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#☝रहीम की सीख🌟 #🌷शुभ गुरुवार #🙏सुविचार📿 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख
☝रहीम की सीख🌟 - रहीम का अमर दोहा रहीमदास जी (1556 1627)| महान कवि, दानी, सेनानायक एवं अकबर के नवरत्नों में से एक दोहा रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय | टूटे से फिर ना जुड़े , जुड़े गाँठ परि जाय M संदर्भ WH; यह दोहा रहीमदास जी ने मानव संबंधों में विश्वास और मधुरता बनाए रखने की सीख देने के लिए लिखा है। प्रेम का बंधन बहुत नाजुक होता है, टूटने पर प्रभाव जीवन भर रहता है। $ व्याख्या प्रेम का धागा बहुत कोमल होता है। यदि इसे क्रोध, अहंकार या कटु से तोड़ दिया जाए, तो यह दोबारा जुड़ तो सकता है, लेकिन वचन उसमें गाँठ पड़ जाती है। वह गाँठ मन में खटास, दूरी और अविश्वास के रूप में हमेशा बनी रहती है। संदेश में मधुरता  हमें अपने व्यवहार , वाणी और कर्मो रखनी चाहिए ताकि संबंधों में कभी दरार न आए। यदि गलती हो जाए, तो क्षमा माँगकर संबंधों को बचाना चाहिए, क्योंकि टूटे हुए संबंध पहले जैसे नहीं रहते। सीख प्रेम , विश्वास और सम्मान - यही अच्छे संबंधों की नींव है। इन्हें संजोए रखें , यही जीवन को सुखमय बनाते हैं। रहीम का अमर दोहा रहीमदास जी (1556 1627)| महान कवि, दानी, सेनानायक एवं अकबर के नवरत्नों में से एक दोहा रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय | टूटे से फिर ना जुड़े , जुड़े गाँठ परि जाय M संदर्भ WH; यह दोहा रहीमदास जी ने मानव संबंधों में विश्वास और मधुरता बनाए रखने की सीख देने के लिए लिखा है। प्रेम का बंधन बहुत नाजुक होता है, टूटने पर प्रभाव जीवन भर रहता है। $ व्याख्या प्रेम का धागा बहुत कोमल होता है। यदि इसे क्रोध, अहंकार या कटु से तोड़ दिया जाए, तो यह दोबारा जुड़ तो सकता है, लेकिन वचन उसमें गाँठ पड़ जाती है। वह गाँठ मन में खटास, दूरी और अविश्वास के रूप में हमेशा बनी रहती है। संदेश में मधुरता  हमें अपने व्यवहार , वाणी और कर्मो रखनी चाहिए ताकि संबंधों में कभी दरार न आए। यदि गलती हो जाए, तो क्षमा माँगकर संबंधों को बचाना चाहिए, क्योंकि टूटे हुए संबंध पहले जैसे नहीं रहते। सीख प्रेम , विश्वास और सम्मान - यही अच्छे संबंधों की नींव है। इन्हें संजोए रखें , यही जीवन को सुखमय बनाते हैं। - ShareChat