नत्ह बंगला- १९ Rగ द्वारका प्रसाद मिश्रा, शिवमंगल सुमन, ச बुध वीरेन डंगवाल, दत्तो वामन पोतदार, बी॰ जी. रेड्डी, मोहन, मेहता, आचार्य प्यारे नील आर्मस्ट्रांग, S<?T अंशू ] उत्तरा बाओकर, अरविंद जोशी, মলিব্ধ मृत्यु - गोपीनाथ बोरदोलोई, लाला अमरनाथ, प्राण कुमार शर्मा, सत्यपाल मलिक
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    #व्रत एवं त्योहार
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    #व्रत एवं त्योहार
    राष्ट्रीय शाके- १९४८ इस्लामी हिजरी- १४४८ राष्ट्रीय श्रावण १० से सफ़र १७ से रबीउल 3T राष्ट्रीय भाद्रपद ०९ तक अव्वल १७ तक विक्रम संवत- २०८३ बंगला संवत- १४३३ 2026 बंग श्रावण १५ से बंग श्रावण बदी ०३ से भाद्रपद बदी ०३ तक भाद्रपद १४ तक 04 शाके १३ गते १९ कृष्ण पक्ष, षष्ठी, रेवती हि. २०, मंगल, मुअख़्ख़र बंगला- १८ पहला मंगलागौरी व्रत मंगल जन्म - किशोर कुमार, फिरोज़शाह मेहता, इन्दु प्रकाश पाण्डेय, राणा उदयसिंह, सदाशिवराव भाऊ, 6 परमार, एन. रंगास्वामी यशवंत मृत्यु - इब्राहिम अल्काज़ी, नंदिनी सत्पथी, काशी থিন্তু ] प्रसाद जायसवाल, परशुराम मिश्रा, सोरेन राष्ट्रीय शाके- १९४८ इस्लामी हिजरी- १४४८ राष्ट्रीय श्रावण १० से सफ़र १७ से रबीउल 3T राष्ट्रीय भाद्रपद ०९ तक अव्वल १७ तक विक्रम संवत- २०८३ बंगला संवत- १४३३ 2026 बंग श्रावण १५ से बंग श्रावण बदी ०३ से भाद्रपद बदी ०३ तक भाद्रपद १४ तक 04 शाके १३ गते १९ कृष्ण पक्ष, षष्ठी, रेवती हि. २०, मंगल, मुअख़्ख़र बंगला- १८ पहला मंगलागौरी व्रत मंगल जन्म - किशोर कुमार, फिरोज़शाह मेहता, इन्दु प्रकाश पाण्डेय, राणा उदयसिंह, सदाशिवराव भाऊ, 6 परमार, एन. रंगास्वामी यशवंत मृत्यु - इब्राहिम अल्काज़ी, नंदिनी सत्पथी, काशी থিন্তু ] प्रसाद जायसवाल, परशुराम मिश्रा, सोरेन
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    #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
    02-08-26 गजानन संकष्टी  चतुर्थी रविवार संकष्टी चतुर्थी का व्रत सावन कृष्ण तिथि को चतुर्थी  गजानन रखा जाता है, इसलिए इसे सावन संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। सूर्योदय से प्रारम्भ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है। इस दिन भगवान गणेश को दुर्वा चढ़ाई जाती है, दुर्वा में अमृत का वास माना गया है। गजानन संकष्टी चतुर्थीः 2 अगस्त २०२६, रविवार चंद्रोदयः लगभग रात 09:37-09:३८ बजे की चतुर्थी को गजानन संकष्टी  मनाई जाती है। यह पावन व्रत चतुर्थी : श्रावण कृष्ण पक्ष भगवान श्री गणेश की आराधना, संयम और शुभ संकल्प से जुड़ा है। भगवान गणेश को मंगलकर्ता और विघ्नहर्ता कहा गया है, किसी भी मंगल कार्य को करने से पहले भगवान गणेश का नाम लिया जाता है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। भगवान गणेश को दूर्वा, पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और मोदक या लड्डू अर्पित करें। ऊँ गं गणपतये नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और संकष्टी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। चतुर्थी में चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करने की परंपरा है। संकष्टी 02-08-26 गजानन संकष्टी  चतुर्थी रविवार संकष्टी चतुर्थी का व्रत सावन कृष्ण तिथि को चतुर्थी  गजानन रखा जाता है, इसलिए इसे सावन संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। सूर्योदय से प्रारम्भ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है। इस दिन भगवान गणेश को दुर्वा चढ़ाई जाती है, दुर्वा में अमृत का वास माना गया है। गजानन संकष्टी चतुर्थीः 2 अगस्त २०२६, रविवार चंद्रोदयः लगभग रात 09:37-09:३८ बजे की चतुर्थी को गजानन संकष्टी  मनाई जाती है। यह पावन व्रत चतुर्थी : श्रावण कृष्ण पक्ष भगवान श्री गणेश की आराधना, संयम और शुभ संकल्प से जुड़ा है। भगवान गणेश को मंगलकर्ता और विघ्नहर्ता कहा गया है, किसी भी मंगल कार्य को करने से पहले भगवान गणेश का नाम लिया जाता है। इस दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। भगवान गणेश को दूर्वा, पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और मोदक या लड्डू अर्पित करें। ऊँ गं गणपतये नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और संकष्टी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। चतुर्थी में चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करने की परंपरा है। संकष्टी
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