सुशील मेहता
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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि मां भगवती की आराधना का पर्व है नवरात्रि. नवरात्रि में मां के नौ रूपों की भक्ति करने से हर मनोकामना पूरी होती है. साल में चार बार नवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है. दो नवरात्रि गुप्त होती हैं और दो सामान्य होती हैं. ये माघ और आषाढ़ मास में आती हैं. दो सामान्य नवरात्रि आश्विन मास और चैत्र मास में आती हैं. गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना के लिए विशेष महत्व होता है.ऐसी मान्यता है कि तंत्र मंत्र की सिद्धि के लिए इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है. इस नवरात्रि में माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ ध्रूमावती, माँ बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। माघ नवरात्री उत्तरी भारत में अधिक प्रसिद्ध है, और आषाढ़ नवरात्रि मुख्य रूप से दक्षिणी भारत में लोकप्रिय है। शक्ति साधना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व नवरात्रि को सनातन धर्म का सबसे पवित्र और ऊर्जादायक पर्व माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में चार नवरात्रि पड़ती है जो पौष, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन मास में पड़ती है। जिसमें से दो गुप्त नवरात्रि होती है और दो सार्वजनिक होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान तंत्र विद्या का विशेष महत्व है। इसी कारण गुप्त नवरात्रि का पर्व हर कोई नहीं मनाता है। इस समय की गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली तथा चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और कोक्ष को देने वाली होती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण समय मध्य रात्रि से सूर्योदय तक अधिक प्रभावशाली बताया गया है। आषाढ़ माह में #शुभ कामनाएँ 🙏
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