ShareChat
click to see wallet page
search
22 22 22 22 मुझसे आँख मिलाकर तो देखो अपने दिल मे बसाकर तो देखो गम हो जायेंगे फ़ना सारे अपने पास बिठाकर तो देखो महक उठेंगे नग्मे सारे लबो पे इन्हें सजाकर तो देखो खिल उठेगी हर कली दिल की दिल मे प्यार जगाकर तो देखो डर क्यूँ रहे हो जहाँ से तुम सर इक बार उठाकर तो देखो शर्म से छुप जायेगा चाँद भी रुख से पर्दे हटाकर तो देखो ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 16/11/2017 #शायरी #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️
शायरी - 21 22 22 मिताकर मुझस आँख अरपने दिल मे बसाक जायेंगे सार గ WTIగ फ़ना पास बिठाकरतो देखो अणा 331 नग्मे महक HR लबो पे इन्हें सजाकर तो देखो खिल उठेगी हर कली दिल की दिल मे प्यार जगाकर तो देखो डर क्यूँ रहे हो जहाँ से तुम सर इक बार उठाकर तोदेखो शर्म से छुप जायेगा चाँद भी रुखसे पर्दे हटाकर तो देखो ( लक्ष्मण दावानी 16/11/2017 Shot on UIO Vivo Acamera 21 22 22 मिताकर मुझस आँख अरपने दिल मे बसाक जायेंगे सार గ WTIగ फ़ना पास बिठाकरतो देखो अणा 331 नग्मे महक HR लबो पे इन्हें सजाकर तो देखो खिल उठेगी हर कली दिल की दिल मे प्यार जगाकर तो देखो डर क्यूँ रहे हो जहाँ से तुम सर इक बार उठाकर तोदेखो शर्म से छुप जायेगा चाँद भी रुखसे पर्दे हटाकर तो देखो ( लक्ष्मण दावानी 16/11/2017 Shot on UIO Vivo Acamera - ShareChat