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Bharat Bhoomi Channel Live - Author on ShareChat
Bharat Bhoomi Channel Live
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#सब्बे सत्ता सुखी होंतु #मेत्ता भावना #भवतु सब्ब मंगलं #मैत्री भावना #मंगल मैत्री
प्रज्ञा का प्रकाश 5q भीतर प्रकट होता है, अविद्या का अंधकार q स्वयं विलीन हो जाता है प्रज्ञा का प्रकाश 5q भीतर प्रकट होता है, अविद्या का अंधकार q स्वयं विलीन हो जाता है
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    Bharat Bhoomi Channel Live
    #भवतु सब्ब मंगलं #सब्बे सत्ता सुखी होंतु #मेत्ता भावना #मंगल मैत्री #मैत्री भावना
    भवतु सब्ब मंगलं, सब्बे सत्ता सुखी होंतु
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    Bharat Bhoomi Channel Live
    #सब्बे सत्ता सुखी होंतु #मैत्री भावना #मंगल मैत्री #भवतु सब्ब मंगलं #मेत्ता भावना
    महापूण्य संधी आपल्या सर्वांना कळिवण्यात आनंद होत आहे की॰ ग्यानरक्षित थेरो frar पज्य धम्ममय भारत मिशन अंतर्गत संघगिरी महास्तूप व महाविहार मयूर मृगदायवन आडगाव जावळे या ठिकाणी बनवत आहेत, त्यासाठी आपण नवीन ७ एकर जागा घेतली आह़े त्याची ३५ लाख रुपये देजन इसार पाबती केली आहे , २२ लाख रुपगे प्रती एकर नुसार आपण ७ एकर जागा घेतली आहे  आपण देखील या जागेन्या खरेढ़ीमध्ये थोडा बादा घेऊ शकता आपल्याला शक्य आहे त्यानुसार काही गुठे किंबा काही एकर जागा घेञन संपूर्ण असख्य पुण्य अर्जित करू शकता  भारत धम्ममय करण्यासाठी असलेले आपले धम्ममय भारत मिगन करण्यासाठी भागीग़ार होज शकता भगवान बुद्धांच्या धातू असणार आहेत , जेथे अग्र श्रावक भंते आनंद गांच्या धातू असणार आहेत भूमीमध्ये 7 अर्ईतांच्या धातू असणार आहेत ज्याठिकाणी आपली लहान मुले चिवर परिधान करून श्रामनेर होऊन धम्माने शिक्षण घेणार आहेत येणाऱ्या बुद्धांच्या नावाने असणारे आर्य मैत्रेय सधम्म नगर न वृद्धाश्रम असणार आहे, लोकहितासाठी दवाखाना असणार आहे , अग़ा त्रिविध पवन असणाऱ्या आपल्या संघगिरी महास्तूप व महाविहार मगूर मृगदागवन आडगाव जावळे गाठिकाणी जमीन घेण्यामध्ये  भागीग़र ग्हावे ही नम्र विनंती . आपण सामाल ग्हाव व अनत पुण्यान शंभर रक्वेअर फूट जागेसाठीः- ५५०० रे प्रमाणे दोनशे रक्वेअर फूट जागेसाठीः - ११,' ২ एक गुंठाः- ५५ हजार रुपये दोन गुंठाः- १ लाख १० हजार रुपय अर्धा एकर४- ११ लाख रुपये एक एकर५- २२ लाख रुपय 9823581004 ग़न पाठवण्पासाठी आापण गानगक्षीत थेोो गान्या नंबार वा फोन ऐ गुगल पे बरून ढान पाठ्नू ग़कता तनेनन बँक ट्रानफर करण्यासाठी खालील गाहितीना बापर करू शकता , भिक्खू ' पून Bank : State Bank of India (SBI) Gyanarakshita Bhikkhu Name Branch : cantonment chhaoni 62058324358 Account number IFSC SBIN0020005 महापूण्य संधी आपल्या सर्वांना कळिवण्यात आनंद होत आहे की॰ ग्यानरक्षित थेरो frar पज्य धम्ममय भारत मिशन अंतर्गत संघगिरी महास्तूप व महाविहार मयूर मृगदायवन आडगाव जावळे या ठिकाणी बनवत आहेत, त्यासाठी आपण नवीन ७ एकर जागा घेतली आह़े त्याची ३५ लाख रुपये देजन इसार पाबती केली आहे , २२ लाख रुपगे प्रती एकर नुसार आपण ७ एकर जागा घेतली आहे  आपण देखील या जागेन्या खरेढ़ीमध्ये थोडा बादा घेऊ शकता आपल्याला शक्य आहे त्यानुसार काही गुठे किंबा काही एकर जागा घेञन संपूर्ण असख्य पुण्य अर्जित करू शकता  भारत धम्ममय करण्यासाठी असलेले आपले धम्ममय भारत मिगन करण्यासाठी भागीग़ार होज शकता भगवान बुद्धांच्या धातू असणार आहेत , जेथे अग्र श्रावक भंते आनंद गांच्या धातू असणार आहेत भूमीमध्ये 7 अर्ईतांच्या धातू असणार आहेत ज्याठिकाणी आपली लहान मुले चिवर परिधान करून श्रामनेर होऊन धम्माने शिक्षण घेणार आहेत येणाऱ्या बुद्धांच्या नावाने असणारे आर्य मैत्रेय सधम्म नगर न वृद्धाश्रम असणार आहे, लोकहितासाठी दवाखाना असणार आहे , अग़ा त्रिविध पवन असणाऱ्या आपल्या संघगिरी महास्तूप व