Swami Shri Shrijee Maharaj
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रघुनाथ दास गोस्वामी कहते हैं पादाब्जयोस्तव विना वर - दास्यमेव - हे दिव्य-क्रीड़ा परायणा स्वामिनि ! आपके चरण-कमलों के सर्वश्रेष्ठ दास्य को छोड़कर मैं कभी भी अन्य किसी (सख्यादि) भाव की प्रार्थना नहीं करती हूँ। आपके सखीत्व को मैं नित्य बार-बार नमस्कार करती हूँ। आपके दास्य में ही मेरा अनुराग हो, यह मैं सत्य कह रही हूँ। ऐसा भाव बनाकर श्री बरसाना धाम वास कीजिए और नित्य गहवर वन में उनके दर्शनों की अभिलाषा से भजन कीजिए l श्रीजी महाराज #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
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