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#✍गुलजारांचे साहित्य
✍गुलजारांचे साहित्य - जब भी देखता हूं किसी गरीब को हँसते हुए . 0 तो यकीन आ जाता है की खुशियों का ताल्लुक दौलत से नहीं होता ...!! जब भी देखता हूं किसी गरीब को हँसते हुए . 0 तो यकीन आ जाता है की खुशियों का ताल्लुक दौलत से नहीं होता ...!! - ShareChat