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#lifelesson #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #motivation #☝ मेरे विचार
lifelesson - !!अपर्नों पर अंधा विश्वास!! Follow/Sandhya Gupta घर के बुजुर्ग मुखिया की आंख में तकलीफ रहने लगी। एक डॉक्टर आंख का ऑपरेशन कराने की उनके घर आए और बुज़ुर्ग को उस बुजुर्ग ने कहा आंख बनवाने में बेकार पैसे खर्च होँगे, सलाह दी। परहेज रखना पड़ेगा आदि-आदि, मेरी तो ऐसे ही ठीक है। थोड़े दिन बाद उनकी आंख में ज्यादा तकलीफ रहने लगी, वो डॉक्टर फिर उनके घर आए। बोले- बाबा अब तो ऑपरेशन करवा लो नहीं तो बाद में ज्यादा तकलीफ होगी। वो बोला- मुझे क्या जरूरत है। मेरे चार बेटे हैं, चार बहुएं हैं पोते पोती हैं। ये सब मेरी आँखें ही तो हैं। कोई न कोई हमेशा मेरे पास बैठा ही रहता है। एक दिन घर में आग लग गई। सब के सब निकलकर बाहर भाग गए, बूढ़े आदमी को किसी ने नहीं निकाला। तभी एक पड़ोसी ने आकर उसे निकाला, तब तक वो काफी झुलस चुका था। खैर उसकी जान बच गई। बूढ़ा आदमी सोचता है आज अपनी आंख होती तो कितना अच्छा होता, काश डॉक्टर की बात मान ली होती। वो डॉक्टर और कोई नहीं गुरु था जो उसे चेताने आया था। पर आदमी मानता कहां है? उसे तो अपने रिश्तेदारों पर, दोस्तों पर, पैसे पर घमंड होता है। जबकि आदमी को स्वयं पर आत्मनिर्भर होना चाहिए। शरीर से भी किसी की सेवा की जरूरत ना पडे़ और पैसे के लिए भी किसी के आगे हाथ ना फैलाना पड़। जीवन के अंतिम भाग तक कमाते रहो। भीतरी बात- गहरी बात- मांगो उसी से जो दे खुशी से और कहो उसी से जो कहे ना किसी से। !!अपर्नों पर अंधा विश्वास!! Follow/Sandhya Gupta घर के बुजुर्ग मुखिया की आंख में तकलीफ रहने लगी। एक डॉक्टर आंख का ऑपरेशन कराने की उनके घर आए और बुज़ुर्ग को उस बुजुर्ग ने कहा आंख बनवाने में बेकार पैसे खर्च होँगे, सलाह दी। परहेज रखना पड़ेगा आदि-आदि, मेरी तो ऐसे ही ठीक है। थोड़े दिन बाद उनकी आंख में ज्यादा तकलीफ रहने लगी, वो डॉक्टर फिर उनके घर आए। बोले- बाबा अब तो ऑपरेशन करवा लो नहीं तो बाद में ज्यादा तकलीफ होगी। वो बोला- मुझे क्या जरूरत है। मेरे चार बेटे हैं, चार बहुएं हैं पोते पोती हैं। ये सब मेरी आँखें ही तो हैं। कोई न कोई हमेशा मेरे पास बैठा ही रहता है। एक दिन घर में आग लग गई। सब के सब निकलकर बाहर भाग गए, बूढ़े आदमी को किसी ने नहीं निकाला। तभी एक पड़ोसी ने आकर उसे निकाला, तब तक वो काफी झुलस चुका था। खैर उसकी जान बच गई। बूढ़ा आदमी सोचता है आज अपनी आंख होती तो कितना अच्छा होता, काश डॉक्टर की बात मान ली होती। वो डॉक्टर और कोई नहीं गुरु था जो उसे चेताने आया था। पर आदमी मानता कहां है? उसे तो अपने रिश्तेदारों पर, दोस्तों पर, पैसे पर घमंड होता है। जबकि आदमी को स्वयं पर आत्मनिर्भर होना चाहिए। शरीर से भी किसी की सेवा की जरूरत ना पडे़ और पैसे के लिए भी किसी के आगे हाथ ना फैलाना पड़। जीवन के अंतिम भाग तक कमाते रहो। भीतरी बात- गहरी बात- मांगो उसी से जो दे खुशी से और कहो उसी से जो कहे ना किसी से। - ShareChat