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#मीराबाई #krishna #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान
मीराबाई - SA NEWS राजस्थान राच जौ आप जानना बादन ः ட9 इतिहास का वो छिपा हुआ रहस्य क्या आप जानते हैं कौन थे मीराबाई के आध्यात्मिक गुरु? थे) से हुई और उन्हें कबीर साहेब अमृतमयी dhT सुनने का अवसर मिला, तो उनकी आध्यात्मिक प्रवचन आँखें खुल गईं उन्हें यह शाश्वत ज्ञान हुआ कि श्री कृष्ण 7 जी जन्म मृत्यु के तो केवल तीन लोक की शक्ति हैं, जो स्वयं चक्र में बंधे हैं। पूर्ण मोक्ष और चौरासी लाख के झंझट से मुक्ति केवल अविनाशी कबीर परमेश्वर की भक्ति से ही संभव ٤١ मीराबाई मोक्ष की तड़प लेकर कबीर साहेब की शरण में Gq गईं॰ तो कबीर साहेब ने उनकी एक विशेष परीक्षा लेने का निर्णय लिया। कबीर जी ने ही मीराबाई को आदेश दिया कि वे जाकर उनके परम शिष्य संत रविदास (रैदास ) जी से नाम- लें। इसके पीछे एक गहरा रहस्य था दीक्षा संत रविदास जी चमार जाति से थे और मीराबाई एक उच्च राजपूत घराने की थीं, इसलिए कबीर साहेब यह परखना चाहते थे कि मीराबाई को अपने उच्च कुल या जाति का कोई अभिमान तो नहीं है? > संत रविदास जी से नाम दीक्षा लेना तो केवल एक परीक्षा मात्र थी। इस कठिन परीक्षा में सफल होकर मीराबाई ने समाज की ऊंच नीच की हुए राजघराने के अहंकार को त्याग दिया। परवाह न करते इस परीक्षा के बाद, मीराबाई ने कबीर जी को ही अपना गुरु राजपूत घराने की वो राजकुमारी, जिसके  गुरु तो स्वयं कबीर परमेश्वर जी धारण किया। उनके असली भी हर मंदिर में सुनाई की गूंज आज  ही थे, जिनसे बाद में उन्होंने वास्तविक नाम-दीक्षा प्राप्त की। মতনা लिए कृष्ण भक्ति में देती है। हाथ में इकतारा वर्तमान समय में समाज के इसी अज्ञान का भंडाफोड़ छवि से तो पूरी दुनिया  लीन मीराबाई की जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज अपने शास्त्र- वाकिफ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रमाणित तत्वज्ञान के माध्यम से कर रहे हैं। संत रामपाल इतिहास के पन्नों में एक ऐसा गहरा राज़ दफ़न महाराज गीता अध्याय 4 के श्लोक 5 और 9 का प्रमाण देकर है, जिसे समाज से हमेशा छुपाया गया? एक करते हैं कि श्री कृष्ण जी ने स्वयं अर्जुन से कहा था कि सिद्ध ऐसा सच जो आपकी धार्मिक धारणाओं को तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं। ' जब श्री कृष्ण जी स्वयं पूरी तरह झकझोर कर रख देगा। आम जनता जन्म॰्मरण के चक्र में हैं तो वे किसी को पूर्ण मोक्ष कैसे दे आज भी यही मानती है कि मीराबाई की भक्ति सकते हैं? आज संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र ऐसे श्री कृष्ण तक ही सीमित थी और उन्हें किसी पूर्ण संत हैंजो कबीर साहेब के उसी गुप्त तत्वज्ञान को उजागर  आवश्यकता   नहीं पडी। लेकिन गुरु   की कर रहे हैं। मीराबाई की तरह यदि आपको भी पूर्ण मोक्ष की वास्तविकता इससे कोसों दूर और बेहद चाह है॰ तो आज ही संत रामपाल जी महाराज की शरण शुरुआत में मीराबाई भी श्री সীন্ধান নালী ৯I ग्रहण करें और अपना कल्याण करवाएं। कृष्ण को ही सर्वोपरि मानती थीं। लेकिन जब  उनकी मुलाकात