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#गायत्री #गायत्री मंत्र #गायत्री मंत्र
गायत्री - भूर्भुवः स्वः तत्सविनूर्वरेण्यं धीमहि  देवस्य भ्गों  प्रचोदेयात्  যা ল: ferat आाजय मत्पनय  0 erae प्जूवेद  মাবব ন্র  पवदद अगस्त्य संहिता , महर्षि 3R गायत्री मंत्र के जप से पवित्र हुई मनुष्य की वाणी स्फटिक मणि की तरह निर्मल और पारदर्शी हो जाती है। ऐसी अवस्था में साधक लिए लोक-्कल्याण के जो कुछ भी कहता है, वह सत्य में परिणत होने लगता है। -50 भूर्भुवः स्वः तत्सविनूर्वरेण्यं धीमहि  देवस्य भ्गों  प्रचोदेयात्  যা ল: ferat आाजय मत्पनय  0 erae प्जूवेद  মাবব ন্র  पवदद अगस्त्य संहिता , महर्षि 3R गायत्री मंत्र के जप से पवित्र हुई मनुष्य की वाणी स्फटिक मणि की तरह निर्मल और पारदर्शी हो जाती है। ऐसी अवस्था में साधक लिए लोक-्कल्याण के जो कुछ भी कहता है, वह सत्य में परिणत होने लगता है। -50 - ShareChat