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सखी सहेली - Author on ShareChat
सखी सहेली
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#🙏आरती संग्रह
सर्व देव वन्दना गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः महेश्वरः  गुरुर्देवो गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः II (१ ) सूर्यकोटि समप्रभ 1 निर्विघ्नं कुरु  वक्रतुण्ड महाकाय मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।। (२) सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।  या देवी नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।l (३) कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना या ब्रह्याच्युतशंकर प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता  सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा  (4) सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोडस्तुते।। (५) कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा  बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानी सहितं नमामि।। (६) शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् II (७) रामाय रामभद्रायरामचंद्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः।l (८) आपदामपहर्तारं दातारां सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं  श्रीरामं भूयोनभूयो नामाम्यहम्।। (९) वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ಕಹ ತಗಪ೯ Il (10) देवकीपरमानन्दं कृष्णं नमो ब्रह्मण्य देवाय गोब्राह्मण हिताय च | जगत् हिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः II(l२) नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् | देवीं सरस्व्तीं व्यासं ततो जय मुदीरयेत् Il(a२) मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।  मनोजवं वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।l(1३) त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव सर्वम् त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव मम् देव देव।। ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् , पूर्ण मुदच्यते , पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्ण मेवा वशिष्यते। ३० शांतिः शांतिः शांतिः सर्व देव वन्दना गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः महेश्वरः  गुरुर्देवो गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः II (१ ) सूर्यकोटि समप्रभ 1 निर्विघ्नं कुरु  वक्रतुण्ड महाकाय मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।। (२) सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।  या देवी नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।l (३) कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना या ब्रह्याच्युतशंकर प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता  सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा  (4) सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोडस्तुते।। (५) कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा  बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानी सहितं नमामि।। (६) शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् II (७) रामाय रामभद्रायरामचंद्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः।l (८) आपदामपहर्तारं दातारां सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं  श्रीरामं भूयोनभूयो नामाम्यहम्।। (९) वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ಕಹ ತಗಪ೯ Il (10) देवकीपरमानन्दं कृष्णं नमो ब्रह्मण्य देवाय गोब्राह्मण हिताय च | जगत् हिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः II(l२) नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् | देवीं सरस्व्तीं व्यासं ततो जय मुदीरयेत् Il(a२) मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।  मनोजवं वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।l(1३) त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव सर्वम् त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव मम् देव देव।। ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् , पूर्ण मुदच्यते , पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्ण मेवा वशिष्यते। ३० शांतिः शांतिः शांतिः
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    #🙏आरती संग्रह
