Akeel 569 views • 19 days ago #लम्हा ए फ़िक्र# अगर मस्जिद का ख़तीब मुहर्रम में भी अहले बैत और कर्बला का ज़िक्र नहीं करता, यज़ीद पर ख़ामोश है फिर ख़तीब बदलो या नस्ल के यज़ीदी होने का इंतज़ार करो। 2 likes 7 shares Share Like Comment Download