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Navneet Gill - Author on ShareChat
Navneet Gill
550 views • 24 days ago
#literature
"रूह पे जख़्म , करें वीरान हृदय की बस्ती। Navneet Gill ritco.in "रूह पे जख़्म , करें वीरान हृदय की बस्ती। Navneet Gill ritco.in
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    Navneet Gill
    "झंझट टाइम्स" समाचारपत्र (समस्तीपुर/ बिहार) ☺️ #साहित्य #literature
    তিলা নিির মঘ ক सह प्रधान जिला जज 318೫ अध्यक्ष h माकंर्डेय सिंह,  रोहतास जैन, f4 তিলা ক্তুসাং अनुज লাং र जुस्तजू के साये 7 जे टी न्यूज जे I, कहे मतवारा 91c फिर जला उम्मीद का दीया। ಕ फड़फड़ाये जब भी लौ, देना मत माननीय संयम खो। तेल, डाल धैर्य रूपी ಕ h करे रोशनी अंधकार फेल। | सूर्य किरणों की भांति, न बांटेगा सुख, समृद्धि, शांति। ा 1 3HTT; र छेड़कर नव बजाता हृदयेश्वर में मृदंग | 5 आस दीपक है कामना, ೩ जले सदैव बिना अवमानना| नवनीत गिल বস ব (ভূনিষ্কাম,যাতনীনি ஈ 1 होे तेरा या मेरा घर, बी॰एड, शास्त्र) , एम.एड, फैले उजाला बन दिनकर। বল-বললী | नहीं , कभी पूर्व प्राचार्य पाये बुझने "गिल" जुस्तजू के हसीं साये। सीबीएसई विद्यालय (उत्तर 1 प्रदेश ) `| र न তিলা নিির মঘ ক सह प्रधान जिला जज 318೫ अध्यक्ष h माकंर्डेय सिंह,  रोहतास जैन, f4 তিলা ক্তুসাং अनुज লাং र जुस्तजू के साये 7 जे टी न्यूज जे I, कहे मतवारा 91c फिर जला उम्मीद का दीया। ಕ फड़फड़ाये जब भी लौ, देना मत माननीय संयम खो। तेल, डाल धैर्य रूपी ಕ h करे रोशनी अंधकार फेल। | सूर्य किरणों की भांति, न बांटेगा सुख, समृद्धि, शांति। ा 1 3HTT; र छेड़कर नव बजाता हृदयेश्वर में मृदंग | 5 आस दीपक है कामना, ೩ जले सदैव बिना अवमानना| नवनीत गिल বস ব (ভূনিষ্কাম,যাতনীনি ஈ 1 होे तेरा या मेरा घर, बी॰एड, शास्त्र) , एम.एड, फैले उजाला बन दिनकर। বল-বললী | नहीं , कभी पूर्व प्राचार्य पाये बुझने "गिल" जुस्तजू के हसीं साये। सीबीएसई विद्यालय (उत्तर 1 प्रदेश ) `| र न
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    Navneet Gill
    'Punjabi Tribune' newspaper (Chandigarh, Punjab) 😇 #literature #साहित्य
    ৯eমী ববা =|71 ठैटां रग मर्भुरठ ठदठीउ fगॅल বসীশ' নসরব্য ೯ ೯ಣತೆೆ BHafl d8 ತಹ, f೯೯ ಕಕ? था ३ल्लो्रां उ मग्ग भॅठे। ೯ತ೯ adlಕ; वग्रे fरमे नो गनगे। + ऐगेऐ मठ गॅघ भग्ठरे उग्जो ने प्वैठ मॅघ। নিমা সব্ত নিষ্টি? RHೆ famT Hd fRBI ঘবীব ন্রস্থ হী হঁস, भिटा थठ ऋर्टागटउ ममे। বাহিসস্য বম্তূবব, ठैटां रा रेध मभरग। ষ্ ব্লাম্া বমিশয, THF గఖా; కౌ uife 7ಾ16 Fd ೩೫ रॅछे, थग्प्टे वडठ, रप्टो। उइरा रग्गे वमभां 'বািম' তিন্াষ্ নঁবা বসH্য] ৯eমী ববা =|71 ठैटां रग मर्भुरठ ठदठीउ fगॅल বসীশ' নসরব্য ೯ ೯ಣತೆೆ BHafl d8 ತಹ, f೯೯ ಕಕ? था ३ल्लो्रां उ मग्ग भॅठे। ೯ತ೯ adlಕ; वग्रे fरमे नो गनगे। + ऐगेऐ मठ गॅघ भग्ठरे उग्जो ने प्वैठ मॅघ। নিমা সব্ত নিষ্টি? RHೆ famT Hd fRBI ঘবীব ন্রস্থ হী হঁস, भिटा थठ ऋर्टागटउ ममे। বাহিসস্য বম্তূবব, ठैटां रा रेध मभरग। ষ্ ব্লাম্া বমিশয, THF గఖా; కౌ uife 7ಾ16 Fd ೩೫ रॅछे, थग्प्टे वडठ, रप्टो। उइरा रग्गे वमभां 'বািম' তিন্াষ্ নঁবা বসH্য]
