sn vyas
612 views • 22 hours ago
#🌞जय सूर्यदेव भगवान🙏 शुभ रविवार🙏 ॐ सूर्याय नमः🌻🏕️
🌍वैज्ञानिक तथ्य:🌍
🌄सूर्य देव का जन्म लगभग 4.6 अरब साल पहले अंतरिक्ष में मौजूद गैस और धूल के एक विशाल बादल (सोलर नेबुला) के सिकुड़ने और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण आपस में जुड़ने से हुआ था। 🌄
🚩वैज्ञानिक प्रक्रिया गैस का बादल: 🚩
🎇अंतरिक्ष में हाइड्रोजन और हीलियम गैस तथा धूल का एक बड़ा बादल था। 🎇
🚩गुरुत्वाकर्षण खिंचाव:🚩
🤥किसी हलचल के कारण यह बादल अपने ही गुरुत्वाकर्षण से अंदर की तरफ सिकुड़ने और तेजी से घूमने लगा। 🤥
🚩नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion): 🚩
🔥बीच का हिस्सा बहुत गर्म और घना हो गया, जिससे हाइड्रोजन हीलियम में बदलने लगी और ऊर्जा फूट पड़ी, जिससे सूर्य देव का जन्म हुआ ।🔥
🚩सत्य सनातन धर्म के अनुसार:🚩
📕 ब्रह्म पुराण में मिलती है सूर्य देव की उत्पत्ति की कथा, जन्म लेते ही देवताओं को वापस दिलाया स्वर्ग। सनातन धर्म में सूर्य देव को पूजनीय माना जाता है। साथ ही यह भी मान्यता चली आ रही है कि रोजाना सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करने से कुंडली में सूर्य की स्थित मजबूत होती है। जिससे साधक को सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। लेकिन क्या आप सूर्य देव की उत्पत्ति की कथा जानते हैं अगर नहीं तो चलिए जानते हैं इस विषय में।📕
🌄सूर्य देव ग्रहों का राजा के साथ-साथ पंचदेवों में से भी एक माने गए हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की आराधना के लिए रविवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। सूर्य देव को भास्कर, आदित्य, भानु आदि कई नामों से जाना जाता है। सूर्य देव के जन्म (Lord Surya Birth) को लेकर एक बड़ी ही रोचक कथा मिलती है, जिससे जानना काफी दिलचस्प होगा।🌄
👩❤️👩 अपनी माता के पास पंहुचे देवता👩❤️👩
🖼️ब्रह्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, पहले पूरे संसार में कोई प्रकाश नहीं था जिस कारण दिन और रात में भी कोई भेद नहीं था। एक बार राक्षसों और देवताओं में युद्ध छिड़ गया। दैत्य, देवताओं पर भारी पड़ने लगे, जिस कारण देवताओं को स्वर्ग छोड़कर भागना पड़ा। तब सभी देवता अपनी माता अदिति के पास गए और उनसे मदद मांगने लगे।🖼️
🚩अदिति ने मांगा ये वरदान🚩
🤱तब अदिति ने सदाशिव की कठोर उपासना की और उन्हें प्रसन्न कर यह वरदान मांगा कि वह उनके पुत्र के रूप में जन्म ले । उनकी इच्छा पूर्ति के लिए सदाशिव ने अपने त्रिनेत्र से सुषुम्ना नाम की किरण से उनके गर्भ में प्रवेश किया। गर्भ धारण करने के बाद अदिति रोजाना कठिन व्रत करने लगीं। तब उनके पति ऋषि कश्यप ने उनसे कहा कि आप इतना कठिन व्रत- अनुष्ठान करती हैं, इससे शिशु को हानि पहुंच सकती है। तब देवी अदिति ने अपने योगबल से अंड रूप में गर्भ को बाहर कर दिया, जिससे अत्यंत दिव्य तेज प्रज्वलित हुआ। भगवान सूर्य शिशु रूप में उस गर्भ से प्रकट हुए और पूरा संसार रोशनी से भर गया और इस तेज से डरकर दैत्य भाग खड़े हुए। इसके बाद स्वर्ग पर फिर से देवताओं का राज हो गया माना जाता है कि उसी दिन से सूर्य देव अंडज रूप में आकाश में स्थापित हो गए। हमारे शास्त्र में वर्णित है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सूर्य देव का जन्म हुआ था, जिसे रथ सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।🤱
🧘विचारणीय यह हैं कि सूर्य देव हैँ क्या ? वह हैँ , सदाशिव का त्रिनेत्र । उनके नजरों से कोई नहीं बच सकता। 🧘
🎇उनके त्रिनेत्र खुलना🎇
🔥मतलब सूर्य देव में इतनी ऊर्जा है, जिससे पूरा ब्रह्माण्ड आग के गोले के रूप में परिवर्तित होना तय हैं। यहीं हमारे शास्त्र में उनका संहारक स्वरूप हैं। संहारक का मतलब ही इतनी शक्ति ,जो पूरे ब्रह्माण्ड को भस्म कर दे । वो और कोई नहीं सदाशिव के त्रिनेत्र से उत्पन्न सूर्य देव ही हैं। 🔥👏🚩
ॐ नमःशिवाय 👏🚩
जय जय श्री राम 👏🚩
जय श्री कृष्णा 👏🚩
7 shares