sn vyas
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🌞🕉️🌞 *⚖️कर्मफल का एक बेहतरीन उदाहरण...* ⚖️⚖️⚖️⚖️⚖️ *मौन रहो☺️कम और सिर्फ जरूरत हो तभी बोलो😄.* ⚖️ *🤷🏻‍♀️स्त्री हो या पुरुष🙋🏻‍♂️, बोलते समय शब्द सोच-समझ कर इस्तेमाल करने चाहिए. वरना कितना बड़ा अनर्थ हो सकता है, ये महाभारत के इस उदाहरण से समझ आएगा.* *⚔️महाभारत🏹 का युद्ध अठारह दिन चला. इसका द्रौपदी को बहुत कष्ट हुआ. शरीर और मन दोनों से वो बहुत कमजोर हो गई थी, बूढ़ी लगने लगी थी. हस्तिनापुर में चारों तरफ 👰🏻‍♀️विधवाएं दिख रही थीं. अनाथ बच्चे इधर-उधर भटक रहे थे.* *कोई एक-दो पुरुष ही दिखाई दे रहे थे और महारानी द्रौपदी हस्तिनापुर के महल में अकेली लेटी थी.* *तभी श्रीकृष्ण उसके कक्ष में आए. उन्हें देखकर उससे रहा नहीं गया. उसने पूछा, 👰🏻‍♀️"कृष्ण, मैंने ऐसा कभी सोचा भी नहीं था. ऐसा कैसे हो गया?"* *✋🏻🤴🏻कृष्ण बोले, "पांचाली, नियति बहुत क्रूर होती है. वो अपने मन के अनुसार चलती है. द्रौपदी, तुम्हें कौरवों से बदला लेना था ना? तुम सफल हो गईं. सिर्फ दुर्योधन और दुःशासन ही नहीं, सारे कौरव खत्म हो गए." द्रौपदी तुम्हें तो खुश होना चाहिए था ना?* *द्रौपदी बोली👰🏻‍♀️, कृष्ण क्या तुम मुझे संभालने आए हो या ताना मारने आए हो?* *योगेश्वर बोले "नहीं द्रौपदी, मैं तुम्हें उसका सच बताने आया हूं. अपने कर्मों का फल हमें दिखता नहीं है. लेकिन जब वो सामने आता है तब हम कुछ नहीं कर पाते."* *द्रौपदी पूछती है, कृष्ण तो क्या इस युद्ध के लिए सिर्फ मैं ही जिम्मेदार हूं, ऐसा तुम कहना चाहते हो? कृष्ण बोले, "नहीं द्रौपदी, तुम खुद को इतना महत्व मत दो.* *तुमने अपने कर्म में थोड़ी सी भी दूरदर्शिता दिखाई होती तो तुम्हें इतना कष्ट नहीं उठाना पड़ता!" द्रौपदी पूछती है कृष्ण, मैं क्या कर सकती थी? कृष्ण कहते हैं☝🏻🤴🏻, 'तुम्हारे स्वयंवर के समय तुमने कर्ण का अपमान नहीं करना चाहिए था.'* *उसके बाद👵🏻 कुंती ने जब तुम्हें पांचों पांडवों की पत्नी बनने का आदेश दिया था, उसे तुमने स्वीकार नहीं किया होता, तो परिणाम कुछ और होते.* *और उसके बाद तुमने अपने महल में 👺दुर्योधन के जख्म पर वार करने वाला वाक्य बोला था.. "अंधे का पुत्र अंधा" और खिलखिलाकर💃🏻 हंसते हुए उसका "सार्वजनिक अपमान" किया था. वो नहीं किया होता तो तुम्हारा वस्त्रहरण नहीं होता. शायद तब भी हालात अलग होते.* *हमारे शब्द ही हमारे अच्छे या बुरे कर्म बनते हैं. हमें अपना हर शब्द सोच कर बोलना चाहिए.* *वरना उसके दुष्परिणाम सिर्फ हमें ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को भुगतने पड़ते हैं.* *दुनिया में इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जिसके दांतों में नहीं बल्कि 👅जीभ में जहर होता है.* *इसलिए.. बोलते समय होश रखना बहुत जरूरी है... बेलगाम🤷🏻‍♀️ बोलने और लिखने से ही रिश्ते टूटते हैं और गृहस्थी में महाभारत हो जाता है🌹✨* *किसी भी घर, परिवार, समाज में वैर भाव, महाभारत नहीं हो..ये ही सभी लोगों का फ़र्ज़ होना चाहिए l* *दया, करुणा, दान, धर्म, अच्छाई से मोक्ष मार्ग पर प्रशस्त होना ही आपका हमारा, साधु साध्वी, गृहस्थ लोगो का उद्देश्य होना चाहिए l* 🚩🚩👏👏 *सदैव प्रसन्न रहिये!!* *जो प्राप्त है-पर्याप्त है* #श्री गणेश
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