    ।।जय गौर।। II9্সী যাখামে"ী নিতযনII तुलसी स्तुति II II श्री नमो नमों तुलसी महारानी , नमो नमो हरि की पटरानी II जाके दरस - परस अघ नासै , महिमा वेद पुराण बखानी | जाके पत्र मंजरी कोमल , श्रीहरि चरण कमल लपटानी 1 पूरण तप कीन्हे, शालिग्राम की महापटरानी | तुलसी ೫ನ धूप दीप नैवेद्य आरती , पुष्पन की वर्षा बर्षानी | छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन, बिन हरि एक न मानी | तुलसी शिव सनकादि और ब्रह्मादिक , खोजत फिरत महामुनि ज्ञानी | चंद्रसखी मैया तेरो यश गाऊँ, भक्तिदान दीजै महारानी | ।।जय गौर।। II9্সী যাখামে"ী নিতযনII तुलसी स्तुति II II श्री नमो नमों तुलसी महारानी , नमो नमो हरि की पटरानी II जाके दरस - परस अघ नासै , महिमा वेद पुराण बखानी | जाके पत्र मंजरी कोमल , श्रीहरि चरण कमल लपटानी 1 पूरण तप कीन्हे, शालिग्राम की महापटरानी | तुलसी ೫ನ धूप दीप नैवेद्य आरती , पुष्पन की वर्षा बर्षानी | छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन, बिन हरि एक न मानी | तुलसी शिव सनकादि और ब्रह्मादिक , खोजत फिरत महामुनि ज्ञानी | चंद्रसखी मैया तेरो यश गाऊँ, भक्तिदान दीजै महारानी |
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    #🙏आरती संग्रह
    ।।जय गौर।। 0 IIश्री राधारमणो विजयते।।  Il 9ಗಳನೆಳೆಗೆ Il निशुम्भ - शुम्भ - मर्दिनीं प्रचण्डमुण्डखण्डनीम् নিন্যনামিনীমূ Il ?Il ` वने रणे प्रकाशिनीं भजामि I ? Il त्रिशूल - मुण्ड धारिणीं धराविघातहारिणीम् 4 गृहे गृहे निवासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् II २I१ दरिद्रदुःखहारिणीं सतां विभूतिकारिणीम्  4 वियोगशोकहारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् Il ३ ।I लसत्सुलोललोचनां जने सदा वरप्रदाम् कपालशूलधारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् II ४ II कराब्जदानदाधरां   शिवां शिवप्रदायिनीम् 4 भजामि विन्ध्यवासिनीम् II ५ ।I वरावराननां থুসা ऋषीन्द्र जामिनिप्रदां त्रिधास्यरूपधारिणीम् ( তল সল নিনামিনী সলাসি নিম্নামিনীমূ Il & Il विशिष्टसृष्टिकारिणीं विशालरूपधारिणीम् 4 महोदरे विशालिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् II ७।l पुरन्दरादिसेवितां सुरारिवंशखण्डिताम् 4 विशुद्धबुद्धिकारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् II ८ II विन्ध्येश्वरीस्तोत्रं सम्पूर्णम् II इति I ।।जय गौर।। 0 IIश्री राधारमणो विजयते।।  Il 9ಗಳನೆಳೆಗೆ Il निशुम्भ - शुम्भ - मर्दिनीं प्रचण्डमुण्डखण्डनीम् নিন্যনামিনীমূ Il ?Il ` वने रणे प्रकाशिनीं भजामि I ? Il त्रिशूल - मुण्ड धारिणीं धराविघातहारिणीम् 4 गृहे गृहे निवासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् II २I१ दरिद्रदुःखहारिणीं सतां विभूतिकारिणीम्  4 वियोगशोकहारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् Il ३ ।I लसत्सुलोललोचनां जने सदा वरप्रदाम् कपालशूलधारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् II ४ II कराब्जदानदाधरां   शिवां शिवप्रदायिनीम् 4 भजामि विन्ध्यवासिनीम् II ५ ।I वरावराननां থুসা ऋषीन्द्र जामिनिप्रदां त्रिधास्यरूपधारिणीम् ( তল সল নিনামিনী সলাসি নিম্নামিনীমূ Il & Il विशिष्टसृष्टिकारिणीं विशालरूपधारिणीम् 4 महोदरे विशालिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् II ७।l पुरन्दरादिसेवितां सुरारिवंशखण्डिताम् 4 विशुद्धबुद्धिकारिणीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् II ८ II विन्ध्येश्वरीस्तोत्रं सम्पूर्णम् II इति I
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    सखी सहेली
    #🙏आरती संग्रह
    आरतीश्रीलक्ष्मीजी (मैया) लक्ष्मी लक्ष्मी जय माता , जय माता | विष्णु निशदिन గాగౌ II3Il নিঘানা तुमको हर रुद्राणी   तू॰ ही   जिंग 3HI, ब्रह्माणी रमा , ٩١٨٢ ١ ध्यावत, सूर्य II3ll ऋषि चन्द्रमा नारद गाता निरंजनि, सु खा-सम्पत्ति 7f रूप दाता | जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता I।ऊँग।ा पाताल निवासिनी, 8 ব্রুপ तू   ही शुभदाता | कर्मन्प्रभाव भवनिधि की प्रकाशिनी , II3Il त्राता तहँ ٨ रहती , घर   तुम মন সানা | सद्गुण मन   नहीं II3Il 8 q सम्भव जाता , ঘনানা बिन होते, 37 कोई यज्ञ 7 T 7 पाता | वैभव II3ೌIl तुमसे q সান-দান का आता मंदिर क्षीरोदधि कुरई गुण शुभ जाता | ٦٤ बिन II3ll గ్రౌా चतुर्दश रत्न पाता সী   ক্ষীহ   নং महालक्ष्मी जी आरती , TTT | Il3ೌIl आनन्द उर पाप जाता समाता , उतर आरतीश्रीलक्ष्मीजी (मैया) लक्ष्मी लक्ष्मी जय माता , जय माता | विष्णु निशदिन గాగౌ II3Il নিঘানা तुमको हर रुद्राणी   तू॰ ही   जिंग 3HI, ब्रह्माणी रमा , ٩١٨٢ ١ ध्यावत, सूर्य II3ll ऋषि चन्द्रमा नारद गाता निरंजनि, सु खा-सम्पत्ति 7f रूप दाता | जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता I।ऊँग।ा पाताल निवासिनी, 8 ব্রুপ तू   ही शुभदाता | कर्मन्प्रभाव भवनिधि की प्रकाशिनी , II3Il त्राता तहँ ٨ रहती , घर   तुम মন সানা | सद्गुण मन   नहीं II3Il 8 q सम्भव जाता , ঘনানা बिन होते, 37 कोई यज्ञ 7 T 7 पाता | वैभव II3ೌIl तुमसे q সান-দান का आता मंदिर क्षीरोदधि कुरई गुण शुभ जाता | ٦٤ बिन II3ll గ్రౌా चतुर्दश रत्न पाता সী   ক্ষীহ   নং महालक्ष्मी जी आरती , TTT | Il3ೌIl आनन्द उर पाप जाता समाता , उतर