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    Navneet Gill
    #साहित्य #literature
    3icn, "शर्माया घटाओं की देख रवानी।" Navneet Gilll ritco.in 3icn, "शर्माया घटाओं की देख रवानी।" Navneet Gilll ritco.in
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    Navneet Gill
    "झंझट टाइम्स" समाचारपत्र (समस्तीपुर/ बिहार) 😇 #साहित्य #literature
    वषा (पछल २४ घटा म )ः 0.0 mm 1 विक्षिप्त हिम्मत जे टी न्यूज [ सुन, अरे ओ बाबरे, सीख चमकना भांति सितारे। कहे विक्षिप्त हिम्मत, कर ले, एकबार फिर से मरम्मत | ब्तथ्य आक्रेशकुछकँटता है टूटा।  धधकती हुई "ज्वाला" को समझ बस विष का प्याला। साधकर कोई भी निशाना| घूंट घूंट कर पीना, शूरवीर, बनके सदा रह समेटकर पीडा सीख जीना। "गिल" दे, तर्कश से खींच तीर नितांत ही आवश्यक बनेगा तभी, तो तू "निर्णायक" नवनीत गिल ( इतिहास, राजनीति ले सटीक, फैसले, TT.T 51.75, लौटेंगे खोये, हुए " हौंसले" হাাম্স ) , एम.एड एल.एल.बी | जायेगा पुराना भूल, পূন সামার্য देखकर खिले, नवीनतम फूल। सीबीएसई विद्यालय (3TR সতহা ) | इत्ता केवल करना, ؟٥ ` वषा (पछल २४ घटा म )ः 0.0 mm 1 विक्षिप्त हिम्मत जे टी न्यूज [ सुन, अरे ओ बाबरे, सीख चमकना भांति सितारे। कहे विक्षिप्त हिम्मत, कर ले, एकबार फिर से मरम्मत | ब्तथ्य आक्रेशकुछकँटता है टूटा।  धधकती हुई "ज्वाला" को समझ बस विष का प्याला। साधकर कोई भी निशाना| घूंट घूंट कर पीना, शूरवीर, बनके सदा रह समेटकर पीडा सीख जीना। "गिल" दे, तर्कश से खींच तीर नितांत ही आवश्यक बनेगा तभी, तो तू "निर्णायक" नवनीत गिल ( इतिहास, राजनीति ले सटीक, फैसले, TT.T 51.75, लौटेंगे खोये, हुए " हौंसले" হাাম্স ) , एम.एड एल.एल.बी | जायेगा पुराना भूल, পূন সামার্য देखकर खिले, नवीनतम फूल। सीबीएसई विद्यालय (3TR সতহা ) | इत्ता केवल करना, ؟٥ `
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    Navneet Gill
    "बुद्ध पथ" दैनिक समाचारपत्र (उज्जैन/ मध्यप्रदेश) 😇🙏🏻 #literature #साहित्य
    उनकी नीरवता में अन्नपूर्णा महाराजा थके पाँव अक्सर सुकून की छाँव बदलती हरपल तकरीर।  हुक्म देती कर लो सैर,  ढूँढते बिन रूके थके पाँव। होंगें मजबूत, तभी दुर्बल पैर।  थिरकते कभी बन मोर, मगर मांगते, अब न हो भोर। मान देखना ये सलाह चाहें सौगात ए-आराम, ओ मुसाफ़िर चल सरेराह। सुब्हो से ले, तलक शाम। खुशियों की बसा बस्ती  गिल मिटाये बिना तुम हस्ती।  छोड़ करक, कदम चाल वक्त लड़खड़ाने , की दे ताल। उज्जैन मध्यप्रदेश से प्रकाशित अजीब सी॰ बिडम्बना, बुद्ध पथ समाचार पत्र के करती है जो, अवमानना। लिए आगरा ( यूपी ) से लेखिका  नवनीत गिल,एम.ए बेशक बांटती शिकस्त, प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , बुने जाल, ताकि हों सब पस्त।  (उत्तर प्रदेश )। बी॰एड एम.एड, एल.एल.बी।पूर्व पर निष्ठुर सी तकदीर, उनकी नीरवता में अन्नपूर्णा महाराजा थके पाँव अक्सर सुकून की छाँव बदलती हरपल तकरीर।  हुक्म देती कर लो सैर,  ढूँढते बिन रूके थके पाँव। होंगें मजबूत, तभी दुर्बल पैर।  थिरकते कभी बन मोर, मगर मांगते, अब न हो भोर। मान देखना ये सलाह चाहें सौगात ए-आराम, ओ मुसाफ़िर चल सरेराह। सुब्हो से ले, तलक शाम। खुशियों की बसा बस्ती  गिल मिटाये बिना तुम हस्ती।  छोड़ करक, कदम चाल वक्त लड़खड़ाने , की दे ताल। उज्जैन मध्यप्रदेश से प्रकाशित अजीब सी॰ बिडम्बना, बुद्ध पथ समाचार पत्र के करती है जो, अवमानना। लिए आगरा ( यूपी ) से लेखिका  नवनीत गिल,एम.ए बेशक बांटती शिकस्त, प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , बुने जाल, ताकि हों सब पस्त।  (उत्तर प्रदेश )। बी॰एड एम.एड, एल.एल.बी।पूर्व पर निष्ठुर सी तकदीर,
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    Navneet Gill
    "गजब हरियाणा" दैनिक समाचारपत्र (कुरूक्षेत्र/हरियाणा) 😇🙏🏻 #literature #साहित्य
    चोटिल मन সযাঠা अलग अकेल ক্ী্বিঠ যা 31১ 288 मा- इंजीनि छाड़ रखन ক जीवन की अंधी दौड़ , होता कहाँ आये खुद को छोड़ ? माहौल वाकई क्या ये थे तुम ? 815 सह गए, जो अनगिनत गम | UCTTs पिता के राज @ जुलाइ Sce, और कैसे घिरे गु़बार के अंधियारे ? सम्म माँकी आंखो का नूर, 226 हुए क्योंकर , फिर चकनाचूर ? சசி अनेक सपन सलौने , মঘাল तलाशे अब गोद से बिछौने | गया देते थेजो सुख अपार, যম্ী करके , सभी कुछदरकिनार | सब কনথা लेकिन चोटिल मन, सवाल कहे, उठ फिर से चल बुन 12 21I0 बिखरे से तमाम ख़्वाब , क सुनना चाहें स्टीक बस जबाव चर्चित তিনািল,  कांग्रेर बनकर अपना करना फतह हरेक मंजिल देखने বীনা মন্সী, মলুলাকয, शिक्षा , गिल जी, को समेटकर :ೆ: पूर भा नवनीत गिल एम.ए ( इतिहास , राजनीति बदल शार्त्र ) , बी.एड, एम.एड , एल.एल.बी । पूर्व प्राचार्य मगर सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश )| gq चोटिल मन সযাঠা अलग अकेल ক্ী্বিঠ যা 31১ 288 मा- इंजीनि छाड़ रखन ক जीवन की अंधी दौड़ , होता कहाँ आये खुद को छोड़ ? माहौल वाकई क्या ये थे तुम ? 815 सह गए, जो अनगिनत गम | UCTTs पिता के राज @ जुलाइ Sce, और कैसे घिरे गु़बार के अंधियारे ? सम्म माँकी आंखो का नूर, 226 हुए क्योंकर , फिर चकनाचूर ? சசி अनेक सपन सलौने , মঘাল तलाशे अब गोद से बिछौने | गया देते थेजो सुख अपार, যম্ী करके , सभी कुछदरकिनार | सब কনথা लेकिन चोटिल मन, सवाल कहे, उठ फिर से चल बुन 12 21I0 बिखरे से तमाम ख़्वाब , क सुनना चाहें स्टीक बस जबाव चर्चित তিনািল,  कांग्रेर बनकर अपना करना फतह हरेक मंजिल देखने বীনা মন্সী, মলুলাকয, शिक्षा , गिल जी, को समेटकर :ೆ: पूर भा नवनीत गिल एम.ए ( इतिहास , राजनीति बदल शार्त्र ) , बी.एड, एम.एड , एल.एल.बी । पूर्व प्राचार्य मगर सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश )| gq