कबीर परमेश्वर (जो उस काशी में जुलाहे के रूप में लीला कर रहे समय SA NEWS राजस्थान राच जौ आप जानना बादन ः ட9 इतिहास का वो छिपा हुआ रहस्य क्या आप जानते हैं कौन थे मीराबाई के आध्यात्मिक गुरु? थे) से हुई और उन्हें कबीर साहेब अमृतमयी dhT सुनने का अवसर मिला, तो उनकी आध्यात्मिक प्रवचन आँखें खुल गईं उन्हें यह शाश्वत ज्ञान हुआ कि श्री कृष्ण 7 जी जन्म मृत्यु के तो केवल तीन लोक की शक्ति हैं, जो स्वयं चक्र में बंधे हैं। पूर्ण मोक्ष और चौरासी लाख के झंझट से मुक्ति केवल अविनाशी कबीर परमेश्वर की भक्ति से ही संभव ٤١ मीराबाई मोक्ष की तड़प लेकर कबीर साहेब की शरण में Gq गईं॰ तो कबीर साहेब ने उनकी एक विशेष परीक्षा लेने का निर्णय लिया। कबीर जी ने ही मीराबाई को आदेश दिया कि वे जाकर उनके परम शिष्य संत रविदास (रैदास ) जी से नाम- लें। इसके पीछे एक गहरा रहस्य था दीक्षा संत रविदास जी चमार जाति से थे और मीराबाई एक उच्च राजपूत घराने की थीं, इसलिए कबीर साहेब यह परखना चाहते थे कि मीराबाई को अपने उच्च कुल या जाति का कोई अभिमान तो नहीं है? > संत रविदास जी से नाम दीक्षा लेना तो केवल एक परीक्षा मात्र थी। इस कठिन परीक्षा में सफल होकर मीराबाई ने समाज की ऊंच नीच की हुए राजघराने के अहंकार को त्याग दिया। परवाह न करते इस परीक्षा के बाद, मीराबाई ने कबीर जी को ही अपना गुरु राजपूत घराने की वो राजकुमारी, जिसके  गुरु तो स्वयं कबीर परमेश्वर जी धारण किया। उनके असली भी हर मंदिर में सुनाई की गूंज आज  ही थे, जिनसे बाद में उन्होंने वास्तविक नाम-दीक्षा प्राप्त की। মতনা लिए कृष्ण भक्ति में देती है। हाथ में इकतारा वर्तमान समय में समाज के इसी अज्ञान का भंडाफोड़ छवि से तो पूरी दुनिया  लीन मीराबाई की जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज अपने शास्त्र- वाकिफ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रमाणित तत्वज्ञान के माध्यम से कर रहे हैं। संत रामपाल इतिहास के पन्नों में एक ऐसा गहरा राज़ दफ़न महाराज गीता अध्याय 4 के श्लोक 5 और 9 का प्रमाण देकर है, जिसे समाज से हमेशा छुपाया गया? एक करते हैं कि श्री कृष्ण जी ने स्वयं अर्जुन से कहा था कि सिद्ध ऐसा सच जो आपकी धार्मिक धारणाओं को तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं। ' जब श्री कृष्ण जी स्वयं पूरी तरह झकझोर कर रख देगा। आम जनता जन्म॰्मरण के चक्र में हैं तो वे किसी को पूर्ण मोक्ष कैसे दे आज भी यही मानती है कि मीराबाई की भक्ति सकते हैं? आज संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र ऐसे श्री कृष्ण तक ही सीमित थी और उन्हें किसी पूर्ण संत हैंजो कबीर साहेब के उसी गुप्त तत्वज्ञान को उजागर  आवश्यकता   नहीं पडी। लेकिन गुरु   की कर रहे हैं। मीराबाई की तरह यदि आपको भी पूर्ण मोक्ष की वास्तविकता इससे कोसों दूर और बेहद चाह है॰ तो आज ही संत रामपाल जी महाराज की शरण शुरुआत में मीराबाई भी श्री সীন্ধান নালী ৯I ग्रहण करें और अपना कल्याण करवाएं। कृष्ण को ही सर्वोपरि मानती थीं। लेकिन जब  उनकी मुलाकात कबीर परमेश्वर (जो उस काशी में जुलाहे के रूप में लीला कर रहे समय - ShareChat