sn vyas
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#ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का पूरा मतलब क्या है ? जो आप जानते हो वो नहीं है आओ जानते है : जब सनत्कुमार पूरी तरह उनके पुत्र बन गए, तो ब्रह्मा जी ने उन्हें भगवान विष्णु के महामंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" के बारह अक्षरों पर आधारित 'द्वादशपत्रयोग' का उपदेश दिया। उन्होंने भगवान विष्णु के शरीर के अंगों को राशि, महीने और अक्षरों के साथ जोड़कर इस तरह समझाया: क्रम भगवान का अंग मंत्र का अक्षर राशि महीना: 1- शिखा (चोटी) ॐ - मेष -वैशाख 2- मुख (मुंह) न - वृष - ज्येष्ठ 3- दोनों भुजाएं (हाथ) मो - मिथुन - आषाढ़ 4- दोनों आंखें भ - कर्क - श्रावण 5- हृदय (दिल) ग -सिंह -भाद्रपद 6- कवच -व - कन्या -आश्विन 7- अस्त्र-समूह (हथियार)ते - तुला -कार्तिक 8- नाभि वा - वृश्चिक -मार्गशीर्ष (अघन) 9- जघन (कमर/कटी)- सु -धनु - पौष 10-दोनों जांघें -दे- मकर- माघ 11- दोनों घुटने- वा - कुम्भ - फाल्गुन 12- दोनों पैर -य - मीन - चैत्र ब्रह्मा जी ने कहा, "हे मुनि! भगवान का यह स्वरूप एक ऐसा चक्र है जिसमें बारह आरे और बारह नाभियां हैं। जो इस रहस्य को जान लेता है, वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। इसके बाद ब्रह्मा जी ने भगवान के अन्य रूपों का वर्णन किया: दूसरा रूप: यह सत्वगुणी, अविनाशी, चार मुख, चार बांहों वाला और छाती पर श्रीवत्स का चिन्ह धारण करने वाला रूप है। तीसरा रूप: यह तमोगुणी 'शेष' रूप है, जिसके हजारों पैर और हजारों मुख हैं, जो प्रलय के समय पूरी सृष्टि का संहार करता है। चौथा रूप: यह रजोगुणी रूप है, जो लाल रंग का है, जिसके चार मुख और दो भुजाएं हैं। यह माला धारण किए हुए है और यही सृष्टि का निर्माण करने वाला 'आदिपुरुष' रूप है। !!जय श्री कृष्णा!!
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