sn vyas
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#शुभ रविवार #🌞जय सूर्यदेव भगवान🙏 शुभ रविवार🙏 ॐ सूर्याय नमः🌻🏕️ #ॐ घृणि सूर्याय नमः 🙏🌼 # जय सूर्य नारायण भगवान 🙏🌻
`रश्मिभिस्तापितोऽर्कस्य सर्वपापमपोहति ।`
`ग्रीष्मकालेऽथ वा शीते एवं पापमपोहति ॥५६॥`
`ततः पापात् प्रमुक्तस्य द्युतिर्भवति शाश्वती ।`
`तेजसा सूर्यवद् दीप्तो भ्राजते सोमवत् पुनः ॥५७॥`
`—श्रीमन्महाभारत , अनुशासनपर्व ( १३ ) , १२५.५६-५७`
`अर्थात 👉🏻 सूर्यदेव की किरणों से संतप्त ( तपा हुआ ) मनुष्य अपने समस्त पापों को धो डालता है । चाहे ग्रीष्मकाल ( गर्मी ) हो अथवा शीतकाल ( सर्दी ) , दोनों मौसमों में इस प्रकार तप करने से पापों का नाश हो जाता है सूर्यदेव की किरणों से संतप्त (तपा हुआ) मनुष्य अपने सभी पापों को धो डालता है । चाहे ग्रीष्मकाल (गर्मी) हो अथवा शीतकाल ( सर्दी ) , दोनों मौसमों में इस प्रकार तप करने से पापों का नाश हो जाता है ॥५६॥`
`इसके पश्चात् पापों से मुक्त हुए उस साधक की कांति ( आभा ) शाश्वती ( सदैव रहने वाली ) हो जाती है । वह सूर्य के समान दीप्तिमान होकर तेज से चमकता है एवं चंद्रमा के समान सौम्य तथा सुंदर दिखाई देता है ॥५७॥`
`नारायण🪷`
`रविवार की पावन बेला में सूर्यनारायण का साक्षात् प्रमाण🙏🏻`
`🪔 श्लोक का मर्म –`
`१. रश्मिभिस्तापितः – केवल धूप में खड़े होना नहीं , अपियु सूर्य को गुरु मानकर तपना । आधुनिक भाषा में – ☆सूर्य नमस्कार , ☆अर्घ्य अर्पित करना, एवं ☆ गायत्री जप 👉🏻 ये समस्त "तप्त होना" ही है ।`
`२. ग्रीष्मकालेऽथ वा शीते –☆सुख में भी धर्म तथा ☆दुःख में भी धर्म के सानिध्य में रहना । जिसने माघ की ठंड में भी उषाकाल में स्नान कर सूर्य को जल दिया 👉🏻 उसके पाप वैसे ही धुलते हैं जैसे जेठ की दोपहरी में ।`
`३. सूर्यवत् दीप्तः सोमवत् भ्राजते – यह वरदान है । तप से तेज का प्राकट्य होता है 👉🏻 सूर्य के समान । तप के बाद शांति/शीतलता आती है 👉🏻 चन्द्र जैसी । औऱ तदोपरांत साधक उग्र भी होता है एवं सौम्य भी , जिसके परिणामतः वह 👉🏻 स्थितप्रज्ञ बनता है ।`
`आदित्याय नमः🙏🏻🚩`
`🌄 प्रभात वन्दन 🌄©®`
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