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#*let us understand our religion #points to ponder #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #islam guide us in every field of life #सोचने वाली बात
*let us understand our religion - (3)हज़रत आयशा lic AUI J फ़रमाती हैंः ॰एक औरत मेरे पास अपनी दो बेटियों के साथ आई और कुछ खाने के लिए माँगा। मेरे पास एक खजूर के अलावा कुछ नहीं था। मैंने वह उसे दे दी। उसने वह खजूर अपनी दोनों बेटियों में बाँट दी और खुद उसमें से कुछ भी नहीं एखाया। फिर वह उठकर चली गई।*इसके बाद नबी १७& तशरीफ़ लाए। मैंने आपको यह बात बताई, तो नबी ३७& ने फ़रमायाः जिसे इन बेटियों के बारे में किसी तरह आज़माया जाए और वह इस आज़माइश में अच्छा व्यवहार करे लिए तो ये बेटियाँ उसके जहन्नम की आग से बचाव का पर्दा बन जाएँगी | १ सहीह (दारुस्सलाम) जामिअ अत-तिर्मिज़ीः १९१५, १९१६ ^0.0^ (3)हज़रत आयशा lic AUI J फ़रमाती हैंः ॰एक औरत मेरे पास अपनी दो बेटियों के साथ आई और कुछ खाने के लिए माँगा। मेरे पास एक खजूर के अलावा कुछ नहीं था। मैंने वह उसे दे दी। उसने वह खजूर अपनी दोनों बेटियों में बाँट दी और खुद उसमें से कुछ भी नहीं एखाया। फिर वह उठकर चली गई।*इसके बाद नबी १७& तशरीफ़ लाए। मैंने आपको यह बात बताई, तो नबी ३७& ने फ़रमायाः जिसे इन बेटियों के बारे में किसी तरह आज़माया जाए और वह इस आज़माइश में अच्छा व्यवहार करे लिए तो ये बेटियाँ उसके जहन्नम की आग से बचाव का पर्दा बन जाएँगी | १ सहीह (दारुस्सलाम) जामिअ अत-तिर्मिज़ीः १९१५, १९१६ ^0.0^ - ShareChat