sn vyas
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#शिव पार्वती #🙏शिव पार्वती भगवान शिव और माता पार्वती की संतान "गर्भ से" न होने के पीछे पुराणों में एक नहीं, तीन जुड़ी हुई कथाएँ मिलती हैं — और तीनों का संबंध श्राप और देवताओं के भय से है। 1. सबसे पहला कारण: रति का श्राप ..... सती के बाद शिव गहरी तपस्या में चले गए। सृष्टि रुकने लगी तो देवताओं ने कामदेव को भेजा कि शिव का ध्यान तोड़ें। शिव ने तीसरा नेत्र खोला और कामदेव भस्म हो गए। कामदेव की पत्नी रति का हृदय टूट गया। दुःख में उसने श्राप दिया "जिस देवी को शिव की अर्धांगिनी बनना है, वह भी मेरी तरह संतान- सुख से वंचित रहेगी, वह कभी गर्भ धारण नहीं कर पाएगी।" इसी कारण कहा जाता है कि पार्वती, जो स्वयं शक्ति और उर्वरता की देवी हैं, फिर भी लंबे समय तक स्वाभाविक रूप से माँ नहीं बन पाईं "शक्ति का स्रोत होते हुए भी वह प्राकृतिक रूप से जन्म नहीं दे सकीं।" 2. दूसरा कारण: देवताओं का डर और उनकी प्रार्थना... शिव-शक्ति का मिलन सामान्य नहीं था। शिव पुराण कहता है, देवताओं को डर था कि यदि शिव और पार्वती का तेज एक साथ गर्भ में आए तो उससे जन्मा बालक इतना शक्तिशाली होगा कि इंद्र का सिंहासन भी हिल जाएगा। इसलिए उन्होंने शिव से प्रार्थना की — "आप पार्वती को कभी गर्भवती न करें।"शिव ने यह बात मान ली। जब तारकासुर वध के लिए पुत्र चाहिए था, तब शिव का वीर्य पार्वती के गर्भ में नहीं, बल्कि अग्नि में गया, अग्नि ने उसे गंगा को दिया, और गंगा से कार्तिकेय का जन्म हुआ। इसलिए कार्तिकेय को "अयोनिज" कहा जाता है। 3. तीसरा कारण: पार्वती का पलट-श्राप ..... जब पार्वती ने देखा कि उनका पुत्र उनके बिना ही जन्म ले रहा है, और देवताओं के कारण उनका मिलन बार-बार बाधित हो रहा है, तो वह अत्यंत क्रोधित हुईं। कथा कहती है पार्वती ने देवताओं को श्राप दिया कि — "तुमने मेरे रज को व्यर्थ किया, इसलिए तुम्हारी पत्नियाँ भी संतानहीन रहेंगी।" और — "पार्वती ने स्वर्गवासियों को श्राप दिया कि उनकी पत्नियाँ बाँझ रहेंगी।" यही कारण है कि पुराणों में अधिकांश देवताओं की अपनी जैविक संतानें नहीं दिखतीं। तो फिर गणेश, कार्तिकेय, अशोकसुंदरी कैसे हुए? कार्तिकेय: शिव के तेज से, अग्नि और गंगा के माध्यम से, कृत्तिकाओं द्वारा पाले गए — पार्वती के गर्भ से नहीं। गणेश: रति के श्राप को तोड़ने के लिए पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से बालक बनाया और उसमें प्राण फूँके — "माँ बनने के लिए गर्भ की नहीं, प्रेम की ज़रूरत होती है।" अशोकसुंदरी: पद्म पुराण के अनुसार कल्पवृक्ष की इच्छा से उत्पन्न। इसलिए शास्त्र कहते हैं — शिव-पार्वती की संतानें "जैविक" नहीं, "संकल्पज" हैं। यह श्राप नहीं, लीला थी, ताकि दुनिया समझे कि ईश्वर का परिवार रक्त से नहीं, भक्ति और इच्छा शक्ति से बनता है।
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