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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - ज़िन्दगी सीधे साधे चलना ठीक नही उबड़ खाबड़ पडाव भी जरूरी है, तैरते तैरते बाजू थक जाएंगे लिए नाव भी जरूरी है, एक पल के बदलाव भी जरूरी ये घाव भी जरूरी है, इतनी धूप अच्छी नेही थोड़ी छांव भी जरूरी है..! हद-ए-्शहर से निकली तो, गांव-गांव चली॰ कुछ यादें मेरे 7, পান-াণ বলী ! सफर जो धूप का किया तो, तजुर्बा हुआ.. वो ज़िन्दगी ही क्या जो, छांव ्छांव चली..!! ज़िन्दगी सीधे साधे चलना ठीक नही उबड़ खाबड़ पडाव भी जरूरी है, तैरते तैरते बाजू थक जाएंगे लिए नाव भी जरूरी है, एक पल के बदलाव भी जरूरी ये घाव भी जरूरी है, इतनी धूप अच्छी नेही थोड़ी छांव भी जरूरी है..! हद-ए-्शहर से निकली तो, गांव-गांव चली॰ कुछ यादें मेरे 7, পান-াণ বলী ! सफर जो धूप का किया तो, तजुर्बा हुआ.. वो ज़िन्दगी ही क्या जो, छांव ्छांव चली..!! - ShareChat