sn vyas
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#श्री गणेशाय नमः *आरम्भाः फलिनः प्रसन्नहृदयो यत्रेतरेषामपि नो चेद्विश्वसृजोऽप्यलं विफलतामायान्त्युपायोद्यमाः ।* *विश्वैश्वर्यमतो निरङ्कुशमभूत्तस्यैव विश्वप्रभोः सोऽयं विश्वहिते रतो विजयते विघ्नेश्वरो विश्वकृत् ॥५॥* [ `औपनिषद्-अद्वैतब्रह्मविद्यासम्प्रदाय के पूर्वाचार्य श्रीसर्वज्ञात्ममुनि द्वारा संक्षेपशारीरक के मङ्गलाचरणमें भगवान् विघ्नेश्वर की स्तुति` ] `अर्थात 👉🏻 जिन भगवान गणेश के प्रसन्न होने पर साधारण मनुष्यों द्वारा प्रारंभ किए गए कार्य भी सफलतापूर्वक पूर्ण हो जाते हैं , किन्तु यदि वे प्रसन्न न हों तो स्वयं सृष्टि के रचयिता ( ब्रह्मा जी ) के द्वारा किए गए बड़े-बड़े उपाय एवं प्रयास भी सम्पूर्णतः असफल हो जाते हैं ; इसी कारण से उन संपूर्ण संसार के स्वामी का ऐश्वर्य और अधिकार पूरे ब्रह्मांड पर बाधारहित (सर्वोच्च) है। ऐसे पूरे विश्व के कल्याण में निरंतर लगे रहने वाले, सृष्टि का मंगल करने वाले और सभी बाधाओं को दूर करने वाले भगवान विघ्नेश्वर ( गणेश जी ) की सदैव जय हो ।` `🪶 अन्वयार्थ –` *विश्वकृद् विघ्नेश्वरः* `– विश्व के रचयिता विघ्नेश्वर` *यत्र प्रसन्नहृदयः* `– जिसके हृदय प्रसन्न हो जाए` *इतरेषाम् अपि आरम्भाः फलिनः* `– तो तिर्यक् योनि में स्थित प्राणियों के कार्य भी सफल हो जाते हैं` *नो चेत्* `– औऱ यदि वे प्रसन्न न हों` *विश्वसृजः अपि* `– तो ब्रह्मादि विश्वसृष्टा भी` *उपायोद्यमाः अलं विफलताम् आयान्ति* `– अपने उपाय एवं उद्योग में पूर्णतः असफल हो जाते हैं` *अतः* `– इसलिए` *विश्वप्रभोः तस्य एव* `– उसी विश्वप्रभु का` *विश्वैश्वर्यं निरङ्कुशम् अभूत्* `– विश्व पर ऐश्वर्य निरङ्कुश है` *सः अयं विश्वहिते रतः विघ्नेश्वरः विजयते* `– वही विश्वहित में रत विघ्नेश्वर विजयी हों` `🎋 ललितार्थ – महागणपति ही इस सम्पूर्ण विश्व के कर्ता हैं । वे ब्रह्मा आदि देवों के विघ्नों का भी हरण करने वाले हैं । यदि विघ्नेश्वर प्रसन्न हो जाएँ तो 👉🏻 'तिर्यक् योनि के पशु-पक्षी , यहाँ तक कि हनुमान् आदि के कार्य भी' सफल हो जाते हैं औऱ यदि विघ्नेश्वर अप्रसन्न हों तो 👉🏻 'विश्व की रचना में समर्थ ब्रह्मा आदि देवों के समस्त उपाय तथा प्रयत्न भी व्यर्थ' हो जाते हैं । इसीलिए इनका ऐश्वर्य – 'निरङ्कुश' कहा गया है । ये विश्वरचना में समर्थ 👉🏻 'विघ्नाधिपति महागणपति' – विश्व के कल्याण में सदैव रत रहते हैं । निःसंदेह वे हमारे मनोरथ को भी पूर्ण करेंगे ॥` `🎯 अद्वैत की दृष्टि से विशेष बात – श्रीसर्वज्ञात्ममुनि अद्वैत वेदान्त के आचार्य हैं । वे यहाँ – विघ्नेश्वर को ☆विश्वकृत् एवं ☆विश्वप्रभु कहकर स्तुति कर रहे हैं । अद्वैत में ईश्वर सगुण ब्रह्म है । साधना के आरम्भ में विघ्न दूर करने के लिए उसी सगुण रूप की उपासना की जाती है । इसलिए 👉🏻 'संक्षेपशारीरक' जैसे– अद्वैत ग्रन्थ का आरम्भ भी ☆विघ्नविनाशक गणपति की स्तुति से हुआ ।` `😊तात्पर्य – ज्ञानमार्ग में भी सर्वप्रथम 👉🏻☆विघ्ननाश आवश्यक है । बिना विघ्ननाश के न यज्ञ सिद्ध , न तप सिद्ध , तथा न ज्ञान सिद्ध ।` `ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥` `आप समस्तका दिवस गणेश जी की कृपा से निर्विघ्न हो 🪷` `जय श्री गणेश🙏🏻🚩` `हर हर महादेव🙏🏻🚩` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®`
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