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    Navneet Gill
    "झंझट टाइम्स" समाचारपत्र (समस्तीपुर/बिहार) 🙏🏻 #साहित्य #literature
    बुलेटिन যদীয চিনী ননিক [TUTT[UELL acebook com WWWajhanjhattimes Com @rkraijhanjhattl llvoutu.be দ্যালবাৎ 16 समस्तीपुर जून d8 ٣7 = 12 मूल्य : 3 रूपय ೪o : 35 2026 -  मिला तब पूरे मामले का खुलासा जाांवका समूहों के माध्यम से दस्त हुआ| मामला   सामने आने के नियमित रूप से बचत और ऋण काग क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। की किश्त जमा करती हैं | मेहनत की बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि॰ और भरोसे के आधार पर चलने की सांसो की डोर 7==7 जीवन मांझे में॰ अटकी सांसो की डोर। निभाये कसमें , रस्में, గై7 फड़फड़ाये , पर  आत्मविभोर | कित्ती बार कटे, लेकिन फिर, देखो उड़े। हजारों স ন৫, टुकडों  लालायित, होकर भी नहीं हुई जब, विक्षिप्त সুভ | सभी कुछ। छोड़कर तब होना चाहती विलुप्त अपने दम पे चाहे , "गिल" सदैव ही, आगे बढ़ना। समझकर T को तुच्छ।  इसीलिए ढूँढे, वो राहें, 5767 का   हो सफलता নননীন ািল মিক্ধানা | Tস T (इतिहास , राजनीति चाहे खुला, गगन, #v; "तिलंगी" जरा सी ढील। I), 1 एम.एड, एल.एल.बी। मगर देख होता हनन, 7 पूर्व प्राचार्य सीबीएसई लेता उसकी सब खुशियां विद्यालय (उत्तर लील। प्रदेश )  बुलेटिन যদীয চিনী ননিক [TUTT[UELL acebook com WWWajhanjhattimes Com @rkraijhanjhattl llvoutu.be দ্যালবাৎ 16 समस्तीपुर जून d8 ٣7 = 12 मूल्य : 3 रूपय ೪o : 35 2026 -  मिला तब पूरे मामले का खुलासा जाांवका समूहों के माध्यम से दस्त हुआ| मामला   सामने आने के नियमित रूप से बचत और ऋण काग क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। की किश्त जमा करती हैं | मेहनत की बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि॰ और भरोसे के आधार पर चलने की सांसो की डोर 7==7 जीवन मांझे में॰ अटकी सांसो की डोर। निभाये कसमें , रस्में, గై7 फड़फड़ाये , पर  आत्मविभोर | कित्ती बार कटे, लेकिन फिर, देखो उड़े। हजारों স ন৫, टुकडों  लालायित, होकर भी नहीं हुई जब, विक्षिप्त সুভ | सभी कुछ। छोड़कर तब होना चाहती विलुप्त अपने दम पे चाहे , "गिल" सदैव ही, आगे बढ़ना। समझकर T को तुच्छ।  इसीलिए ढूँढे, वो राहें, 5767 का   हो सफलता নননীন ািল মিক্ধানা | Tস T (इतिहास , राजनीति चाहे खुला, गगन, #v; "तिलंगी" जरा सी ढील। I), 1 एम.एड, एल.एल.बी। मगर देख होता हनन, 7 पूर्व प्राचार्य सीबीएसई लेता उसकी सब खुशियां विद्यालय (उत्तर लील। प्रदेश )
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    Navneet Gill
    "Satt Samundron Paar" Global Magazine (Ludhiana, Punjab) 😇 #literature #साहित्य
