#जय श्री कृष्ण
शोभित दंपति अति रंग भीने।
तैसेई अमल अनंग विराजत तैसी बसनन झीने॥
तैसेई वदन जोति-तैसेई भूषन दोति वारों घन दामिनि कोटि नवीने।
परस्पर तन निहारत हरषत लोचन अधीने॥
रमकि झमकि मुसिकाइ लाड़िली लपटत लटकि मन मनमथ छीने ॥
जैश्री कमलनैन हित अति रस बाढ़यौ निरख सखी दृग दीने ॥
राधे राधे....
जय श्रीकृष्ण....
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