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    सखी सहेली
    #🙏आरती संग्रह
    तुलसी माता जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता | जय सब जग की सुख दाता, तुम ही वर दाता ।। Hq ப1 से ऊपर, सब रोगों   से ऊपर | करके, सबकी ச = भव & সানা 6 बल्ली है 8 पुत्री बटु এযামা; সুৎ ग्राम्या। विष्णु प्रिये जो सेवे, सो नर तर जाता। हरिके शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित। पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता। लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में। से, सुख मानव लोक संपति पाता | तुम्हीं हरिको तुम अति प्यारी , श्यामवर्ण सुकुमारी| प्रेम अजब श्री हरि का, कैसा नाता। तुमसे जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता | तुलसी माता जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता | जय सब जग की सुख दाता, तुम ही वर दाता ।। Hq ப1 से ऊपर, सब रोगों   से ऊपर | करके, सबकी ச = भव & সানা 6 बल्ली है 8 पुत्री बटु এযামা; সুৎ ग्राम्या। विष्णु प्रिये जो सेवे, सो नर तर जाता। हरिके शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित। पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता। लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में। से, सुख मानव लोक संपति पाता | तुम्हीं हरिको तुम अति प्यारी , श्यामवर्ण सुकुमारी| प्रेम अजब श्री हरि का, कैसा नाता। तुमसे जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता |
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    सखी सहेली
    #🙏आरती संग्रह
    प्रतिदिन स्मरण करने वाले मंत्र #प्रातः हाथ(कर) दर्शनम्* कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।  करमूले #पृथ्वी क्षमा प्रार्थना* समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते। (ా] पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्श क्षमश्वमेव |l #त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण* ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। शनिराहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।  g೯ಣ ೩: #स्नान मन्त्र * गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।।  #सूर्यनमस्कार* ऊँ सूर्य आत्मा जगतस्तस्पुषश्च आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्य व्याथि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्।। #आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोडस्तु ते।l #दीप दर्शन* #शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोडस्तु ते।l  #दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः| दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोडस्तु ते।। प्रतिदिन स्मरण करने वाले मंत्र #प्रातः हाथ(कर) दर्शनम्* कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।  करमूले #पृथ्वी क्षमा प्रार्थना* समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते। (ా] पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्श क्षमश्वमेव |l #त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण* ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। शनिराहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।  g೯ಣ ೩: #स्नान मन्त्र * गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।।  #सूर्यनमस्कार* ऊँ सूर्य आत्मा जगतस्तस्पुषश्च आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्य व्याथि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्।। #आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोडस्तु ते।l #दीप दर्शन* #शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोडस्तु ते।l  #दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः| दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोडस्तु ते।।
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