    4[06'1 ठदठीउ गिॅल ব৮ব হ৮বা সহাদ, YaHa HJ f3H YaT | वठ रेट गि्ठरे भीदे, HB& ஈ= 53 5& =1=/ ব্রূম্া মন্তামী ববধ, B& = f#4rB& ஈடுப| भिले वलेने ठग्ठरे, JHfసI, గ్ర్తే శేJTTర2 / ्िरे ठगींठि हॅप्ट , সমম বিওত মা, নৎম মূম| ননীবীসা সহ্দ, शग्धे भेलु घगे, हेइ लै मग्न। हॅहीं ठिपग्ठ सतुत, মরবীব নীন্ত নিম ট্ূ মনম্রব | <iara "y&" சளர் মমী' নিওত, ভ্রমীস্াeী নবা' | थग्ठट ग्ग्मे पभग्ल, रेधीप्टे ग्ठढां रे वभग्ल। T, प्वेल , ర & #63 गिॅल ' भॅलेभॅली मॅररे वेल। मग्प्ववा ्थिमीथल मीप्तीरित्रैममी मवल, g? 4[06'1 ठदठीउ गिॅल ব৮ব হ৮বা সহাদ, YaHa HJ f3H YaT | वठ रेट गि्ठरे भीदे, HB& ஈ= 53 5& =1=/ ব্রূম্া মন্তামী ববধ, B& = f#4rB& ஈடுப| भिले वलेने ठग्ठरे, JHfసI, గ్ర్తే శేJTTర2 / ्िरे ठगींठि हॅप्ट , সমম বিওত মা, নৎম মূম| ননীবীসা সহ্দ, शग्धे भेलु घगे, हेइ लै मग्न। हॅहीं ठिपग्ठ सतुत, মরবীব নীন্ত নিম ট্ূ মনম্রব | <iara "y&" சளர் মমী' নিওত, ভ্রমীস্াeী নবা' | थग्ठट ग्ग्मे पभग्ल, रेधीप्टे ग्ठढां रे वभग्ल। T, प्वेल , ర & #63 गिॅल ' भॅलेभॅली मॅररे वेल। मग्प्ववा ्थिमीथल मीप्तीरित्रैममी मवल, g?
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    "दैनिक यश बाबू" समाचारपत्र (कुरूक्षेत्र/हरियाणा) 🙏🏻 #literature #साहित्य
    साहत क३ काग्रस कायकता म।जू५ रहे। इंद्रधनुषी रंगरेज थली बन चुका अपराधियों के గ్లై" T% अब अंजाम दिया सैनी   पर ब होंने कहा कि॰ ही नहीं संभल ी स्थिति का मेहमां बादल, ता है। उन्होंने लगा घटारूपी काजल। ाओं के सपने जिया भरमाये, में युवा " विदेशों संग बिजुरिया, जब आये। रहे हैं, जबकि गर्जन का शोर, ।म पर केवल सुनकर नाचे, चितचोर| নিনা নংমে; ৭ং, T ऐलान उड़े जब, कभी दूसरे नगर। ক্ি সান নাল फिर तरसे नेत्र, धानसभा में कहें, आह महीना चैत्र। Tೆ साथ ही गर्मी से लबरेज, उक आयोजित इंद्रधनुषी रंगरेज। पुकारते फी हर समस्या आ, लौट बदरा, ाएगा, ताकि बना के बूंदों का सेहरा । ों की सच्चाई ஈ खुक औ़र खलिहान।  सिंह, कुलदीप क्या है जीवन ? पघिसरपडी, बिन। जलधर ', तुम्हारे डूडा, धर्मवीर HfsH Yf, की, ওলনাং गिल ' आकर, दे मन हर्षा। दोली, सलिन्द्र, नवनीत गिल साहत क३ काग्रस कायकता म।जू५ रहे। इंद्रधनुषी रंगरेज थली बन चुका अपराधियों के గ్లై" T% अब अंजाम दिया सैनी   पर ब होंने कहा कि॰ ही नहीं संभल ी स्थिति का मेहमां बादल, ता है। उन्होंने लगा घटारूपी काजल। ाओं के सपने जिया भरमाये, में युवा " विदेशों संग बिजुरिया, जब आये। रहे हैं, जबकि गर्जन का शोर, ।म पर केवल सुनकर नाचे, चितचोर| নিনা নংমে; ৭ং, T ऐलान उड़े जब, कभी दूसरे नगर। ক্ি সান নাল फिर तरसे नेत्र, धानसभा में कहें, आह महीना चैत्र। Tೆ साथ ही गर्मी से लबरेज, उक आयोजित इंद्रधनुषी रंगरेज। पुकारते फी हर समस्या आ, लौट बदरा, ाएगा, ताकि बना के बूंदों का सेहरा । ों की सच्चाई ஈ खुक औ़र खलिहान।  सिंह, कुलदीप क्या है जीवन ? पघिसरपडी, बिन। जलधर ', तुम्हारे डूडा, धर्मवीर HfsH Yf, की, ওলনাং गिल ' आकर, दे मन हर्षा। दोली, सलिन्द्र, नवनीत गिल
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