महाविहार मगूर मृगदागवन आडगाव जावळे गाठिकाणी जमीन घेण्यामध्ये  भागीग़र ग्हावे ही नम्र विनंती . आपण सामाल ग्हाव व अनत पुण्यान शंभर रक्वेअर फूट जागेसाठीः- ५५०० रे प्रमाणे दोनशे रक्वेअर फूट जागेसाठीः - ११,' ২ एक गुंठाः- ५५ हजार रुपये दोन गुंठाः- १ लाख १० हजार रुपय अर्धा एकर४- ११ लाख रुपये एक एकर५- २२ लाख रुपय 9823581004 ग़न पाठवण्पासाठी आापण गानगक्षीत थेोो गान्या नंबार वा फोन ऐ गुगल पे बरून ढान पाठ्नू ग़कता तनेनन बँक ट्रानफर करण्यासाठी खालील गाहितीना बापर करू शकता , भिक्खू ' Bank : State Bank of India (SBI) Gyanarakshita Bhikkhu Name Branch : cantonment chhaoni 62058324358 Account number IFSC SBIN0020005
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    Bharat Bhoomi Channel Live
    #मैत्री भावना #मेत्ता भावना #मंगल मैत्री #भवतु सब्ब मंगलं #सब्बे सत्ता सुखी होंतु
    मैत्री भावना के लाभ EKAYAN 2 मैत्री भावना अर्थात सभी प्राणियों के प्रति निष्कपट प्रेम , और कल्याण की भावना रखना । शुभेच्छा भगवान बुद्ध ने बताया कि जो व्यक्ति मैत्री भावना का अथ्यास करता है॰ उसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। सुखपूर्वक सोता है मन शांत होने से नींद अच्छी आती है। सुखपूर्वक जागता है 4 और हल्का रहता है। जागने पर मन प्रस्म्न बुरे स्वज् नहीं आते 3 होने से दु : स्वप्न घटते हैं । डर, चिंता और द्वेष कम  मनुष्यों को प्रिय होता है लोग उससे प्रेम और सम्मान करते हैं। अमानुष (देव आदि ) भी प्रिय मानते हैं 5 दिव्य प्राणी भी उसकी रक्षा और सहायता करते हैं। देवता उसकी रक्षा करते हैं सुरक्षित और मंगलमय होता है।  उसका जीवन अधिक  अन्नि , विष और शस्त्र आसानी से हानि नहीं पहुँचा पाते उसका चित्त शांत और संरक्षित रहता हे। चित्त शीध एकाग्र होता है 8 ध्यान और साधना में तेजी से प्रगति होती हे। मुखमण्डल प्रस्न्न और उच्चज्वल हो जाता है भीतर की शांति बाहर झलकती है। मुत्यु के समय भ्रमित नहीं होता  10 अंतिम समय में भी मन स्थिर और शांत रहता है। यदि अरहव्त पद प्राप्त न हो, तो ब्रह्मलोक में उत्पन्न होता हैं महान पुण्य और उच्च गति प्राप्त होती है। मैत्री भावना का सार "सब प्राणी हों, सब निरोग हों , सबका कल्याण हो।"  सुखी मैत्री भावना द्वेष को समाप्त करती है॰ मन को कोमल बनाती है और जीवन में शांति, करूणा तथा आनंद लाती है। मैत्री भावना के लाभ EKAYAN 2 मैत्री भावना अर्थात सभी प्राणियों के प्रति निष्कपट प्रेम , और कल्याण की भावना रखना । शुभेच्छा भगवान बुद्ध ने बताया कि जो व्यक्ति मैत्री भावना का अथ्यास करता है॰ उसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। सुखपूर्वक सोता है मन शांत होने से नींद अच्छी आती है। सुखपूर्वक जागता है 4 और हल्का रहता है। जागने पर मन प्रस्म्न बुरे स्वज् नहीं आते 3 होने से दु : स्वप्न घटते हैं । डर, चिंता और द्वेष कम  मनुष्यों को प्रिय होता है लोग उससे प्रेम और सम्मान करते हैं। अमानुष (देव आदि ) भी प्रिय मानते हैं 5 दिव्य प्राणी भी उसकी रक्षा और सहायता करते हैं। देवता उसकी रक्षा करते हैं सुरक्षित और मंगलमय होता है।  उसका जीवन अधिक  अन्नि , विष और शस्त्र आसानी से हानि नहीं पहुँचा पाते उसका चित्त शांत और संरक्षित रहता हे। चित्त शीध एकाग्र होता है 8 ध्यान और साधना में तेजी से प्रगति होती हे। मुखमण्डल प्रस्न्न और उच्चज्वल हो जाता है भीतर की शांति बाहर झलकती है। मुत्यु के समय भ्रमित नहीं होता  10 अंतिम समय में भी मन स्थिर और शांत रहता है। यदि अरहव्त पद प्राप्त न हो, तो ब्रह्मलोक में उत्पन्न होता हैं महान पुण्य और उच्च गति प्राप्त होती है। मैत्री भावना का सार "सब प्राणी हों, सब निरोग हों , सबका कल्याण हो।"  सुखी मैत्री भावना द्वेष को समाप्त करती है॰ मन को कोमल बनाती है और जीवन में शांति, करूणा तथा आनंद लाती है।
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