क्या आपको पता है कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर की रक्षा स्वयं हनुमान जी करते हैं? और उन्हें सोने की बेड़ियों में क्यों बांधा गया था? 🚩🌊 आइए जानते हैं 'बेड़ी हनुमान जी' की यह बेहद रोचक और अद्भुत कथा! 👇 🔱 चार धामों में से एक है पुरी धाम ओडिशा का विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर, जिसे राजा इंद्रद्युम्न ने हनुमान जी की प्रेरणा से ही बनवाया था। इस पवित्र मंदिर की रक्षा का दायित्व स्वयं प्रभु जगन्नाथ ने रामदूत हनुमान जी को सौंप रखा है। यहां के चारों द्वारों पर हनुमान जी का पहरा है। 🌊 आखिर क्यों बंधे हैं हनुमान जी बेड़ियों में? मुख्य द्वार के सामने विशाल समुद्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में समुद्र ने 3 बार जगन्नाथ जी के मंदिर को नुकसान पहुंचाया था। तब महाप्रभु जगन्नाथ ने वीर मारुति (हनुमान जी) को समुद्र को नियंत्रित करने के लिए वहां तैनात किया। 👀 दर्शन का लोभ और समुद्र की शरारत पवनपुत्र हनुमान जी ठहरे परम भक्त! जब-तब वे प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के दर्शनों का लोभ नहीं रोक पाते और प्रभु के दर्शन के लिए नगर में प्रवेश कर जाते। लेकिन जैसे ही वे अपनी जगह छोड़ते, समुद्र भी उनके पीछे-पीछे नगर में प्रवेश कर जाता था। ⛓️ प्रभु ने पहनाई 'स्वर्ण बेड़ी' हनुमान जी की इस भोली सी आदत और भक्ति से उत्पन्न होने वाली परेशानी को देखकर, अंततः महाप्रभु जगन्नाथ ने उन्हें समुद्र तट पर 'स्वर्ण बेड़ी' (सोने की जंजीर) से बांध दिया, ताकि वे अपनी जगह छोड़कर न जा सकें और समुद्र भी अपनी मर्यादा में रहे। 🛕 प्रसिद्ध बेड़ी हनुमान मंदिर आज भी जगन्नाथ पुरी के सागर तट पर 'बेड़ी हनुमान' का यह प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। दूर-दूर से भक्त बेड़ी में जकड़े अपने प्रिय हनुमान जी के दर्शन करने आते हैं। क्या आपने पुरी यात्रा के दौरान 'बेड़ी हनुमान जी' के दर्शन किए हैं? कमेंट्स में जरूर बताएं! 🙏 ।। जय श्री जगन्नाथ जी ।। ।। जय श्री राम ।। . ॥ सियापति रामचंद्र की जय ॥ ॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥ 🙏👇 . 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩 ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🚩जय श्रीराम🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌺 श्री गणेश #🔱हर हर महादेव #🙏 जय संतोषी माँ 🌼 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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